00:00जब सूर्य एकादश भाव में स्थित होता है, वह केवल सफलता नहीं देता, वो प्रभाव देता है, और उसकी द्रिष्टी
00:14जहां पहुँचती है, वहां संभावनाएं जाग उठती हैं।
00:24गुरुदेव, कुछ लोग सफलता के बाद भी आगे बढ़ते क्यों रहते हैं? यदि कोई सबकुछ प्राप्त कर ले, तो वो
00:32और क्या खोचता है? क्या हर उपलब्धी के पार कोई और मन्जिल होती है?
00:39मन्जिल नहीं समझ और हर समझ की शुरुवात एक प्रश्न से होती है।
01:09मन्जिल नहीं रहती। उसके भीतर बड़े लक्ष, बड़ी आकांगशाएं और कुछ महत्वपूर्ण प्राप्त करने की तीवर इच्छा जागरित होने लगती
01:24है।
01:26ऐसे व्यक्ति के जीवन में प्रभावशाली लोगों, सहयोगियों और अवसरों का दाइरा भी धीरे धीरे बढ़ने लगता है।
01:35और यहीं इस योग का गहरा रहस्य छिपा है।
01:40किनक्यु सूर्य की सप्तम पूर्ण द्रिष्टी यहीं नहीं रुकती।
01:46एकादश भाव से उसकी द्रिष्टी सीधे पंचम भाव पर पड़ती है।
01:54पंचम भाव बुद्धी, रचनात्मक्ता, प्रतिभा और स्रिजन का क्षेत्र है।
02:02जब एकादश भाव का प्रकाश पंचम भाव की रचनात्मक अगनी से मिल जाता है।
02:10तब यह व्यक्ति केवल सफल नहीं बनता।
02:14वो प्रेणा बन जाता है।
02:18सच्ची सफलता वो है जो आपकी प्रतिभा को संसार तक पहुँचाए।
02:24और दूसरों को नए सपने देखने की प्रेणा दे।
02:28यही एकादश भाव में स्थित, सूर्य की पंचम भाव पर पढ़ने वाली दृष्टी का वास्तविक अर्थ है।
02:38क्योंकि जब सफलता प्रतिभा को प्रकाशित करती है, तब उपलब्धी प्रेणा बन जाती है।
02:45और प्रेणा समय की सीमाओं से कहीं आगे तक जीवित रहती है।
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