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Discover the heartbreaking story of Shahzada Qasim (A.S), the beloved son of Imam Hasan (A.S), and his heroic sacrifice in the Battle of Karbala. This emotional Islamic documentary explores the tragic events of the 10th of Muharram, the courage of the Ahlul Bayt (A.S), and the unforgettable martyrdom of one of Karbala's youngest heroes.

Learn about the final moments of Shahzada Qasim (A.S), his loyalty to Imam Hussain (A.S), and the lessons of faith, sacrifice, and bravery that continue to inspire millions around the world.

Watch this powerful Karbala story and remember the sacrifices made for truth and justice.
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00:00आप सब को इस नए तज्सिये में खुशाम दीद।
00:03आज हम तारीख कर्बला के एक नहायत एहम और दिल को छू लेने वाले वाके का जाइजा ले रहे हैं।
00:09ये दास्तान है शेहजादा कासिम की बेमिसाल बहादुरी की जहां जाहरी ताकत और रोहानी हिम्मत का एक अजीम टकराओ देखने
00:18को मिलता है।
00:19चलिए इस कहानी की जजबाती गहराई और वाकियात के सिलसले को करीब से समझते हैं।
00:25चलिए सीधा इस वाके में चलते हैं।
00:27सोचिए एक 13 साल का बच्चा अपने चच्चा इमाम हुसैन से पूछता है कि क्या उसका नाम शहीद होने वालों
00:33की फहरिस्त में हैं।
00:35और उनका जवाब सुनकर कहता है अगर आपके कदमों में मरना मौत है तो ये मेरे लिए शहद से भी
00:41ज्यादा मीठी है।
00:42ये अलफाज वाके रूंग्टे खड़े कर देने वाले हैं और उस नौजवान के पुररजम इरादे को जाहर करते हैं।
00:49अब अगर हम इन वाकियात की टाइम लाइन पर नज़र डालें तो ये सब कुछ इंतहाई तेजी से होता है।
00:56दस महर्म की रात को शहीदों के नाम बताये जाते हैं। अगली सुबह जंग शुरू होती है। फिर एक खुफिया
01:01तावीज खुलता है जिससे इजाज़त मिलती है। और आखिर में वो आखरी मार का बर्पा होता है। वक्त पिलकुल तेजी
01:07से हाथ से निकलता जा रहा था
01:09हिस्सा एक कर्बला की शाब और कुर्बानी का अजीम जजबा। देखें उस रात का मनजर इंतहाई घंजबा मगर पुर्वकार था।
01:19इमाम हुसैन अपने साथियों को बता रहे थे कि अगले दिन क्या होने वाला है। एक एक करके नाम पकारे
01:25जा रहे थे और वहीं इस सब
01:27के दरमियान इस कम उमर लड़के की बेचैनी बढ़ रही थी इस उमीद में कि शायद उसे भी अपनी जान
01:33फिदा करने का मौका मिल जाए। अगली सुभा दस महरम का सूरज निकलता है। और यहां हम देखते हैं कि
01:40शहजादा कासिम शदीद गम में रो रहे हैं। क्यों? क्
01:47तरफ उनकी छोटी सी उमर थी और दूसरी तरफ अपने खांदान के दिफा में जान निसार करने का बेपना जजबा
01:53जो उनकी इस बेचैनी और तकलीफ का सबब बन रहा था। इससा दो इमाम हसन की खुफिया वसीयत और तावीज
02:00का विरसा अब यहां कहानी में एक अच्�
02:15को समझना बिल्कुल जरूरी है आम तोर पर हम तावीज को हिफाज़त की अलामत मानते हैं है ना लेकिन यहां
02:22यह कोई आम तावीज नहीं था यह शहजादा कासिम के बाजू पर बन था एक फिजिकल वसीयत नामा था जिसमें
02:29उनके मरहूम वालिद का एक खुफिया पैगा
02:44है इमाम हसन ने इसमें लिखा था मेरी तरफ से कासिम को अपने कदमों में कुर्बान होने की अजाज़त दे
02:50मतलब जरा सोचिए एक बाप ने सालों पहले से ही अपने बेटे की तर्बियत और तैयारी इस एक अजीम दिन
02:58के लिए कर रखी थी इस तावीज को पढ़ने के ब
03:14लेकिन उस तेरा साला बच्चे के छोटे से वजूद पर खांदान की कोई भी जरा पूरी ही नहीं आती ये
03:21लमहा वाज़ करता है कि ये टक्राव किस कदर बेजोड होने वाला था
03:26हिस्सातीन एक बेमिसाल बहादुरी और अजीम मुकाबला
03:30बगएर मुनासिब जिरा के शहजादा कासिम मैदान की तरफ बढ़ते हैं और यहां वाकियात इंतहाई तेजी पकड़ते हैं
03:38मैदान में दाखिल होते ही अपनी कम उम्री की परवा किये बगएर वो बिल्कुल एक शेर की तरह ललकारते हैं
03:45और दुश्मन की फौज को आमने सामने आने का चैलेंज करते हैं
03:49जरा इन दोनों फरकों देखें एक तरफ सर्फ 13 साल का बेजरा यतीम लड़का खड़ा है
04:08वाकिया इस बात की बेहतरीन मिसाल है कि घुरूर कैसे खाक में मिलता है
04:13सबसे पहले अजरक ने मजाक उड़ाया और इसे अपनी तोहीन समझ कर सिर्फ अपने बेटों को आगे भीजा
04:19लेकिन कासिम ने उन सब को एक के बाद एक शिकस्त दे दी
04:23जब सारे बेटे मारे गए तो उस तजर्बेकार सिपाह सालार अजरक को
04:28खुद एक बच्चे के सामने मैदान में आने पर मजबूर होना पड़ा
04:32जब अजरक खुद मैदान में आया तो क्या हुआ
04:35फैसला इंतहाई तेजी से हो गया
04:38जराय बताते हैं कि शहजादा कासिन ने सिर्फ एक तेजवार किया
04:42और वो नामवर जंगजू वहीं जमीन पर धेर हो गया
04:45बिल्कुल अनबलीवबल एक ही जटके में हजारों की उस मुखालिफ फौज को हैरत और दहशत ने घेर लिया
04:52हिस्सा चार आखरी मारका और रसूलों की खलाफ वर्जी
04:56अजरक की मौत ने दुश्मन फौज में ऐसी शदीद भौकलाहट पैदा की
05:01कि उन्होंने जंग के तमाम असूल यकमश तोड़ दिये
05:04एक बच्चे के हाथों ऐसी शर्मनाक शिकस की रुस्वाई इस कदर थी
05:09कि आमने सामने की लड़ाई का रिवाज ही खतम कर दिया गया
05:13अब हालाद बिलकुल भी काबू हो गए
05:15फौज की एक बहुत बड़ी तादाद में अचानक एक ही वक्त में
05:19उस कम उम्र नौजवान पर हमला कर दिया
05:22सामने से दुश्मनों की हजारों तलवारें उस अकेले वजूद पर बरसने लगी
05:27पूरी फौज का एक तेरह साला बच्चे पर ऐसे तूट परना
05:31जंके हर उसूल की धजियां उड़ा रहा था
05:33और बात सिर्फ तलवारों तक नहीं रुकी
05:36इस अचानक यलगार में दाएं और बाएं तरफ से तीरों की शदीद बारिश शुरू कर दी गई
05:42एक अकेले और नहते बच्चे पर हथियारों का ऐसा तौफान खड़ा किया गया
05:47जिसकी पूरी तारीख में वाकई कोई मिसाल ढूनना मुश्किल है
05:51और आखिर में हर सिम्ट से नेजे चलाए गए
05:54इन लगातार और बेरहम हमलों का नतीज़ ये निकला
05:58कि शहजादा कास्म आखिर कार अपने घोरे से जमीन पर गिरते हैं
06:03और अपने उन आखरी लमहात में वो अपने चचा इमाम हुसैन को मदद के लिए पकारते हैं
06:09आवाज सुनते ही इमाम हुसैन तेजी से मैदान की तरफ लपकते हैं
06:13मुखालिफ फौज और घोरों के दर्मयान शदीद अफरा तफरी मच जाती है
06:17हर तरफ गर्दो गुबार और भाग दोर और इस हंगामे के दर्मयान एक नहायत दिल खुराश मनजर सामने आता है
06:25इमाम हुसैन को अपने भतीजे का जखमों से चूर जिस मिलता है
06:29हिस्सा पांच शहादत और एक अजीम विरसा
06:32यहां आकर इन वाकियात की रफ्तार बिलकुल आहिस्ता और पुर्सोज हो जाती है
06:38मैदान के उस हैबतनाक शौर गुल के बाद एक अजीब सी खामोशी चा जाती है
06:43अब सिर्फ एक गुर्बानी और अजीम विरसे का असर बाकी था
06:48आईे देखते हैं कि इस इंतहाई तकलीफ दे वाके के फौरण बाद खानदान पर क्या गुजरी
06:54जराए इस लमहे को कुछ इस तरह बयान करते हैं कि इमाम हुसैन अपने भतीजे के उस खस्ता वजूद को
07:00अपने हाथों में उठा कर आहिस्ता आहिस्ता खैमे की तरफ वापिस लाते हैं
07:05He will have to keep these friends in the end of the day, where the children of the family of
07:09these were safe.
07:10This is the view that he is the view that he is the view of his own.
07:16So here the most important point is that in the case of the husband's husband's father's husband's father,
07:22this is the view of his husband's father.
07:25But he has not only the view he has.
07:28He has his own daughter's daughter's daughter's daughter's daughter.
07:31This is the one that has been a bad thing, but it has been one of the best and most
07:40important things.
07:41This is the one that has been a mother.
07:45It was the one that went back to this one that he would be able to do this.
07:53This is the one that he had to do this.
07:58and that was very much in the end of the day.
08:00But this journey got up to the world.
08:02But this journey came from the end of the world of a great time.
08:09This journey began in the end of the day there was a question that we have and you can do
08:13a very much in the world.
08:15When the single scene was given,
08:18when the death of the world began to be moved,
08:20when it came from the end of the day,
08:24when the death of the day began to be done,
08:28जो शहजादा कासिम जैसे नौजवानों के सीने में था
08:31सोचिएगा जरूर
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