00:00वैदिक जोतिश में अश्टमभाव, जिसे आयूभाव या रंध्रभाव, कहा जाता है, कुंडली का सबसे रहस्य में अध्याय है।
00:11यह पाताल की गहराई है, जहां आपके जीवन के वे सत्य छिपे हैं, जिन्हें दुनिया नहीं देख सकती।
00:18यह मृत्यू का नहीं, बलकी रुपांतरण, ट्रांस्फरमेशन का द्वार है।
00:24रिशी पराशर के अनुसार अश्टमभाव आपकी आयू, अचानक होने वाली घटनाओं और गुप्त धन का स्वामी है।
00:33यह दुस्थान तो है, लेकिन यहीं से आत्मग्यान का मार भी निकलता है।
00:40यह वह अगनी है जो पुरानी पहचान को जलाकर एक नए सवा का निर्मान करती है।
00:47आधुनिक जोतिश इसे मनो विज्ञान, साइकोलजी और गहन शोध, दीप रिसर्च का केंद्र मानता है।
00:57दूसरों के धन, विरासत और छिपे हुए रहस्यों को उजागर करने की शक्ती इसी भाव से आती है।
01:04विद्वानों के अनुसार, अश्टम भाव आपकी संकट प्रबंधन, क्राइसिस मानिज्मेंट की क्षमता को दर्शाता है।
01:14यदि अश्टम भाव जागरित है, तो व्यत्ती सतह पर नहीं रुपता।
01:18वह सत्य की तहे तक जाता है, चाहे वह विज्ञान हो, अध्यात्म हो या रहस्यमेई विद्याए।
01:25यह भाव आपके जीवन की उन बाधाओं का प्रतीक है, जो आपको तोडने नहीं, बलकि आपको और अधिक शक्तिशाली बनाने
01:34आती है।
01:35यह वह शक्ति है, जो राक से भी जीवन को दोबारा खड़ा कर सकती है।
01:41अश्टम भाव अंत नहीं, बलकि एक नया आरंभ है।
01:46अपने भीतर के रहस्यों को समझें, और परिवर्तन को स्वीकार करें।
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