00:00खुशामदीद, आज हम एक बहुत ही एहम तारीखी तज्जिये का अगास करने जा रहे हैं।
00:05इस तज्जिये में हम कर्बला के तारीखी वाकियात, खास तोर पर उस दोर की समाजी और स्यासी हरकियात,
00:11दुरुस्ट टाइम लाइन और बीवी रबाब की जानिब से काइम की गई इस देर पास समाजी मीरास का एक गेर
00:17जानिबदाराना जाइजा लेंगे,
00:19जो आज भी काइम है, तो आएए देखते हैं कि तारीख के ये औराक हमें क्या बताते हैं।
00:25इस गहरी और कसीर जहती तारीख को सही मानों में समझने के लिए हम एक वाज़े तर्टीब के साथ चलेंगे,
00:31यानि अब्तदाई मदीना की खांदानी हरकियात से बात शुरू करेंगे, फिर हिजरत के असबाब, कर्बला के कठिन वाकियात, असीरी के
00:40मराहिल और आखिर में इस अजीम सकाफ्ती मीरास पर बात करेंगे जो इन तमाम हालात के नतीजे में उभर कर
00:46सामने आई।
00:47तो चलिए, बिलकुल बुन्याद से शुरुआत करते हैं, यानि इप्तिदाई मदीना के उन समाजी धांचों और खांदानी तहाद से जो
00:56हिजरत से पहले वहां काइम थे।
01:17उम्मे फर्वा का निका, इमाम हसन से और छोटी बेटी बीबी रबाब का निका, इमाम हुसें से हुआ।
01:24ये सरफ शादिया नहीं थी, बलके इस दोर का एक बहुत बड़ा समाजी और माशी इंजमाम था।
01:31अब इस ने समाजी माहोल में बीबी रबाब अपनी बेपना सखावत की वज़ से पूरे अरब में जानी जाने लगी।
01:38वो खुद तो बहुत कम गो और मोहताद तब्यत की मालिक थी, लेकिन यहां जो चीज तारीख के तालिब इल्मों
01:44के लिए सबसे ज्यादा मतवज़ा करने वाली है, वो है इमाम हुसें की उनके साथ और अपनी बेटी सुकैना के
01:50साथ गहरी वाबस्तगी।
01:52इमाम हुसें का वो मशूर कौल तो आपने सुना ही होगा कि उन्हें वो घर बिलकुल पसंद नहीं जहां रबाब
01:58और सुकैना ना हो, ये उनके आपसी तालू की गहराई को जाहर करता है।
02:27इन तारीखों को जहन में रखना इसलिए जरूरी है ताके आगे चलकर हम इन तारीखी शक्सियात की उम्रों का दुरूस्त
02:35अंदाजा लगा सकें।
02:52पीछे बीबी रबाब और उनके खादमीन थे। इस दोर के कबाईली और खांदानी हरकियात को समझने के लिए ये एक
02:59इंतहाई किलीदी मुशाइदा है।
03:01सोचिए सिर्फ 18 दिन। जी हाँ जब मदीना से मक्का और फिर करबरा तक का ये 6 माँ पर मोहित
03:10तवील और कठिन सफर शुरू हुआ तो उस वक्त कमसिन अली अजगर की उम्र महज 18 दिन थी। ये एक
03:18ऐसा नमबर है जो आने वाकियात की शिदत और इन सफरी तकालीफ को जह
03:52इन में बिलकुल वाज़ कर देता है।
03:53प्रिशनाक सूरतहाल पैदा हो गई। दस महर्रम के इस आखरी वक्त को तारीख कुछ इस तरह गेर जानबदाराना अंदाज में
04:00बयान करती है।
04:01इमाम हुसेन आखली मरतबा मुखालिफ फौच के सामने आते हैं और एक सदा देते हैं।
04:08नासिरुन यनसुरुना यानि क्या कोई है जो मेरी मदद करें।
04:12तारीख हमें बताती है कि सदा इस तगासा के जवाब में कमसिन अली असगर खेमे में अपने जूले से जमीन
04:19पर गिर गए।
04:20अमन और मदद की इस फर्याद का अंजाम एक इंतहाई अलमनाक और सखत तारीखी हकीकत की सूरत में निकला।
04:28इस छे महा के कमसन बच्चे को एक से शाखा यानि तीन भाल वाले तीर से शहीद कर दिया गया।
04:35और इसके बाद इमाम हुसेन ने अपनी शहादत से बिलकुल पहले अपनी तलमार जुल फकार की मदद से कबर खोद
04:43कर अपने बेटे को खुद सुपुर्दे खाक किया।
04:46इन वाकियात के बाद अब हमें इन हालात का जाइजा लेना है जो पसे मांदगान पर गुजरे यानि असीरी का
04:53वो तवील और कठिन दौर।
04:55ग्यारा महरम को मैदान में लाशों की बेहुर्मती देखने के बाद बीबी रबाब ने अल्ला के हुजूर एक बड़ा ही
05:01सखत एहद किया।
05:25कर्बला की तप्तीज जमीन से शुरू होकर कूफा फिर वहां से शाम के कैद खानों तक का सफर और आखरकार
05:32तवील अर्से बाद मदीना वापसी ये पूरा रास्ता उनकी जबरी मुन्तकली का एक कठिन बयान है।
05:55कर दिया गया जिससे पहन कर उन्होंने ये लंबा और तकलीफ दे सफर दे किया था।
06:00आखर में आईए देखते हैं कि ये सारे तारीखी वाकियात किस तरह बीबी रबाब के एहद और उनकी काइम करदा
06:08अजीम समाजी मेरास में तबदील हुए।
06:11ये हमारे तज्जिय का सबसे एहम हिस्सा है।
06:14देखें जब बीबी रबाब वापस मदीना आती हैं तो उन्होंने क्या किया।
06:18उन्होंने अपनी बाकी बची हुई तमाम दौलत तक्सीम कर दी और दो रिवायात यानि मजलिस और नियाज को एक बाकाइदा
06:27समाजी इदारे की शकल दे दी।
06:29अब ये सिर्फ जाती सोग नहीं रहा था। ये तारीख को मसलसल जिन्दा रखने और मुस्तहकीन तक खाना पहुचाने का
06:36एक बाकाइदा कल्चरल सिस्टम बन गया।
06:39ये उनके जाती गम और दौलत के इस्तिमाल से काइम होने वाली वो मिरास थी जिसने आने वाले वक्तों के
06:45समाजी रवईयों को हमेशा के लिए बदल दिया।
06:48इनके उस एहद की जो जिसमानी कीमत थी वो मक्का के एक आलम के इस वाके से बिलकुल वाज़ होती
06:55है।
06:55होता कुछ यू है कि वो आलम इमाम सज्जाद की खिद्मत में हाजिर होता है और देखता है कि एक
07:01जईफा कड़ी धूप में बैठी मुसलसल रो रही है।
07:04जब उसने वज़ा पूछी तो इमाम सज्जाद बताते हैं कि ये उनकी वालिदा बीबी रबाब हैं जो आज भी अपना
07:11वो कर्बला वाला वादा पूरी शिद्दत से निभा रही है।
07:34ने अपना वादा तोड़ने के बजाए मौत की दूआ की और फिर उनका इंतकाल हुआ और उन्हें जन्नत बगी में
07:41उनके वालिदेन के पहलू में सुपरदिखा किया गया।
07:44तो जैसे ही हम इस तजजिये को यहां समेटते हैं इसे कि इंतहाई एहम सवाल पर जरूर गोर कीजेगा।
07:50हमने देखा कि कैसे एक शदीद जाती गमने तारीखी रिवायात की बनियाद रखी।
07:55लेकिन आखिर किस तरह एक जाती दुख एक ऐसे मजबूत समाजी इदारे में तबदील हो जाता है जो बड़ी-बड़ी
08:02सल्तनतों के मिठ जाने के सदियों बाद भी आज तक पूरी आबोताब से कायम है।
08:07ये यकीन हम सब के लिए सोचने और तहकीक के नए दर्वाजे खोलने का मकाम है।
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