00:00Do you think that the two people are different from each other?
00:06Do you think that the answer is in your own 12 people?
00:10What do we think about the houses?
00:16This is not just food.
00:18It's not just your life.
00:19Your life is different from each other.
00:21Yes, every one is different from each other.
00:24Do you think that you are who you are and who you are?
00:30Namaste, Celestial Jyotish.
00:34In this video, we will see you in the next video.
00:38We will see you in the next video.
00:40We will see you in the next video.
00:46The first one is the second one.
00:48The second one is the second one.
00:50The second one is the second one.
00:53If you are the second one,
00:54If you are the second one,
00:55then it will be stronger than one.
00:57If you are the next two,
00:59but you have to be the second one.
01:04The second one is the second one.
01:11विवाह, आयू, भाग्य, कर्म, लाभ और व्याय, इन सभी की गहराई में उत्रेंगे
01:18तो चलिए, अपनी पहचान से शुरू करते हुए ब्रमान्ड के अंतिम रहस्य तक चलते हैं
01:25आये देखते हैं, आपकी कुंडली के ये बारा भाव आपके बारे में क्या खुलासा करते हैं
01:32वैदिक जोतिश में प्रथम भाव केवल आपके शरीर का विवरन नहीं है
01:36यह वह प्रवेश द्वार है जहां से निराकार आत्मा एक भौतिक रूप धारन करती है
01:44इसे लगन कहा जाता है, वह बिंदु जहां आकाश और प्रित्वी का मिलन होता है
01:52प्राचीन रिश्यों के अनुसार प्रथम भाव पूरी कुंडली का सार है
01:57यदि अन्य सभी भाव भल देने के लिए तैयार हूँ
02:01लेकिन लगन निर्बल हो, तो जातक उन खलों का उपभोग नहीं कर पाता
02:07यह भाव आपके विवेक, आत्मसमा और प्राण शक्ती का नियंतरन केंद्र है
02:14आधुनिक जोतिशिय शोध बताते हैं कि प्रथम भाव आपकी ब्रांडिंग है
02:21दुनिया आपको कैसे देखती है और आप चुनौतियों पर पहली प्रतिक्रिया कैसे देते हैं
02:27यह आपके अवजेतन, सबकॉंशिस और चेतन, कॉंशिस, मन के बीच का पुल है
02:37विद्वानों का यह भी मानना है कि प्रथम भाव का स्वामी, लगनेश, कुंडली के जिस भाव में बैठता है
02:45व्यक्ति के जीवन का मुख्य उद्देश्य और उर्जा उसी दिशा में प्रवाहित होने लगती है
02:50यह आपकी नियती का कमपास
02:54यह भाव आपकी रोग प्रतिरोधक शम्ता, इम्म्यूनिटी और दीर घायू का भी निर्धारन करता है
03:01एक बलिष्ट प्रथम भाव जातक को कठिन से कठिन परिस्थितियों से उबरने की मानसिक और शारिरिक शक्ति प्रदान करता है
03:11प्रथम भाव को समझना, स्वयं को समझने की दिशा में पहला कदम है
03:16यह आपके जीवन का वह बीज है, जिसमें पूरे व्रिक्ष की संभावनाई छिपी है
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03:28वैदिक जोतिश में द्वितिय भाव को धन भाव कहा जाता है
03:33लेकिन इसकी गहराई केवल बैंक बैलेंस तक सीमिट नहीं है
03:38यह भाव आपके मूल्यों, वैलियूस, आपकी जड़ों और उस संचित उर्जा का है
03:45जो आपको जीवन में सुरक्षा प्रदान करती है
03:50प्राचीन ग्रंथों के अनुसार वितिय भाव शरीर के मुख, फेस का प्रती निधित्व करता है
03:57इसमें आपकी वानी, भोजन की आधतें और दाहिनी आख शामिल है
04:04पराशर रिशी के अनुसार यह भाव तै करता है कि आप सत्य बोलेंगे
04:09या असत्य और आपकी वानी में कितनी मिठास या कड़वाहट होगी
04:14आधुनिक शोद इस भाव को संसकारों से जोडता है
04:19यह वह संपत्ती है जो आपको विरासत में मिली है
04:24चाहे वह धन हो, ज्यान हो या पारिवारिक परंपराए
04:28विद्वानों का तर्क है कि द्वितिय भाव आपकी धारन करने की क्षमता
04:33त्यापसिटी टू होल्ड को दर्शाता है
04:36यदि प्रथम भाव आप हैं, तो द्वितिय भाव वह संसाधन है
04:42जो आपके अस्तित्व को बनाय रखने के लिए आवश्यक है
04:46यह आपकी प्राथमिक शिक्षा और बच्पन के उस वातावरन का दर्पन है
04:53जिसने आपके व्यक्तित्व की नीव रखी
04:55एक गहरा तकनी की पहलू यह है कि द्वितिय भाव को मारक भाव भी माना जाता है
05:02यह जीवन की निरंतर्ता और उसके अंत के बीच के उस सुक्ष्म संतुलन को दर्शाता है
05:09जहां अत्यधिक आ सकती ही बंधन का कारण बनती है
05:14आपका द्वितिय भाव आपकी वैल्यू सिस्टम है
05:17आप जो संचय करते हैं वही आपके भविश्य का निर्मान करता है
05:22अपनी जड़ों को पहचाने
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05:31वैदिक जोतिश में त्रितिय भाव जिसे सहज भाव या पराक्रम भाव कहा जाता है
05:39आपके भीतर की उस अगनी का प्रतीक है जो इच्छा को कार्य में बदलती है
05:45यह आपकी भुजाओं की शक्ती और आपके संकल्प की द्रिड़ता है
05:50प्राचीन ग्रंथों के अनुसार यह एक उप्चे भाव है
05:55अर्थात वस्थान जहां महरत और समय के साथ व्रिद्धी होती है
06:01महरशी पराशर इसे साहस, छोटे भाई भहनों और लगु यात्राओं का कारक मानते है
06:07यह भाव बताता है कि आप जीवन के संघर्षों में पीछे हटेंगे या सीना तान कर खड़े होंगे
06:13आधुनिक जोतिशिय शोध इस भाव को हमारे तंत्रिका तंत्र, नर्वस सिस्टम और संचार कौशल से जोड़ता है
06:23आप अपनी बात को दुनिया के सामने कैसे रखते हैं और आपकी लेखन शैली, कितनी प्रभावशाली है
06:31यह त्रितिय भाव तै करता है
06:33विद्वानों के अनुसार यह आपके विकल्पों, चॉइसिस और प्रणनीती का केंद्र है
06:42यदि प्रथम भाव आप हैं, तो त्रितिय भाव वह प्रयास है
06:48जो आप अपनी पहचान बनाने के लिए करते हैं
06:53यह आपके कॉशल, स्किल्स और शौक, होबीज का दरपण है
06:58यह भाव आपके छोटे भाई बहनों के साथ संबंध हूँ
07:03और आपके पडोसियों के साथ व्यवहार को भी दर्शाता है
07:07एक बलिष्ट त्रितिय भाव जातक को कभी ना हार मानने वाली मानसिक शक्ती
07:13मेंटल टफनेस प्रदान करता है
07:17त्रितिय भाव वह उर्जा है जो भाग्य को कर्म से जोडती है
07:22बिना प्रयास के भाग्य भी सुप्त रहता है
07:25अपने पराक्रम को पहचाने
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07:33वैदिक जोतिश में चतुर्थ भाव
07:36जिसे सुख भाव कहा जाता है
07:39आपके हृदय का वह मंदिर है
07:42जहां सच्ची, शांती और संतोष का निवास होता है
07:45यह आपके बाहरी नहीं
07:48बलकि आंतरिक संसार का आधार है
07:51महरशी पराशर के अनुसार
07:53यह केंद्रस्थान है
07:55जीवन का एक प्रमुक्स्तंब
07:58यह मोक्ष त्रिकोन का पहला भाव है
08:00जो दर्शाता है कि आंतरिक सुखी मुक्ती का मार्ग है
08:04यह भाव माता, भूमी, वाहन और पैतरिक संपत्ती का कारक है
08:11आधुनिक शोध इस भाव को हमारे भावनात्मक मस्तिश
08:15और मानसिक शांती से जोड़ता है
08:19आप तनाव में कैसे प्रतिक्रिया देते हैं
08:23आपको सक्चा सुकून कहा मिलता है
08:25और आप अपने लिए घर का अनुभव कैसे बनाते हैं
08:31यह सब चतुर्थ भाव दर्शाता है
08:33यदि प्रतम भाव आप हैं
08:36तो चतुर्थ भाव वह आधार है
08:39जिस पर आपकी पूरी पहचान खड़ी होती है
08:42यह भाव माता के प्रेम, देख भाल और उस सुरक्षा कवच का प्रतीक है
08:48जो हमें जीवन की चुनोतियों में स्थिर रखता है
08:52एक मजबूत चतुर्थ भाव जातक को गहरी आंतरिक द्रिड़ता प्रदान करता है
08:59चतुर्थ भाव वह शांती है
09:01जो बाहर नहीं, अंदर मिलती है
09:04अपने भीतर के घर को पहचाने
09:07क्योंकि वही आपकी सच्ची मुक्ती का मार्ग है
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09:16वैदिक जोतिश में पंचम्भाव
09:19जिसे उत्रभाव कहा जाता है
09:22स्रिजन और अभी व्यक्ती का दिव्यस रोत है
09:25यह केवल संतान ही नहीं
09:28आपकी बुद्धी, आपकी रचनात्मक्ता
09:31और आपकी आत्मा की अभी व्यक्ती का प्रतीक है
09:35यह कुंडली का सबसे शुब लक्ष्मी त्रिकोन स्थान है
09:40यह आपके पूर्व पुन्य का लेखा जोखा है
09:45यानि पिछले जन्मों के वे अच्छे कर्व
09:47जो इस जीवन में आपको भाग्य और सफलता के रूप में मिलते हैं
09:53यही भाव मंत्र शक्ती, उच्च शिक्षा, सक्तेबाजी और अचानक मिलने वाले धन का भी कारक है
10:01आधुनिक संदर्भ में पंचम भाव आपके IQ और आपकी निर्णय लेने की क्षमता को दर्शाता है
10:10आपकी बुद्धी केवल रटा हुआ ज्यान नहीं, बलकि वह विवेक है, जो आपको सही और गलत में फर्ख समझाता है
10:20यह रोमान्स भावनाओं की अभिव्यक्ती और उस खुशी का भाव है, जो हमें अपनी कला या शौकों, अबीस के माध्यम
10:30से मिलती है
10:32संतान के रूप में यह भाव आपके भविश्य के विस्तार को दर्शाता है
10:37एक मजबूत पंचम भाव का अर्थ है, सफल उत्तराधिकारी, और आपके नाम को आगे ले जाने वाली एक नई उर्जा
10:46पंचम भाव वह प्रकाश है, जो आपकी अंतरात्मा की प्रतिभा को दुनिया के सामने लाता है
10:53अपने भीतर के स्रिजन को पहचाने, क्योंकि वही आपका सक्चा उत्तराधिकार है
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11:05वैदिक जोतिश में शष्थ भाव, जिसे अरी भाव कहा जाता है
11:11आपकी स्ट्राटिजिक रिजिलियन्स और प्रतिस परधात्मक शक्ती का केंद्र है
11:17यहाँ आपके जीवन का वहर शेत्र है, जहाँ आप अपनी चुनोतियों को अपनी ताकत में बदलते है
11:24महर्शी पराशर ने शष्थ भाव को उप्चैस्थान कहा है
11:28जहाँ कठिनाया समय के साथ शक्ती में बदल जाती है
11:34यहाँ भाव सेवा, अनुशासन और कर्म शीलता का भी प्रतीक है
11:39यहाँ भाव दर्शाता है कि जातक अपने रिणों को कैसे चुकाता है
11:44रोगों से कैसे लड़ता है और शत्रूओं पर कैसे विजय प्राप करता है
11:49आधुनिक मनो विज्ञान शष्ट भाव को हमारे कोपिंग मेकनिजम्स और स्ट्रेस मैनेजमेंट से जोड़ता है
11:57आप अपने शत्रूओं, चाहे वे बाहरी प्रतिदवन्वी हों या आपके भीतर का आलस्य
12:04उन्हें आप कैसे मैनेज करते हैं
12:07यह शष्ट भाव तै करता है
12:09यह दिखाता है कि अनुशासन और सेवा भाव से आप जीवन की चुनौतियों को अफसर में बदल सकते हैं
12:17एक मजबूत शष्ट भाव, शत्रूहन्ता, योग बनाता है
12:22यह उस मानसिक द्रिड़ता का प्रतीख है जो आपको कानूनी विवादू
12:27और आर्थिक बाधाओं के चक्र व्यू से बाहर निकाल कर सफलता के शिखर पर स्थापित करती है
12:35शष्ट भाव हमें सिखाता है कि संघर्ष ही साधना है
12:38और सेवा ही मुक्ति का मार
12:40अपने भीतर के रणक शेत्र को पहचाने
12:44क्योंकि वहीं से सच्ची विजय और शांती जन्म लेती है
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12:54वैदिक जोतिश में सप्तम भाव को कलत्र भाव और जाया भाव कहा जाता है
13:01यहां आपके अस्तित्व का वह दर्पन है
13:05जिसमें आप दुनिया और अपने जीवन साथी के माध्यम से स्वयं को देखते है
13:11यहां आपकी बाहरी दुनिया से जुड़ने की शक्ती का केंद्र है
13:16महर्शी पराशर के अनुसार यह भाव केंद्र स्थान है
13:20जीवन का वहस्तम्फ
13:22जो विवाह, व्यापारिक साझेदारी और सामाजिक प्रतिष्ठा को नियंत्रिक करता है
13:27यह हमारे काम, पुरुशार्थ का प्रतिख है
13:32जो प्रेम और कर्तव्य के बीच संतुलन सिखाता है
13:36यह भाव दर्शाता है कि हम दूसरों के साथ कैसे तालमेल बिठाते हैं
13:42और अपनी इच्छाओं को वास्तविक्ता में कैसे बदलते हैं
13:46आधुनिक मनोविज्ञान में सब्तम भाव हमारी प्रोजेक्शन और रिलेशन्शिप स्किल्स को दर्शाता है
13:55हम अकसर दूसरों में वही ढूंडते हैं जो हमारे भीतर अधूरा है
14:00चाहे वह व्यापारिक समझोते हों या दामपत्य जीवन
14:05यह भाव आपकी बातची, नेगोसियेशन और समझोते करने की क्षमता को तै करता है
14:12यह सिखाता है कि मैं, से, हम, तक का सफर कैसे तै किया जाए
14:19एक शुब सब्तम भाव न केवल सुखी वैवाहिक जीवन देता है
14:24बलकि आपको समाज में एक विश्वस्निय व्यक्तित्व के रूप में स्थाफित करता है
14:30यह वह शक्ती है, जो विरोधियों को भी सहयोगियों में बदलने का सामर्थे रखती है
14:36सब्तम भाव हमें सिखाता है कि पूर्णता अकेलेपन में नहीं, बलकि सामन जस्य में है
14:43जब हम दूसरों का सम्मान करते हैं, तब ही हम स्वयं को पूर्ण पाते है
14:49अगर आपको यह विडियो पसंद आया हो, तो लाइक, शेर और सब्सक्राइब जरूर करें
14:54वैदिक जोतिश में अश्टम भाव, जिसे आयू भाव या रंध्रभाव कहा जाता है, कुंदली का सबसे रहस्य में अध्याय है
15:05यह पाताल की गहराई है, जहां आपके जीवन के वे सत्य छिपे हैं, जिन्हें दुनिया नहीं देख सकती
15:13यह मृत्यू का नहीं, बलकी रूपांतरण, ट्रांस्फरमेशन का द्वार है
15:19रिशी पराशर के अनुसार अश्टम भाव आपकी आयू, अचानक होने वाली घटनाओ और गुप्ध धन का स्वामी है
15:28यह दुस्थान तो है, लेकिन यहीं से आत्मग्यान का मार भी निकलता है
15:34यह वह अगनी है जो पुरानी पहचान को जलाकर एक नए सवा का निर्मान करती है
15:42आधुनिक जोतिश इसे मनो विज्ञान, साइकोलोजी और गहन शोध, दीप रिसर्च का केंद्र मानता है
15:52दूसरों के धन, विरासत और छिपे हुए रहस्यों को उजागर करने की शक्ती इसी भाव से आती है
16:00विद्वानों के अनुसार, अश्टम भाव आपकी संकट प्रबंधन, क्राइसिस मानेजमेंट की क्षमता को दर्शाता है
16:09यदि अश्टम भाव जागरित है, तो व्यत्ती सतह पर नहीं रुपता
16:13वह सत्य की तह तक जाता है
16:16चाहे वह विज्ञान हो, अध्यात्म हो या रहस्यमेई विद्याए
16:20यह भाव आपके जीवन की उन बाधाओं का प्रतीक है, जो आपको तोडने नहीं
16:26बलकि आपको और अधिक शक्तिशाली बनाने आती है
16:30यह वह शक्ती है, जो राख से भी जीवन को दोबारा खड़ा कर सकती है
16:36अश्टम भाव अंत नहीं, बलकि एक नया आरंभ है
16:41अपने भीतर के रहस्यों को समझें, और परिवर्तन को स्वीकार करें
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16:51वैदिक जोतिश में नवंभाव, जिसे धर्म भाव कहा जाता है
16:58आपके जीवन का वहदवार है जहा भाग्य, आस्था और उच्च ज्यान एक साथ मिलते हैं
17:04यह भाव आपके जीवन की दिशा और आध्यात्मिक यात्रा का मार्क दर्शक है
17:11महर्शी पराशर ने नवं भाव को भाग्यस्थान कहा है
17:15जहां ईश्वर की कृपा और गुरु का आशीरवाद जीवन को दिशा देते हैं
17:21यहाँ भाव तै करता है कि आपका भाग्य आपका साथ कब देगा और आप सत्य की खोज में कितनी दूर
17:29तक जाएंगे आधुनिक मनो विज्ञान नवम भाव को हमारे बिलीव सिस्टम्स और लाइफ फिलोसफी से जोडता है।
17:39आप अपने विश्वासों, शिक्षा और यात्राओं के माध्यम से जीवन में अर्थ खोजते हैं। यहाँ भाव दिखाता है कि कैसे
17:48आस्था और ज्ञान मिलकर आपके भाग्य को आकार देते हैं।
17:52नवम भाव, धर्म प्रदीन, योग है, जहाँ प्रयास, और इश्वरिय कृपा मिलकर जीवन को अवसर और समाधान प्रदान करते हैं।
18:03नवम भाव हमें सिखाता है कि भाग्य केवल सन्योग नहीं, बलकि धर्म और ज्ञान का खल है।
18:10अपने भीतर के विश्वास को पहचाने, क्योंकि वही से सक्चा मार्क दर्शन और मुक्ती जन्म लेती है।
18:28वह बिंदु जहाँ सूर्य अपनी पूर्ण शक्ती में होता है। यहीं पर आपके कर्म, आपकी पहचान बन जाते हैं।
18:38कालिदास के उत्तर कालामरित और फल्दी पिका स्पष्ट कहते हैं।
18:43यह भाव केवल आजीविका नहीं, आज्या और सत्ता का केंद्र है।
18:48यह सबसे शक्तिशाली केंद्र और अर्थ त्रिकोन का शिखर है।
18:53जहां भौतिक सफलता, सामाजिक उत्तरदायत्व से मिलती है।
18:58पिता, राज्य, यश और आपकी लेगसी सब यहीं से प्रकट होते हैं।
19:05आधुनिक भाशा में, यह आपकी professional identity और brand value है।
19:11यह केवल आपका काम नहीं, यह आपकी positioning है दुनिया में।
19:16management जिस impact और authority की बात करता है।
19:22वह जोतिश में दशम भाव की शक्ति है।
19:26यदि चतुर्थ भाव नीव है, तो दशम भाव वह सनरचना है, जिसे दुनिया देखती है।
19:33गीता का निशकाम कर्म, दशम भाव की सर्वोच अवस्था है।
19:38मजबूत दशम भाव आपको केवल सफलता नहीं देता।
19:42वह आपको सम्मान, प्रभाव और कालजे कीरती देता है।
19:47दशम भाव वह कर्म है, जो आपके भाग्य को आकार देता है।
19:52अपने कर्म को महान बनाईए, क्योंकि वही आपकी सक्ची नियती है।
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20:04जन कुंडली का एका दश्भाव, लाबस्थान, आपके जीवन का हराइजन है।
20:10वह बिंदु जहां प्रयास फल में बदलते हैं।
20:13यही से आपकी इच्छाएं वास्तविक्ता बन जाती हैं।
20:19उत्तर कालामरित और फल्दीपि का स्पष्ट रूप से कहते हैं।
20:23यह भाव केवल धन नहीं, यह इच्छाओं की पूर्ती, मित्रों और सामाजिक संपर्क का केंगर है।
20:30यह उप्चय भाव है, जहां भौतिकला, भावनात्मक समर्थन से मिलकर समरिधी बनते हैं।
20:38बड़े भाई भहन, मित्रगन, सहयोगी और आपकी सभी आकांग्षाएं सब यहीं से प्रकट होते हैं।
20:47आज के युग में, यह आपकी सोशिल कैपिटल और इन्फ्लूएंस है।
20:53आप किन लोगों से जुड़े हैं? आपका नेटवर्क कितना बड़ा है? यह ग्यारवा भाव तै करता है।
21:02यदि दशम भाव आपकी पुजिशनिंग है, तो एका दश भाव आपके ग्रोध चानल्ज हैं।
21:09पर एक गहरा सत्य है, पर इच्छा पूरी नहीं होती।
21:13एका दश भाव यह भी दिखाता है कि आपकी कौन सी इच्छाएं वास्तव में सार्थक हैं।
21:19एका दश भाव वह द्वार है, जहाँ व्यक्तिगत इच्छा सामाजिक उपलब्धी में बदलती है।
21:27सही लक्षे चुनिये, क्योंकि वही आपकी वास्तविक उपलब्धी बनता है।
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21:38द्वादश भाव, जिसे व्याय भाव भी कहा जाता है।
21:43यह कुंडली का वहा अंतिम पड़ाव है, जहां संसार की सीमाय समाप्त होती हैं, और अनन्त की शुरुवात होती है।
21:52रिशी पराशर के अनुसार, यह भाव केवल धन की हानी नहीं।
21:57बलकि उर्जा, समय और अहंकार के विसर्जन का भी है।
22:02शास्त्र इसे मुक्ष स्थान कहते हैं, जो आत्मा को जन्ममरन के चक्र से मुक्त करनी की क्षमता रखता है।
22:11यह भाव देशांतर का है।
22:14जातक बारिजात के अनुसार, जब द्वादश भाव का स्वामी बली होता है।
22:19तो व्यक्ति अपनी मात्रि भूमी को त्याग कर परदेश में मान समान और सफलता प्राप करता है।
22:26आध्यात्मिक दृष्टी से यहां शयन सुक और कैवल्य का भाव है।
22:32यहां दान, चैरिटी को सर्वोच स्थान दिया गया है।
22:37उत्तर कालामरिद के अनुसार, यहां भाव बताता है कि आपने पूर्व जन्मों से क्या संचित किया है।
22:44और इस जीवन के अंत में आप क्या साथ लेकर जाएंगे।
22:48शारिरिक रूप से यहां पैरों, फीट और बाईं आग का प्रतिनिधित्व करता है।
22:55यहां हमारे सबकॉंशिस माइंड की वह गहराई है जहां सपने जन्म लेते हैं।
23:01यहां वह एकांथ है जहां हम स्वयम से मिलते हैं।
23:05ग्वादश भाव का सार यही है कि जब तक पात्र खाली नहीं होता, तब तक उसमें परमात्मा की कृपा नहीं
23:12भरती।
23:13यहां स्वयम को खोकर सर्वस्व को पाने का भाव है।
23:17यही है आत्मा की अंतिम यात्रा।
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