00:00एक शोटी सी बून जो खुद को बेकार समझती थी बहीं पुरी दुनिया की जिंदगी बन गी एक शोटी सी
00:06पानी की बून जो बिशाल समुंदर में खोई हुई थी उसे लगता था उसकी कोई पहचान नहीं कोई मक्षद नहीं
00:12तबी सूरा चम्का और उसकी जिंदगी बदल
00:16गी वो खलकी होकर बहब बनकर आसमान की और उड़ गई अब वो अजात थी बादलों के साथ उड़ती हुई
00:23नहीं दुनिया नहीं नजारे लेकिन जे अंत नहीं था थंडी हवाएं आई और वो फिर से बून बन गी इस
00:30बार वो बारिश बनकर दर्टी पर गिरी कहीं वो प
00:45हैमियत थी आकिर कार वो फिर से समंदर में लोट आई लेकिन इस बार वो पहले जैसी नहीं थी अब
00:53उससे पता था उसकी जिन्दगी का एक मकसद है दुनिया को जीवन देना
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