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In Vedic Astrology, your Kundli is divided into 12 Houses (भाव) — each representing a different aspect of life such as personality, wealth, relationships, career, and spiritual growth.

In this detailed video by Celestial Jyotish, we explain how these 12 houses work together to shape your destiny.

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Transcript
00:00Do you think that the two people are different from each other?
00:06Do you think that the answer is in your own 12 people?
00:10What do we think about the houses?
00:16This is not just food.
00:18It's not just your life.
00:19Your life is different from each other.
00:21Yes, every one is different from each other.
00:24Do you think that you are who you are and who you are?
00:30Namaste, Celestial Jyotish.
00:34In this video, we will see you in the next video.
00:38We will see you in the next video.
00:40We will see you in the next video.
00:46The first one is the second one.
00:48The second one is the second one.
00:50The second one is the second one.
00:53If you are the second one,
00:54If you are the second one,
00:55then it will be stronger than one.
00:57If you are the next two,
00:59but you have to be the second one.
01:04The second one is the second one.
01:11विवाह, आयू, भाग्य, कर्म, लाभ और व्याय, इन सभी की गहराई में उत्रेंगे
01:18तो चलिए, अपनी पहचान से शुरू करते हुए ब्रमान्ड के अंतिम रहस्य तक चलते हैं
01:25आये देखते हैं, आपकी कुंडली के ये बारा भाव आपके बारे में क्या खुलासा करते हैं
01:32वैदिक जोतिश में प्रथम भाव केवल आपके शरीर का विवरन नहीं है
01:36यह वह प्रवेश द्वार है जहां से निराकार आत्मा एक भौतिक रूप धारन करती है
01:44इसे लगन कहा जाता है, वह बिंदु जहां आकाश और प्रित्वी का मिलन होता है
01:52प्राचीन रिश्यों के अनुसार प्रथम भाव पूरी कुंडली का सार है
01:57यदि अन्य सभी भाव भल देने के लिए तैयार हूँ
02:01लेकिन लगन निर्बल हो, तो जातक उन खलों का उपभोग नहीं कर पाता
02:07यह भाव आपके विवेक, आत्मसमा और प्राण शक्ती का नियंतरन केंद्र है
02:14आधुनिक जोतिशिय शोध बताते हैं कि प्रथम भाव आपकी ब्रांडिंग है
02:21दुनिया आपको कैसे देखती है और आप चुनौतियों पर पहली प्रतिक्रिया कैसे देते हैं
02:27यह आपके अवजेतन, सबकॉंशिस और चेतन, कॉंशिस, मन के बीच का पुल है
02:37विद्वानों का यह भी मानना है कि प्रथम भाव का स्वामी, लगनेश, कुंडली के जिस भाव में बैठता है
02:45व्यक्ति के जीवन का मुख्य उद्देश्य और उर्जा उसी दिशा में प्रवाहित होने लगती है
02:50यह आपकी नियती का कमपास
02:54यह भाव आपकी रोग प्रतिरोधक शम्ता, इम्म्यूनिटी और दीर घायू का भी निर्धारन करता है
03:01एक बलिष्ट प्रथम भाव जातक को कठिन से कठिन परिस्थितियों से उबरने की मानसिक और शारिरिक शक्ति प्रदान करता है
03:11प्रथम भाव को समझना, स्वयं को समझने की दिशा में पहला कदम है
03:16यह आपके जीवन का वह बीज है, जिसमें पूरे व्रिक्ष की संभावनाई छिपी है
03:23अगर आपको यह विडियो पसंद आया हो, तो लाइक, शेयर और सब्सक्राइब जरूर करें
03:28वैदिक जोतिश में द्वितिय भाव को धन भाव कहा जाता है
03:33लेकिन इसकी गहराई केवल बैंक बैलेंस तक सीमिट नहीं है
03:38यह भाव आपके मूल्यों, वैलियूस, आपकी जड़ों और उस संचित उर्जा का है
03:45जो आपको जीवन में सुरक्षा प्रदान करती है
03:50प्राचीन ग्रंथों के अनुसार वितिय भाव शरीर के मुख, फेस का प्रती निधित्व करता है
03:57इसमें आपकी वानी, भोजन की आधतें और दाहिनी आख शामिल है
04:04पराशर रिशी के अनुसार यह भाव तै करता है कि आप सत्य बोलेंगे
04:09या असत्य और आपकी वानी में कितनी मिठास या कड़वाहट होगी
04:14आधुनिक शोद इस भाव को संसकारों से जोडता है
04:19यह वह संपत्ती है जो आपको विरासत में मिली है
04:24चाहे वह धन हो, ज्यान हो या पारिवारिक परंपराए
04:28विद्वानों का तर्क है कि द्वितिय भाव आपकी धारन करने की क्षमता
04:33त्यापसिटी टू होल्ड को दर्शाता है
04:36यदि प्रथम भाव आप हैं, तो द्वितिय भाव वह संसाधन है
04:42जो आपके अस्तित्व को बनाय रखने के लिए आवश्यक है
04:46यह आपकी प्राथमिक शिक्षा और बच्पन के उस वातावरन का दर्पन है
04:53जिसने आपके व्यक्तित्व की नीव रखी
04:55एक गहरा तकनी की पहलू यह है कि द्वितिय भाव को मारक भाव भी माना जाता है
05:02यह जीवन की निरंतर्ता और उसके अंत के बीच के उस सुक्ष्म संतुलन को दर्शाता है
05:09जहां अत्यधिक आ सकती ही बंधन का कारण बनती है
05:14आपका द्वितिय भाव आपकी वैल्यू सिस्टम है
05:17आप जो संचय करते हैं वही आपके भविश्य का निर्मान करता है
05:22अपनी जड़ों को पहचाने
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05:31वैदिक जोतिश में त्रितिय भाव जिसे सहज भाव या पराक्रम भाव कहा जाता है
05:39आपके भीतर की उस अगनी का प्रतीक है जो इच्छा को कार्य में बदलती है
05:45यह आपकी भुजाओं की शक्ती और आपके संकल्प की द्रिड़ता है
05:50प्राचीन ग्रंथों के अनुसार यह एक उप्चे भाव है
05:55अर्थात वस्थान जहां महरत और समय के साथ व्रिद्धी होती है
06:01महरशी पराशर इसे साहस, छोटे भाई भहनों और लगु यात्राओं का कारक मानते है
06:07यह भाव बताता है कि आप जीवन के संघर्षों में पीछे हटेंगे या सीना तान कर खड़े होंगे
06:13आधुनिक जोतिशिय शोध इस भाव को हमारे तंत्रिका तंत्र, नर्वस सिस्टम और संचार कौशल से जोड़ता है
06:23आप अपनी बात को दुनिया के सामने कैसे रखते हैं और आपकी लेखन शैली, कितनी प्रभावशाली है
06:31यह त्रितिय भाव तै करता है
06:33विद्वानों के अनुसार यह आपके विकल्पों, चॉइसिस और प्रणनीती का केंद्र है
06:42यदि प्रथम भाव आप हैं, तो त्रितिय भाव वह प्रयास है
06:48जो आप अपनी पहचान बनाने के लिए करते हैं
06:53यह आपके कॉशल, स्किल्स और शौक, होबीज का दरपण है
06:58यह भाव आपके छोटे भाई बहनों के साथ संबंध हूँ
07:03और आपके पडोसियों के साथ व्यवहार को भी दर्शाता है
07:07एक बलिष्ट त्रितिय भाव जातक को कभी ना हार मानने वाली मानसिक शक्ती
07:13मेंटल टफनेस प्रदान करता है
07:17त्रितिय भाव वह उर्जा है जो भाग्य को कर्म से जोडती है
07:22बिना प्रयास के भाग्य भी सुप्त रहता है
07:25अपने पराक्रम को पहचाने
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07:33वैदिक जोतिश में चतुर्थ भाव
07:36जिसे सुख भाव कहा जाता है
07:39आपके हृदय का वह मंदिर है
07:42जहां सच्ची, शांती और संतोष का निवास होता है
07:45यह आपके बाहरी नहीं
07:48बलकि आंतरिक संसार का आधार है
07:51महरशी पराशर के अनुसार
07:53यह केंद्रस्थान है
07:55जीवन का एक प्रमुक्स्तंब
07:58यह मोक्ष त्रिकोन का पहला भाव है
08:00जो दर्शाता है कि आंतरिक सुखी मुक्ती का मार्ग है
08:04यह भाव माता, भूमी, वाहन और पैतरिक संपत्ती का कारक है
08:11आधुनिक शोध इस भाव को हमारे भावनात्मक मस्तिश
08:15और मानसिक शांती से जोड़ता है
08:19आप तनाव में कैसे प्रतिक्रिया देते हैं
08:23आपको सक्चा सुकून कहा मिलता है
08:25और आप अपने लिए घर का अनुभव कैसे बनाते हैं
08:31यह सब चतुर्थ भाव दर्शाता है
08:33यदि प्रतम भाव आप हैं
08:36तो चतुर्थ भाव वह आधार है
08:39जिस पर आपकी पूरी पहचान खड़ी होती है
08:42यह भाव माता के प्रेम, देख भाल और उस सुरक्षा कवच का प्रतीक है
08:48जो हमें जीवन की चुनोतियों में स्थिर रखता है
08:52एक मजबूत चतुर्थ भाव जातक को गहरी आंतरिक द्रिड़ता प्रदान करता है
08:59चतुर्थ भाव वह शांती है
09:01जो बाहर नहीं, अंदर मिलती है
09:04अपने भीतर के घर को पहचाने
09:07क्योंकि वही आपकी सच्ची मुक्ती का मार्ग है
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09:16वैदिक जोतिश में पंचम्भाव
09:19जिसे उत्रभाव कहा जाता है
09:22स्रिजन और अभी व्यक्ती का दिव्यस रोत है
09:25यह केवल संतान ही नहीं
09:28आपकी बुद्धी, आपकी रचनात्मक्ता
09:31और आपकी आत्मा की अभी व्यक्ती का प्रतीक है
09:35यह कुंडली का सबसे शुब लक्ष्मी त्रिकोन स्थान है
09:40यह आपके पूर्व पुन्य का लेखा जोखा है
09:45यानि पिछले जन्मों के वे अच्छे कर्व
09:47जो इस जीवन में आपको भाग्य और सफलता के रूप में मिलते हैं
09:53यही भाव मंत्र शक्ती, उच्च शिक्षा, सक्तेबाजी और अचानक मिलने वाले धन का भी कारक है
10:01आधुनिक संदर्भ में पंचम भाव आपके IQ और आपकी निर्णय लेने की क्षमता को दर्शाता है
10:10आपकी बुद्धी केवल रटा हुआ ज्यान नहीं, बलकि वह विवेक है, जो आपको सही और गलत में फर्ख समझाता है
10:20यह रोमान्स भावनाओं की अभिव्यक्ती और उस खुशी का भाव है, जो हमें अपनी कला या शौकों, अबीस के माध्यम
10:30से मिलती है
10:32संतान के रूप में यह भाव आपके भविश्य के विस्तार को दर्शाता है
10:37एक मजबूत पंचम भाव का अर्थ है, सफल उत्तराधिकारी, और आपके नाम को आगे ले जाने वाली एक नई उर्जा
10:46पंचम भाव वह प्रकाश है, जो आपकी अंतरात्मा की प्रतिभा को दुनिया के सामने लाता है
10:53अपने भीतर के स्रिजन को पहचाने, क्योंकि वही आपका सक्चा उत्तराधिकार है
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11:05वैदिक जोतिश में शष्थ भाव, जिसे अरी भाव कहा जाता है
11:11आपकी स्ट्राटिजिक रिजिलियन्स और प्रतिस परधात्मक शक्ती का केंद्र है
11:17यहाँ आपके जीवन का वहर शेत्र है, जहाँ आप अपनी चुनोतियों को अपनी ताकत में बदलते है
11:24महर्शी पराशर ने शष्थ भाव को उप्चैस्थान कहा है
11:28जहाँ कठिनाया समय के साथ शक्ती में बदल जाती है
11:34यहाँ भाव सेवा, अनुशासन और कर्म शीलता का भी प्रतीक है
11:39यहाँ भाव दर्शाता है कि जातक अपने रिणों को कैसे चुकाता है
11:44रोगों से कैसे लड़ता है और शत्रूओं पर कैसे विजय प्राप करता है
11:49आधुनिक मनो विज्ञान शष्ट भाव को हमारे कोपिंग मेकनिजम्स और स्ट्रेस मैनेजमेंट से जोड़ता है
11:57आप अपने शत्रूओं, चाहे वे बाहरी प्रतिदवन्वी हों या आपके भीतर का आलस्य
12:04उन्हें आप कैसे मैनेज करते हैं
12:07यह शष्ट भाव तै करता है
12:09यह दिखाता है कि अनुशासन और सेवा भाव से आप जीवन की चुनौतियों को अफसर में बदल सकते हैं
12:17एक मजबूत शष्ट भाव, शत्रूहन्ता, योग बनाता है
12:22यह उस मानसिक द्रिड़ता का प्रतीख है जो आपको कानूनी विवादू
12:27और आर्थिक बाधाओं के चक्र व्यू से बाहर निकाल कर सफलता के शिखर पर स्थापित करती है
12:35शष्ट भाव हमें सिखाता है कि संघर्ष ही साधना है
12:38और सेवा ही मुक्ति का मार
12:40अपने भीतर के रणक शेत्र को पहचाने
12:44क्योंकि वहीं से सच्ची विजय और शांती जन्म लेती है
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12:54वैदिक जोतिश में सप्तम भाव को कलत्र भाव और जाया भाव कहा जाता है
13:01यहां आपके अस्तित्व का वह दर्पन है
13:05जिसमें आप दुनिया और अपने जीवन साथी के माध्यम से स्वयं को देखते है
13:11यहां आपकी बाहरी दुनिया से जुड़ने की शक्ती का केंद्र है
13:16महर्शी पराशर के अनुसार यह भाव केंद्र स्थान है
13:20जीवन का वहस्तम्फ
13:22जो विवाह, व्यापारिक साझेदारी और सामाजिक प्रतिष्ठा को नियंत्रिक करता है
13:27यह हमारे काम, पुरुशार्थ का प्रतिख है
13:32जो प्रेम और कर्तव्य के बीच संतुलन सिखाता है
13:36यह भाव दर्शाता है कि हम दूसरों के साथ कैसे तालमेल बिठाते हैं
13:42और अपनी इच्छाओं को वास्तविक्ता में कैसे बदलते हैं
13:46आधुनिक मनोविज्ञान में सब्तम भाव हमारी प्रोजेक्शन और रिलेशन्शिप स्किल्स को दर्शाता है
13:55हम अकसर दूसरों में वही ढूंडते हैं जो हमारे भीतर अधूरा है
14:00चाहे वह व्यापारिक समझोते हों या दामपत्य जीवन
14:05यह भाव आपकी बातची, नेगोसियेशन और समझोते करने की क्षमता को तै करता है
14:12यह सिखाता है कि मैं, से, हम, तक का सफर कैसे तै किया जाए
14:19एक शुब सब्तम भाव न केवल सुखी वैवाहिक जीवन देता है
14:24बलकि आपको समाज में एक विश्वस्निय व्यक्तित्व के रूप में स्थाफित करता है
14:30यह वह शक्ती है, जो विरोधियों को भी सहयोगियों में बदलने का सामर्थे रखती है
14:36सब्तम भाव हमें सिखाता है कि पूर्णता अकेलेपन में नहीं, बलकि सामन जस्य में है
14:43जब हम दूसरों का सम्मान करते हैं, तब ही हम स्वयं को पूर्ण पाते है
14:49अगर आपको यह विडियो पसंद आया हो, तो लाइक, शेर और सब्सक्राइब जरूर करें
14:54वैदिक जोतिश में अश्टम भाव, जिसे आयू भाव या रंध्रभाव कहा जाता है, कुंदली का सबसे रहस्य में अध्याय है
15:05यह पाताल की गहराई है, जहां आपके जीवन के वे सत्य छिपे हैं, जिन्हें दुनिया नहीं देख सकती
15:13यह मृत्यू का नहीं, बलकी रूपांतरण, ट्रांस्फरमेशन का द्वार है
15:19रिशी पराशर के अनुसार अश्टम भाव आपकी आयू, अचानक होने वाली घटनाओ और गुप्ध धन का स्वामी है
15:28यह दुस्थान तो है, लेकिन यहीं से आत्मग्यान का मार भी निकलता है
15:34यह वह अगनी है जो पुरानी पहचान को जलाकर एक नए सवा का निर्मान करती है
15:42आधुनिक जोतिश इसे मनो विज्ञान, साइकोलोजी और गहन शोध, दीप रिसर्च का केंद्र मानता है
15:52दूसरों के धन, विरासत और छिपे हुए रहस्यों को उजागर करने की शक्ती इसी भाव से आती है
16:00विद्वानों के अनुसार, अश्टम भाव आपकी संकट प्रबंधन, क्राइसिस मानेजमेंट की क्षमता को दर्शाता है
16:09यदि अश्टम भाव जागरित है, तो व्यत्ती सतह पर नहीं रुपता
16:13वह सत्य की तह तक जाता है
16:16चाहे वह विज्ञान हो, अध्यात्म हो या रहस्यमेई विद्याए
16:20यह भाव आपके जीवन की उन बाधाओं का प्रतीक है, जो आपको तोडने नहीं
16:26बलकि आपको और अधिक शक्तिशाली बनाने आती है
16:30यह वह शक्ती है, जो राख से भी जीवन को दोबारा खड़ा कर सकती है
16:36अश्टम भाव अंत नहीं, बलकि एक नया आरंभ है
16:41अपने भीतर के रहस्यों को समझें, और परिवर्तन को स्वीकार करें
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16:51वैदिक जोतिश में नवंभाव, जिसे धर्म भाव कहा जाता है
16:58आपके जीवन का वहदवार है जहा भाग्य, आस्था और उच्च ज्यान एक साथ मिलते हैं
17:04यह भाव आपके जीवन की दिशा और आध्यात्मिक यात्रा का मार्क दर्शक है
17:11महर्शी पराशर ने नवं भाव को भाग्यस्थान कहा है
17:15जहां ईश्वर की कृपा और गुरु का आशीरवाद जीवन को दिशा देते हैं
17:21यहाँ भाव तै करता है कि आपका भाग्य आपका साथ कब देगा और आप सत्य की खोज में कितनी दूर
17:29तक जाएंगे आधुनिक मनो विज्ञान नवम भाव को हमारे बिलीव सिस्टम्स और लाइफ फिलोसफी से जोडता है।
17:39आप अपने विश्वासों, शिक्षा और यात्राओं के माध्यम से जीवन में अर्थ खोजते हैं। यहाँ भाव दिखाता है कि कैसे
17:48आस्था और ज्ञान मिलकर आपके भाग्य को आकार देते हैं।
17:52नवम भाव, धर्म प्रदीन, योग है, जहाँ प्रयास, और इश्वरिय कृपा मिलकर जीवन को अवसर और समाधान प्रदान करते हैं।
18:03नवम भाव हमें सिखाता है कि भाग्य केवल सन्योग नहीं, बलकि धर्म और ज्ञान का खल है।
18:10अपने भीतर के विश्वास को पहचाने, क्योंकि वही से सक्चा मार्क दर्शन और मुक्ती जन्म लेती है।
18:28वह बिंदु जहाँ सूर्य अपनी पूर्ण शक्ती में होता है। यहीं पर आपके कर्म, आपकी पहचान बन जाते हैं।
18:38कालिदास के उत्तर कालामरित और फल्दी पिका स्पष्ट कहते हैं।
18:43यह भाव केवल आजीविका नहीं, आज्या और सत्ता का केंद्र है।
18:48यह सबसे शक्तिशाली केंद्र और अर्थ त्रिकोन का शिखर है।
18:53जहां भौतिक सफलता, सामाजिक उत्तरदायत्व से मिलती है।
18:58पिता, राज्य, यश और आपकी लेगसी सब यहीं से प्रकट होते हैं।
19:05आधुनिक भाशा में, यह आपकी professional identity और brand value है।
19:11यह केवल आपका काम नहीं, यह आपकी positioning है दुनिया में।
19:16management जिस impact और authority की बात करता है।
19:22वह जोतिश में दशम भाव की शक्ति है।
19:26यदि चतुर्थ भाव नीव है, तो दशम भाव वह सनरचना है, जिसे दुनिया देखती है।
19:33गीता का निशकाम कर्म, दशम भाव की सर्वोच अवस्था है।
19:38मजबूत दशम भाव आपको केवल सफलता नहीं देता।
19:42वह आपको सम्मान, प्रभाव और कालजे कीरती देता है।
19:47दशम भाव वह कर्म है, जो आपके भाग्य को आकार देता है।
19:52अपने कर्म को महान बनाईए, क्योंकि वही आपकी सक्ची नियती है।
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20:04जन कुंडली का एका दश्भाव, लाबस्थान, आपके जीवन का हराइजन है।
20:10वह बिंदु जहां प्रयास फल में बदलते हैं।
20:13यही से आपकी इच्छाएं वास्तविक्ता बन जाती हैं।
20:19उत्तर कालामरित और फल्दीपि का स्पष्ट रूप से कहते हैं।
20:23यह भाव केवल धन नहीं, यह इच्छाओं की पूर्ती, मित्रों और सामाजिक संपर्क का केंगर है।
20:30यह उप्चय भाव है, जहां भौतिकला, भावनात्मक समर्थन से मिलकर समरिधी बनते हैं।
20:38बड़े भाई भहन, मित्रगन, सहयोगी और आपकी सभी आकांग्षाएं सब यहीं से प्रकट होते हैं।
20:47आज के युग में, यह आपकी सोशिल कैपिटल और इन्फ्लूएंस है।
20:53आप किन लोगों से जुड़े हैं? आपका नेटवर्क कितना बड़ा है? यह ग्यारवा भाव तै करता है।
21:02यदि दशम भाव आपकी पुजिशनिंग है, तो एका दश भाव आपके ग्रोध चानल्ज हैं।
21:09पर एक गहरा सत्य है, पर इच्छा पूरी नहीं होती।
21:13एका दश भाव यह भी दिखाता है कि आपकी कौन सी इच्छाएं वास्तव में सार्थक हैं।
21:19एका दश भाव वह द्वार है, जहाँ व्यक्तिगत इच्छा सामाजिक उपलब्धी में बदलती है।
21:27सही लक्षे चुनिये, क्योंकि वही आपकी वास्तविक उपलब्धी बनता है।
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21:38द्वादश भाव, जिसे व्याय भाव भी कहा जाता है।
21:43यह कुंडली का वहा अंतिम पड़ाव है, जहां संसार की सीमाय समाप्त होती हैं, और अनन्त की शुरुवात होती है।
21:52रिशी पराशर के अनुसार, यह भाव केवल धन की हानी नहीं।
21:57बलकि उर्जा, समय और अहंकार के विसर्जन का भी है।
22:02शास्त्र इसे मुक्ष स्थान कहते हैं, जो आत्मा को जन्ममरन के चक्र से मुक्त करनी की क्षमता रखता है।
22:11यह भाव देशांतर का है।
22:14जातक बारिजात के अनुसार, जब द्वादश भाव का स्वामी बली होता है।
22:19तो व्यक्ति अपनी मात्रि भूमी को त्याग कर परदेश में मान समान और सफलता प्राप करता है।
22:26आध्यात्मिक दृष्टी से यहां शयन सुक और कैवल्य का भाव है।
22:32यहां दान, चैरिटी को सर्वोच स्थान दिया गया है।
22:37उत्तर कालामरिद के अनुसार, यहां भाव बताता है कि आपने पूर्व जन्मों से क्या संचित किया है।
22:44और इस जीवन के अंत में आप क्या साथ लेकर जाएंगे।
22:48शारिरिक रूप से यहां पैरों, फीट और बाईं आग का प्रतिनिधित्व करता है।
22:55यहां हमारे सबकॉंशिस माइंड की वह गहराई है जहां सपने जन्म लेते हैं।
23:01यहां वह एकांथ है जहां हम स्वयम से मिलते हैं।
23:05ग्वादश भाव का सार यही है कि जब तक पात्र खाली नहीं होता, तब तक उसमें परमात्मा की कृपा नहीं
23:12भरती।
23:13यहां स्वयम को खोकर सर्वस्व को पाने का भाव है।
23:17यही है आत्मा की अंतिम यात्रा।
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