00:00जब सूर्य कुंडली के छठे भाव मिस्थित होता है तो व्यक्ति के भीतर विप्रीत परिस्थितियों से लड़ने की एक अद्भुच
00:08शक्ति पैदा होती है
00:10महर्शी पराशर के अनुसार छठा भाव हमारे शत्रूं
00:15रोगों, रिन और दैनिक संघर्षों का प्रति निधित्व करता है
00:20छठा भाव उक्चे भाव है जहां सूर्य व्यक्ति को एक निडर योध्धा बनाता है
00:26यहां बैठा सूर्य शत्रूं का नाश करने वाला, शत्रूहन्ता और प्रतियोगिताओं में विजय दिलाने वाला होता है
00:36ऐसे लोग प्रशासनिक सेवाओं, कानू, चिकित्सा या किसी भी चुनौती पूर्ण क्षेत्र में नेत्रित्र करते हैं
00:44छठे भाव में स्थित सूर्य अपनी सात्वी पूर्ण द्रिष्टी सीधे, बारवे भाव पर डालता है
00:50एक और छठा भाव, जो सांसारिक संघर्ष और सेवा का है
00:55और दूसरी और बारहवा भाव, जो व्यय, एकांत, विदेश और मोक्ष का प्रती निधित्व करता है
01:05बारहवे भाव पर सूर्य की यह द्रिष्टी एक अद्भुत संतुलन बनाती है
01:10सूर्य की उर्जा व्यक्ती को केवल अपने लिये नहीं
01:14बलकि दूसरों के कल्यान के लिए काम करने की प्रेणा देती है
01:19ऐसे लोग अक्सर बड़े अस्पतालों, विदेशी संस्थानों
01:23या आध्यात में केंद्रों में उच्छ पद और मान समान पाते हैं
01:28लेकिन यदि सूर्य यहां पीड़े थो, तो व्यक्ती में अहंकार
01:32अत्यधिक कानूनी विवाद या कोट कचहरी के खर्चे बढ़ सकते हैं
01:38व्यक्ती बाहरी संघर्षों में इतना उलट जाता है
01:41कि वह अपनी आंतरिक शांती और नींद खो बैठता है
01:46शश्थ भाव का सूर्य हमें सिखाता है कि वास्तविक विजय केवल शत्रूओं पर नहीं
01:51बलकि अपने भीतर के भाय और अहंकार पर होती है
01:56जब कर्म सेवा बन जाए, तभी आत्मा मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ती है
02:01यही संघर्ष से सेवा और सेवा से मुक्ती का मार्ग है
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