00:02एक पहाडी के उपर पत्रों के बिच एक शोटा सा पवित्र कुंट था उस कुंट का पानी बहुत šांत और
00:07इसमी था
00:07एक दिन अचानक बहाँ एक चमकदा सोने का नाग आया उसका शरी दूप में ऐसे चमकदा था जैसे वो कोई
00:13सधारन नहीं बलकि दिब्य नाव हो नाग दीरे-दीरे कुंड के पास आया और पानी पिने लगा जैसे ही उसने
00:19पानी को शुआ कुंड के पानी में लहरे उठने ल
00:35गया लोग कहता है बे कोई सधारन नाग नहीं था बलकि पवित्तर कुंड का रक्षक दिब्य नाग था जो समय
00:41समय पर आकर उस्तान की रक्षा करता है कहते हैं जहां ऐसे दिब्य नाग रहते हैं वहां प्रकृति और बगवान
00:47की बशेश किर्पा होती है
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