00:00वैदिक जोतिश में त्रितिय भाव, जिसे सहज भाव या पराक्रम भाव कहा जाता है।
00:07आपके भीतर की उस अगनी का प्रतीक है, जो इच्छा को कार्य में बदलती है।
00:14या आपकी भुजाओं की शक्ती और आपके संकल्प की द्रिडता है।
00:18प्राचीन ग्रंथों के अनुसार यह एक उप्चे भाव है।
00:23अर्थात वस्थान जहां महरत और समय के साथ वृद्धी होती है।
00:28महर्शी पराशर इसे साहस, छोटे भाई बहनों और लगु यात्राओं का कारक मानते हैं।
00:34यह भाव बताता है कि आप जीवन के संघर्षों में पीछे हटेंगे या सीना तान कर खड़े होंगे।
00:42आधुनिक जोतिशिय शोध इस भाव को हमारे तंत्रिका तंत्र, नर्वस सिस्टम और संचार कौशल से जोड़ता है।
00:52आप अपनी बात को दुनिया के सामने कैसे रखते हैं और आपकी लेखन शेली कितनी प्रभावशाली है यह त्रितिय भाव
01:01तै करता है।
01:02विद्वानों के अनुसार यह आपके विकलपों, चॉइसिस और रणनीती का केंद्र है।
01:10यदि प्रथम भाव आप हैं, तो त्रितिय भाव वह प्रयास हैं, जो आप अपनी पहचान बनाने के लिए करते हैं।
01:21यह आपके कौशल, स्किल्स और शौक, होबीज का दरपण है।
01:27यह भाव आपके छोटे भाई बहनों के साथ संबंध हों, और आपके पडोसियों के साथ व्यवहार को भी दर्शाता है।
01:36एक बलिष्ट त्रितिय भाव जातक को कभी ना हार मानने वाली मानसिक शक्ती, मेंटल टफनेस, प्रदान करता है।
01:45त्रितिय भाव वह उर्जा है जो भाग्य को कर्म से जोडती है। बिना प्रयास के भाग्य भी सुप्त रहता है।
01:54अपने पराक्रम को पहचाने। अगर आपको यह वीडियो पसंद आया हो, तो लाइक, शेर और सब्सक्राइब जरूर करें।
Comments