00:00एक शोटी सी पानी की बूंद जो आसमान तक गई और फिर पूरी दुनिया को जीवन देखकर बापस लोटी एक
00:07शोटी सी पानी की बूंद थी जो शांत समुंदर में रहती थी वो सोस्ती थी क्या मेरी जिंदी की बस
00:13जहीं तक है तब ही सूरज की गर्मी आई और वो दीरे द
00:17तीरे बाबन कर आसमान में उड़ गई अब वो बादलों का हिस्सा थी आसमान में गुमती नई दुनिया देखती वे
00:23कुछ समय बाद हवा बदली बादल भारी हो गई और फिर वो वूंद बारिश बनकर दर्टी पर गिर गई कभी
00:31नदी में बहती कभी पेडों को जीवन देत
00:33कभी किसी की प्यास बुजाती और फिर बापिस समुन्दर में लोट गई जिन्दगी एक सफर है हर मोड पर बदलती
00:42है लेकिन रुकती नहीं
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