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  • 2 days ago
Khush AKhlaqi Ki Jeet

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Transcript
00:00ये काफी पुरानी बात है कि जरीना नामी लड़की की शादी हुई
00:03मगर ससराल आते ही उसे अंदाजा हो गया कि वो अपनी सास के साथ रह नहीं सकती
00:08दोनों की शख्सियत बिल्कुल अलग थी
00:10सास हर वक्त जरीना पर तंस करती थी जो उसे बहुत नागवार गुजरता था
00:15वक्त गुजरने के साथ साथ उनकी तकरार बढ़ती गई और घर का सुकून बरबाद हो गया
00:20जिसकी वज़ा से जरीना का शोहर बहुत परिशान रहने लगा
00:23आखरकार जरीना ने फैसला किया कि वो अब अपनी सास का ये रवया मजीद बरदाश्त नहीं करेगी
00:30और इस मसाले को हमेशा के लिए खतम ही कर देगी
00:33जरीना अपने वालित के एक बहुत पुराने दोस्त बाबा रहीम के पास कए जो जड़ी बूटियां बेचा करते थे
00:39उसने उन्हें सारी कहानी सुनाई और सास से छुटकारा पाने के लिए जहर मांगा
00:44बाबा रहीम ने कुछ देर सोचने के बाद कहा कि मैं तुम्हारी मदद करूँ का लेकिन तुम्हें मेरी शर्त माननी
00:51होगी
00:51जरीना के राजी होने पर उन्होंने उसे कुछ जड़ी बूटियां दी और कहा कि तुम फोरी असर करने वाला जहर
00:58इस्तमाल नहीं कर सकती
00:59क्यूंकि उसे तुम पर शक हो जाएगा ये जड़ी बूटियां आहिस्ता आहिस्ता जिस्म में असर करेंगी
01:05बाबा रहीम ने उसे हिदायत दी कि तुम रोजाना अच्छा खाना पकाना और उसमें ये बूटियां डाल देना
01:11साथ ही शक से बचने के लिए तुम्हें अपनी सास के साथ बहुत दोस्ताना रवया रखना होगा
01:16उन से लड़ना नहीं है बलके उनकी हर बात मानकर एक मलका की तरह उनकी खिदमत करनी है
01:23जरीना ये सुनकर बहुत खुश हुई और घर जाकर इस काम में लग गई
01:27हफते और महीने गुजरते गए जरीना रोज लजीज खाना बना कर सास को पेश करती
01:32और बाबा रहीम की नसीफ के मताबिक अपने घुसे पर काबू रखकर उनकी मां की तरह खिदमत करती
01:39छे महीने गुजरे तो घर का नक्षा ही बदल गया
01:42زرینہ اب ساس کی باتوں پر ناراض نہیں ہوتی تھی
01:46اور اسے اپنی ساس اچھی لگنے لگی تھی
01:48دوسری طرف ساس کا رویہ بھی بدل چکا تھا
01:51وہ زرینہ کو اپنی بیٹی سمجھنے لگی تھی
01:54اور ہر جگہ اس کی تعریفیں کرتی پھرتی
01:56اب دونوں کا رشتہ ماں بیٹی جیسا ہو چکا تھا
01:59اور گھر میں خوشحالی آ چکی تھی
02:01ایک دن زرینہ سخت پریشان ہو کر بابا رحیم کے پاس آئی
02:05اور کہنے لگی کہ بابا مجھے وہ طریقہ بتائیں
02:08کہ میں اپنی ساس کو اس زہر سے کیسے بچاؤں جو میں نے انہیں دیا ہے
02:12میں اب وہ ان سے بہت پیار کرتی ہوں
02:14اور میں نہیں چاہتی کہ وہ مر جائیں
02:16بابا رحیم مسکرائے اور بولے
02:18بیٹی تمہیں ڈرنے کی ضرورت نہیں ہے
02:21میں نے تمہیں زہر نہیں بلکہ طاقت کی جڑی بوٹیاں دی تھی
02:25تاکہ ان کی صحت بہتر ہو جائے
02:27اصل زہر تو تمہارے دماغ اور تمہارے تلخ رویہ میں تھا
02:31جسے تم نے اپنے پیار اور حسن اخلاق سے خود ہی ختم کر دیا ہے
02:35دوستو ہمارے الفاظ اور ہمارا لہجہ ہی یہ فیصلہ کرتا ہے
02:39کہ دوسرے ہمارے ساتھ کیسا سلوک کریں
02:42جب ہم دوسروں کو عزت اور پیار دیتے ہیں
02:44تو بدلے میں ہمیں وہی واپس ملتا ہے
02:47آپ کیا کہتے ہیں کمنٹس میں بتائیے کا
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