00:00जब सूर्य कुंडली के पंचम भाव में प्रवेश करता है,
00:05तो यह व्यक्ति की आत्मा को असाधारन बुद्धी, रचनात्मक्ता और ज्यान के प्रकाश से भर देता है.
00:12वैदिक जोतिश में पंचम भाव हमारी बुद्धी, फूर्वपुन्य, संता, और आत्म अभी व्यक्ति, सेल्फ एक्स्प्रेशन का केंद्र है.
00:23सूर्य यहां व्यक्ति को एक नैसर्गिक मार्ग दर्शक, विचारक या सलहकार बनाता है.
00:29पंचम भाव का सूर्य व्यक्ति के भीतर मौलिक विचारों, ओरिजनल आइडियाज को जन्द देता है.
00:36ऐसे लोग अपनी बुद्धी और निर्नेक शमता के बल पर समाज में एक अद्वितिय स्थान बनाते हैं.
00:43पंचम भाव का यह सूर्य अपनी सात्वी पूर्ण द्रिष्टी सीधे एकादश भाव, यानि लाब और इच्छा पूर्ती के स्थान पर
00:52डालता है.
00:52पंचम भाव आपकी बुद्धी हैं और एकादश भाव, उस बुद्धी से मिलने वाला लाब और सामाजिक नेटवर्ग.
01:03एकादश भाव पर सूर्य की यह द्रिष्टी व्यक्ति को समाज के बड़े और प्रभावशाली लोगों से जोड़ती हैं.
01:11आपकी बुद्धी केवल आपके पास नहीं रहती, बलकि वह बड़े मंचों पर, महालाब, यश और उच्च पत प्रतिष्ठा का कारण
01:20बनती हैं.
01:21ऐसे लोग अपने बड़े लक्षों और इच्छाओं को पूरा करने में सफल होते हैं.
01:27लेकिन यदि यहां सूर्य पीडित हो या उस पर अहमकार हावी हो जाएं, तो व्यक्ति अपनी बुद्धी के मद में
01:34दूसरों को छोटा समझने लगता है.
01:36यह स्थिती मित्रों से अनबन संतान पक्ष को लेकर चिंता, या सट्टे लोटरी जैसे क्षेत्रों में अचानक बड़ा नुकसान भी
01:46करा सकती हैं.
01:48पंचम का सूर्य एक गहरा संदेश देता है, कि सक्ची बुद्धी वही है.
01:52जो केवल स्वार्थ नहीं, बलकि पूरे समाज के कल्यान के काम आए, जब आपकी विद्या फिफ्थ हाउस, संसार के लाब,
02:03इलेवन्थ हाउस से जुड़ती है, तब भाग्य स्वयम आपके स्वागत में खड़ा हो जाता है.
02:10अगर आपको ये विडियो पसंद आया हो, तो लाइक, शेर और सब्सक्राइब जरूर करें.
Comments