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India's First Euthanasia: 13 साल से Coma में रहे Harish Rana का AIIMS में शांतिपूर्ण अंतिम सफर | Oneindia Hindi
सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद देश में पहली बार किसी मरीज को पैसिव इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) दी जा रही है। जानिए AIIMS दिल्ली में चल रही इस बेहद जटिल और संवेदनशील मेडिकल प्रक्रिया का एक-एक सच।

In a landmark medical and legal event in India, 33-year-old Harish Rana, who has been in a vegetative coma state for 13 years following a tragic fall, is undergoing passive euthanasia at AIIMS, New Delhi. Authorized by the Supreme Court of India, this marks the country's first legally documented withdrawal of life support. The multidisciplinary medical team at AIIMS is carefully executing the removal of artificial nutrition and oxygen while administering palliative sedation to ensure a painless, dignified, and natural death.

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~HT.318~ED.104~PR.250~GR.506~

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Transcript
00:00सब को माफ करते हुए
00:04सब से माफी मखते हुए
00:05कोल मादा पिता बना चाहता है कि अपने बेटे को ऐसे करे
00:11आज आज आज
00:15क्या बताओ मैं अब माँ बाप को कैसे लगता हुए
00:23देश में पहली बार किसी मरीज को इच्छा मृत्यू दी जा रही है
00:2713 साल से कोमा में जीवन और मित्यू के भी जूल रहे हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मित्यू
00:33की अनुमती मिलने के बाद
00:34दिल्ली के अखिल भारतिय आयूर्विक्यान संस्थान यानि की एम्स लाया गया है
00:38हरीश साल 2013 में बीटेक की पढ़ाई के दौरान चौती मंजल से गिर गए थे जिसके कारण उनके सिर में
00:45गंभी चोटे आई और वो तब से कोमा में है
00:48तेरह वर्षों तक क्रितिम पोशन और आपसिजन के सहारे जीवित रहने के बाद अब उन्हें एम्स के परिसर के पैलियेटिव
00:54केर जूनिट में भरती कराया गया
00:56जहां डौक्टरों की एक विशिश टीम लगातार उनकी निकरानी कर रही है
01:00एम्स में एनस्थीसिया और पैलियेटिव मेडिसन विभाग की प्रोफेसर डौक्टर सीमा मिश्रा के नितित्वों में एक विशिश मेडिकल टीम बनाए
01:08गए जिसमें नियूरो सर्जरी और अनको एनस्थीसिया और मनुचिकिस्सा सहित कई विभागों के विशशग्य भी
01:14शामिल हैं एम्स के अनको एनस्थीसिया और पैलियेटिव के विभाग के प्रमुक डौक्टर शूश्मा भटनागर के अनुसार ये कोई एक
01:22पल में होने वाली प्रक्रिया कता ही नहीं है डौक्टरों का साफ तोर पर मानना है कि इस पूरी प्रक्रिया
01:28का एक मात्र उद्द
01:30विश्या मरीज को किसी भी प्रकार की शारिरिक या फिर मांसिक पीड़ा से बचाना है इसका मकसद ना तो मौत
01:36को टालना है और नहीं उसे जल्दी बुलाना बलकि प्रक्रतिक मित्यों को शांती पोर्म धंग से आने देना है
02:00यूज नहीं करते हमारे हर एफ़र्ट होता है उसमें कोई यूथेनेजिया वर्ड नहीं होता बलकि एक अच्छा पैलेटिव केर फिजिशन
02:07होता है वो हर संभव कोशिश करता है कि वो उसका एंड को प्रोलोंग नहीं करे कोई साभी सपोर्ट देके
02:14जो हम एंड प्रोलों�
02:20नहीं करें दवायां देखें इच्छा मृत्यों की ये पूरी प्रग्रिया बेहर जटिल और संवेधन शील होती है इसमें सबसे पहले
02:26डॉक्तर्स की टीम मरीज के वर्टमान स्थिती का बारीकी से आकलन करती है और ये देखती है कि किस प्रकार
02:32की जीवन रक्षक प्रणाल
02:49हटाते ही हटाने के तुरद बाद ही आप समझ लिजे उसे किसी भी तरह है कि भीचैनी घुटन या पर
02:55कष्ट महसूस ना हो ये कोई सक्रिया इच्छा मृत्यू नहीं है जिसमें किसी घातक इंजेक्शन का इस्तिमाग हो बल्कि ये
03:02जीवन को कृतिम रूप से बनाय रखने
03:06के एक सू विचारित प्रक्रिया है प्राण त्यागने में लगने वाले समय को लेका डॉक्टर सा कहना है कि मौत
03:12कब होगी इसका कोई पुपता तोर पर स्पष्ट आप मैसेज हमसे नहीं ले सकते एमस के मीडियर रिपूर्स के अनुसार
03:19सूत्रों के मुताबिक डॉक्टरो
03:36यह समय सीमा पूरी तरह से एक अनुमान है कि हर मरीज का शरीर अलग तरीके से प्रक्रिक्रिया देता है
03:43और हरीश राणा के केस में भी कुछ ऐसा ही होता नज़र आएगा इस पूरी अवधी में डॉक्टर्स हरपल उनके
03:49शरीर में होने वाले बदलावों पर नज़र रखे
03:51हरीश के मता पिता की उम्र बढ़ रही है और भविश्य में देख भाल की चिंता ने उन्हें अदालत जाने
03:57के लिए मजबूर कर दिया पिता शुकराणा ने भारी मन से बताया कि फैसला लेना पीहद कट हिन था लेकिन
04:03बेटी की पीड़ा खत्म करने के लिए ये ज़रूरी
04:06भी था परिवार ने उन्हें आध्यात्मिक प्राटनाओं के साथ शांती पूर्ण विदाई दी और अब एम्स के डॉक्टर ये सुनेशित
04:13कर रही है कि हरीश का अंतिम सफर पूरी तरह से दर्दमुक्द और गरिमामाय हो बहराल मामले को आप कैसे
04:21दिखते हैं सोचल मीडि
04:22पर वाइरल वो अंतिम विडियो क्या आप तक पहुंचा अपने राय कॉमेंट बॉक्स में जरूर दीजेगा मेरा नाम है मुकंद
04:28आप बने रहे वन इंडिया के साथ शुक्रिया
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