00:00द्वादश भाव, जिसे व्याय भाव भी कहा जाता है।
00:13रिशी पराशर के अनुसार, यह भाव केवल धन की हानी नहीं,
00:18बलकि उर्जा, समय और अहंकार के विसर्जन का भी है।
00:23शास्त्र इसे मुक्ष स्थान कहते हैं।
00:26जो आत्मा को जन्म मिरन के चक्र से मुक्त करनी की क्षमता रखता है।
00:32यहाँ भाव देशानतर का है।
00:35जातक पारिजात के अनुसार, जब ध्वादश भाव का स्वामी बली होता है।
00:41तो व्यक्ति अपनी मात्रि भूमी को त्याग कर परदेश में मान समान और सफलता प्राप करता है।
00:47आध्यात्मिक द्रिष्टी से यहाँ शयन सुख और कैवल्य का भाव है।
00:54यहाँ दान, चैरिटी को सर्वोच स्थान दिया गया है।
00:58उत्तर कालामृत के अनुसार, यहाँ भाव बताता है कि आपने पूर्व जन्मों से क्या संचित किया है।
01:05और इस जीवन के अंत में आप क्या साथ लेकर जाएंगे।
01:09शारिरिक रूप से यहाँ पैरों, फीट और बाईं आख का प्रतिनिधित्व करता है।
01:16यहाँ हमारे सबकॉंशिस माइंड की वह गहराई है जहाँ सपने जन्म लेते हैं।
01:22यहाँ वह एकांध है जहाँ हम स्वयम से मिलते हैं।
01:26यही है आत्मा की अंतिम यात्रा।
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