00:00वैदिक जोतिश में चतुर्थ भाव, जिसे सुख भाव कहा जाता है।
00:05आपके हृदय का वह मंदिर है, जहां सक्ची, शांती और संतोष का निवास होता है।
00:12यह आपके बाहरी नहीं, बलकि आंतरिक संसार का आधार है।
00:17महर्शी पराशर के अनुसार यह केंद्र स्थान है, जीवन का एक प्रमुक्स्तंब, यह मोक्ष त्रिकोन का पहला भाव है, जो
00:27दर्शाता है कि आंतरिक सुखी मुक्ती का मार्ग है।
00:31यह भाव माता, भूमी, वाहन और पैतरिक संपत्ती का कारक है।
00:37आधुनिक शोध इस भाव को हमारे भावनात्मक मस्तिश्ट और मानसिक शान्ती से जोड़ता है।
00:45आप तनाव में कैसे प्रतिक्रिया देते हैं, आपको सच्चा सुकून कहा मिलता है, और आप अपने लिए घर का अनुभव
00:55कैसे बनाते हैं, यह सब चतुर्थ भाव दर्शाता है।
00:59यदि प्रतम भाव आप हैं, तो चतुर्थ भाव वह आधार है, जिस पर आपकी पूरी पहचान खड़ी होती है।
01:30अपने भीतर के घर को पहचाने, क्योंकि वही आपकी सच्ची मुक्ती का मार्ग है।
Comments