00:00वैदिक जोतिश में द्वितिय भाव को धन भाव कहा जाता है। लेकिन इसकी गहराई केवल बैंक बैलेंस तक सीमित नहीं
00:09है। यह भाव आपके मूल्यों, वैलियूस, आपकी जड़ों और उस संचित उर्जा का है, जो आपको जीवन में सुरक्षा प्रदान
00:19करती है।
00:20प्राचीन ग्रंथों के अनुसार वितिय भाव शरीर के मुख्व, फेस का प्रती निधित्व करता है। इसमें आपकी वानी, भोजन की
00:31आधतें और दाहिनी आख शामिल है।
00:34प्राशर रिशी के अनुसार यह भाव तै करता है कि आप सत्य बोलेंगे, या असत्य और आपकी वानी में कितनी
00:43मिठास या कड़वाहट होगी।
00:45आधुनिक शोध इस भाव को संसकारों से जोडता है। यह वह संपत्ती है जो आपको विरासत में मिली है।
00:55चाहे वह धन हो, ज्यान हो या पारिवारिक परंपराएं। विद्वानों का तर्क है कि द्वितिय भाव आपकी धारन करने की
01:03क्षमता, कैपसिटी टू होल्ड को दर्शाता है।
01:08यदि प्रथम भाव आप हैं, तो द्वितिय भाव वह संसाधन है, जो आपके अस्तित्व को बनाय रखने के लिए आवश्यक
01:17है।
01:17यह आपकी प्राथमिक शिक्षा और बच्पन के उस वातावरन का दर्पन है, जिसने आपके व्यक्तित्व की नीव रखी।
01:27एक गहरा तकनी की पहलू यह है कि द्वितिय भाव को मारक भाव भी माना जाता है।
01:34यह जीवन की निरंतर्ता और उसके अंत के बीच के उस सुक्ष्म संतुलन को दर्शाता है।
01:40जहां अत्यधिक आसकती ही बंधन का कारण बनती है।
01:45आपका द्वितिय भाव आपकी वैल्यू सिस्टम है।
01:49आप जो संचय करते हैं, वही आपके भविश्य का निर्मान करता है।
01:54अपनी जडों को पहचाने।
01:57अगर आपको यह वीडियो पसंद आया हो, तो लाइक, शेर और सब्सक्राइब जरूर करें।
Comments