00:00वैदिक जोतिश में पंचम्भाव जिसे उत्रभाव कहा जाता है
00:05स्रिजन और अभिव्यक्ति का दिव्यस रोत है
00:08यह केवल संतान ही नहीं, आपकी बुद्धी, आपकी रचनात्मक्ता और आपकी आत्मा की अभिव्यक्ति का प्रतीक है
00:18यह कुंडली का सबसे शुब लक्ष्मी त्रिकोन स्थान है
00:23यह आपके पूर्व पुन्य का लेखा जोखा है, यानि पिछले जन्मों के वे अच्छे कर्भ, जो इस जीवन में आपको
00:33भाग्य और सफलता के रूप में मिलते हैं
00:35यही भाव मंत्र शक्ती, उच्च शिक्षा, सक्तेवाजी और अचानक मिलने वाले धन का भी कारक है
00:44आधुनिक संदर्भ में पंचम भाव आपके IQ और आपकी निर्णय लेने की क्षमता को दर्शाता है
00:53आपकी बुद्धी केवल रटा हुआ ज्यान नहीं, बलकि वह विवेक है
00:59जो आपको सही और गलत में फर्क समझाता है
01:03यह रोमान्स, भावनाओं की अभिव्यक्ती और उस खुशी का भाव है
01:08जो हमें अपनी कला या शौकों, हबीस के माध्यम से मिलती है
01:15संतान के रूप में यह भाव आपके भविश्य के विस्तार को दर्शाता है
01:20एक मजबूत पंचम भाव का अर्थ है
01:23सफल उत्तराधिकारी
01:25और आपके नाम को आगे ले जाने वाली एक नई उर्जा
01:29पंचम भाव वह प्रकाश है
01:31जो आपकी अंतरात्मा की प्रतिभा को दुनिया के सामने लाता है
01:36अपने भीतर के स्रिजन को पहचाने
01:38क्योंकि वही आपका सच्चा उत्तराधिकार है
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