00:00डर से जीत तक शोटे मोर की मिठी सीख जिसने दिल शू लिया एक हरे बरे भाग में बहुत सारे
00:06रसीले अंगूर लगे थे उस बाग में कई मोर रहते थे जो हर दिन बहां आकर नासते और खेलते थे
00:12एक दिन एक शोटा सा मोर पहली वार उस बाग में आया उसने पेड़ पर �
00:17लटकते अंगूरों को देखा और सोचा जे कितने सुन्दर है लेकिन क्या जे मेरे लिए है बे डरते डरते पास
00:24किया लेकिन बरे मोरों को देखकर रुक गया उसे लगा कि शायद उसे जहां आने का हक नहीं है तब
00:31ही एक समझता बुड़ा मोर उसके पास आया और बोला डर
00:34क्यों रहा है जे बाग सबके लिए है जो मेहनत करता है और हीमत रखता है बहीं असली मिठास पाता
00:42है शोटे मोर ने हीमत जुताई आगे बढ़ा और एक अंगूर तोड लिया जैसे ही उसे खाया उसकी आंके चमक
00:50उठी इतना मीठा सवाद उसने पहले कभी नहीं चखा था
00:55उस दिन के बाद बे मोर रोज वहां आता नासता और अपने दोस्तों के साथ खुशी बांता डर और संकोस
01:03हमें पिश्य रोकते है लेकिन हीमत करने से ही जीवन की असली मिठास मिलती है
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