00:00आप सब को इस नए तज्सिये में खुशाम दीद।
00:03आज हम तारीख कर्बला के एक नहायत एहम और दिल को छू लेने वाले वाके का जाइजा ले रहे हैं।
00:09ये दास्तान है शेहजादा कासिम की बेमिसाल बहादुरी की जहां जाहरी ताकत और रोहानी हिम्मत का एक अजीम टकराओ देखने
00:18को मिलता है।
00:19चलिए इस कहानी की जजबाती गहराई और वाकियात के सिलसले को करीब से समझते हैं।
00:25चलिए सीधा इस वाके में चलते हैं।
00:27सोचिए एक 13 साल का बच्चा अपने चच्चा इमाम हुसैन से पूछता है कि क्या उसका नाम शहीद होने वालों
00:33की फहरिस्त में हैं।
00:35और उनका जवाब सुनकर कहता है अगर आपके कदमों में मरना मौत है तो ये मेरे लिए शहद से भी
00:41ज्यादा मीठी है।
00:42ये अलफाज वाके रूंग्टे खड़े कर देने वाले हैं और उस नौजवान के पुररजम इरादे को जाहर करते हैं।
00:49अब अगर हम इन वाकियात की टाइम लाइन पर नज़र डालें तो ये सब कुछ इंतहाई तेजी से होता है।
00:56दस महर्म की रात को शहीदों के नाम बताये जाते हैं। अगली सुबह जंग शुरू होती है। फिर एक खुफिया
01:01तावीज खुलता है जिससे इजाज़त मिलती है। और आखिर में वो आखरी मार का बर्पा होता है। वक्त पिलकुल तेजी
01:07से हाथ से निकलता जा रहा था
01:09हिस्सा एक कर्बला की शाब और कुर्बानी का अजीम जजबा। देखें उस रात का मनजर इंतहाई घंजबा मगर पुर्वकार था।
01:19इमाम हुसैन अपने साथियों को बता रहे थे कि अगले दिन क्या होने वाला है। एक एक करके नाम पकारे
01:25जा रहे थे और वहीं इस सब
01:27के दरमियान इस कम उमर लड़के की बेचैनी बढ़ रही थी इस उमीद में कि शायद उसे भी अपनी जान
01:33फिदा करने का मौका मिल जाए। अगली सुभा दस महरम का सूरज निकलता है। और यहां हम देखते हैं कि
01:40शहजादा कासिम शदीद गम में रो रहे हैं। क्यों? क्
01:47तरफ उनकी छोटी सी उमर थी और दूसरी तरफ अपने खांदान के दिफा में जान निसार करने का बेपना जजबा
01:53जो उनकी इस बेचैनी और तकलीफ का सबब बन रहा था। इससा दो इमाम हसन की खुफिया वसीयत और तावीज
02:00का विरसा अब यहां कहानी में एक अच्�
02:15को समझना बिल्कुल जरूरी है आम तोर पर हम तावीज को हिफाज़त की अलामत मानते हैं है ना लेकिन यहां
02:22यह कोई आम तावीज नहीं था यह शहजादा कासिम के बाजू पर बन था एक फिजिकल वसीयत नामा था जिसमें
02:29उनके मरहूम वालिद का एक खुफिया पैगा
02:44है इमाम हसन ने इसमें लिखा था मेरी तरफ से कासिम को अपने कदमों में कुर्बान होने की अजाज़त दे
02:50मतलब जरा सोचिए एक बाप ने सालों पहले से ही अपने बेटे की तर्बियत और तैयारी इस एक अजीम दिन
02:58के लिए कर रखी थी इस तावीज को पढ़ने के ब
03:14लेकिन उस तेरा साला बच्चे के छोटे से वजूद पर खांदान की कोई भी जरा पूरी ही नहीं आती ये
03:21लमहा वाज़ करता है कि ये टक्राव किस कदर बेजोड होने वाला था
03:26हिस्सातीन एक बेमिसाल बहादुरी और अजीम मुकाबला
03:30बगएर मुनासिब जिरा के शहजादा कासिम मैदान की तरफ बढ़ते हैं और यहां वाकियात इंतहाई तेजी पकड़ते हैं
03:38मैदान में दाखिल होते ही अपनी कम उम्री की परवा किये बगएर वो बिल्कुल एक शेर की तरह ललकारते हैं
03:45और दुश्मन की फौज को आमने सामने आने का चैलेंज करते हैं
03:49जरा इन दोनों फरकों देखें एक तरफ सर्फ 13 साल का बेजरा यतीम लड़का खड़ा है
04:08वाकिया इस बात की बेहतरीन मिसाल है कि घुरूर कैसे खाक में मिलता है
04:13सबसे पहले अजरक ने मजाक उड़ाया और इसे अपनी तोहीन समझ कर सिर्फ अपने बेटों को आगे भीजा
04:19लेकिन कासिम ने उन सब को एक के बाद एक शिकस्त दे दी
04:23जब सारे बेटे मारे गए तो उस तजर्बेकार सिपाह सालार अजरक को
04:28खुद एक बच्चे के सामने मैदान में आने पर मजबूर होना पड़ा
04:32जब अजरक खुद मैदान में आया तो क्या हुआ
04:35फैसला इंतहाई तेजी से हो गया
04:38जराय बताते हैं कि शहजादा कासिन ने सिर्फ एक तेजवार किया
04:42और वो नामवर जंगजू वहीं जमीन पर धेर हो गया
04:45बिल्कुल अनबलीवबल एक ही जटके में हजारों की उस मुखालिफ फौज को हैरत और दहशत ने घेर लिया
04:52हिस्सा चार आखरी मारका और रसूलों की खलाफ वर्जी
04:56अजरक की मौत ने दुश्मन फौज में ऐसी शदीद भौकलाहट पैदा की
05:01कि उन्होंने जंग के तमाम असूल यकमश तोड़ दिये
05:04एक बच्चे के हाथों ऐसी शर्मनाक शिकस की रुस्वाई इस कदर थी
05:09कि आमने सामने की लड़ाई का रिवाज ही खतम कर दिया गया
05:13अब हालाद बिलकुल भी काबू हो गए
05:15फौज की एक बहुत बड़ी तादाद में अचानक एक ही वक्त में
05:19उस कम उम्र नौजवान पर हमला कर दिया
05:22सामने से दुश्मनों की हजारों तलवारें उस अकेले वजूद पर बरसने लगी
05:27पूरी फौज का एक तेरह साला बच्चे पर ऐसे तूट परना
05:31जंके हर उसूल की धजियां उड़ा रहा था
05:33और बात सिर्फ तलवारों तक नहीं रुकी
05:36इस अचानक यलगार में दाएं और बाएं तरफ से तीरों की शदीद बारिश शुरू कर दी गई
05:42एक अकेले और नहते बच्चे पर हथियारों का ऐसा तौफान खड़ा किया गया
05:47जिसकी पूरी तारीख में वाकई कोई मिसाल ढूनना मुश्किल है
05:51और आखिर में हर सिम्ट से नेजे चलाए गए
05:54इन लगातार और बेरहम हमलों का नतीज़ ये निकला
05:58कि शहजादा कास्म आखिर कार अपने घोरे से जमीन पर गिरते हैं
06:03और अपने उन आखरी लमहात में वो अपने चचा इमाम हुसैन को मदद के लिए पकारते हैं
06:09आवाज सुनते ही इमाम हुसैन तेजी से मैदान की तरफ लपकते हैं
06:13मुखालिफ फौज और घोरों के दर्मयान शदीद अफरा तफरी मच जाती है
06:17हर तरफ गर्दो गुबार और भाग दोर और इस हंगामे के दर्मयान एक नहायत दिल खुराश मनजर सामने आता है
06:25इमाम हुसैन को अपने भतीजे का जखमों से चूर जिस मिलता है
06:29हिस्सा पांच शहादत और एक अजीम विरसा
06:32यहां आकर इन वाकियात की रफ्तार बिलकुल आहिस्ता और पुर्सोज हो जाती है
06:38मैदान के उस हैबतनाक शौर गुल के बाद एक अजीब सी खामोशी चा जाती है
06:43अब सिर्फ एक गुर्बानी और अजीम विरसे का असर बाकी था
06:48आईे देखते हैं कि इस इंतहाई तकलीफ दे वाके के फौरण बाद खानदान पर क्या गुजरी
06:54जराए इस लमहे को कुछ इस तरह बयान करते हैं कि इमाम हुसैन अपने भतीजे के उस खस्ता वजूद को
07:00अपने हाथों में उठा कर आहिस्ता आहिस्ता खैमे की तरफ वापिस लाते हैं
07:05He will have to keep these friends in the end of the day, where the children of the family of
07:09these were safe.
07:10This is the view that he is the view that he is the view of his own.
07:16So here the most important point is that in the case of the husband's husband's father's husband's father,
07:22this is the view of his husband's father.
07:25But he has not only the view he has.
07:28He has his own daughter's daughter's daughter's daughter's daughter.
07:31This is the one that has been a bad thing, but it has been one of the best and most
07:40important things.
07:41This is the one that has been a mother.
07:45It was the one that went back to this one that he would be able to do this.
07:53This is the one that he had to do this.
07:58and that was very much in the end of the day.
08:00But this journey got up to the world.
08:02But this journey came from the end of the world of a great time.
08:09This journey began in the end of the day there was a question that we have and you can do
08:13a very much in the world.
08:15When the single scene was given,
08:18when the death of the world began to be moved,
08:20when it came from the end of the day,
08:24when the death of the day began to be done,
08:28जो शहजादा कासिम जैसे नौजवानों के सीने में था
08:31सोचिएगा जरूर
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