00:00गहरे समुंदर के बीचों बीच एक रात कुष अदबुद हुआ चारो और गना अंधेरा था लहरे दीरे-दीरे हिल रही
00:06थी और आसमार में बादर शाय हुए थे तवी अचानक पानी के बीच से एक हलकी सी गुलाबी रोशनी चमकने
00:12लगी दीरे-दीरे बे रोशनी तेज हो
00:26गई हो समुंदर की लहरे उस कमल के चारो तरफ शान्त होगी जैसे प्रकृती भी उस चमतकार को देख रही
00:32हो जैसे जैसे कमल उपर उठता गया उसकी रोशनी अंदेरे को मिटाती गी दूर दूर तक फैला से नाटा अब
00:39दिब्बे परकास से भर गया कहा जाता है जब दुन
00:56के बीच से उठकर चमक सकता है किचर में पैदा होकर भी कमल हमेशा सुंदर ही खिलता है
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