00:00जब सूर्य कुंडली के अश्टम भाव मिस्थित होता है तो जीवन की यात्रा साधारन नहीं रह जाती
00:06महर्शी पराशर के अनुसार अश्टम भाव रहस्य गुप्त विद्याओं अचानक होने वाले बदलावों और आयू का स्थान है
00:17यहां सूर्य का होना व्यक्ति को जीवन के सबसे गहरे सक्तियों को खोजने की शक्ति देता है
00:23अश्टम भाव में बैठा सूर्य अपनी सात्वी पूर्न द्रिष्टी सीधे वितिय भाव पर डालता है
00:30एक तरफ अश्टम भाव जो गहरे रहस्यों, संकटों और अचानक मिलने वाले धन का है
00:37और दूसरी तरफ वितिय भाव जो हमारे परिवार, वानी और संचित धन, वेल्थ का प्रती निधित्व करता है
00:47वितिय भाव पर सूर्य की द्रिष्टी व्यक्ति की वानी में एक अध्भुत तेज और अधिकार देती है
00:54ऐसा व्यक्ति जब बोलता है, तो लोग उसकी बात सुनते है
00:58यह प्लेस्मेंट पैत्रिक संपत्ती अचानक धन लाग या गुप्ट स्रोतों से धन अर्जित करने की प्रबल प्रेणा देती है
01:08व्यक्ति संकटों से निकल कर अपने परिवार के लिए एक मजबूत स्तंभ बनता है
01:14अश्टम का सूर्य जीवन में बड़े रुपान तरण, ट्रांस्फरमेशन्स लाता है
01:19लेकिन इस योग का असली नियम यह है कि जब तक व्यक्ति अश्टम भाव के संकटों
01:25और बदलावों का सामना साहस से नहीं करता
01:29तब तक वह द्वितिय भाव के वास्तविक सुख और पारिवारिक सम्रिधी को नहीं पा सकता
01:35संकट ही उसके भाग्य का निर्मान करते हैं
01:39सावधान रहें, यदि यहां सूर्य पर नकारात्मक प्रभाव हो
01:43तो व्यक्ति की वाणी में तीखापन या अहंकार आ सकता है
01:47जिससे परिवार में मतभेद पैदा होते हैं
01:51अचानक धन का नुकसान या संचित धन को लेकर संघर्ष भी जेलना पड़ सकता है
01:57अश्टम भाव का सूर्य सिखाता है कि सच्ची समरिधी केवल धन में नहीं
02:03बलकि उस ज्यान में है जो जीवन के अंधकार को प्रकाश में बदल दे
02:07जब भीतर परिवर्तन आता है तब वानी और मूल्य दोनों शक्तिशाली बन जाते हैं
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