00:00हरी भरी जंगल की एक सुन्दर सुभा थी पेड़ों पर ओंस की बूंदे चम करें थी और हर तरह पंशियों
00:05की मदूर आवाज गूंज रही थी उसी जंगल में प्यारी सी चीडिया रहती थी उसका रंग बहुत सुन्दर था वो
00:11हमेशा मिठ्धू मिठ्धू बोलती रहती थ
00:14जंगल के बाकी पंशी भी बहुत खुश हो जाते थे एक दिन वो चीडिया पेड़ की डाल पर बैठकर जोर
00:20जोर से मिठ्धू मिठ्धू बोल रही थी पास ही बैठे दूसरे पंशियों से हरानी से देख रहे थे एक रंग
00:25बिरंगा पंशी बोला तुम हर समय मिठ्धू मि
00:40मिठ्धू बोलती है और सबका मन खुश हो जाता कुश ही दिनों में पूरा जंगल उसकी मिठी आवास से गुझने
00:46लगा हर पंशी ने सीख लिया कि मिठे सब्द और प्यार बड़ी बाते सबसे बड़ी ताकत होती है मिठी बानी
00:52और प्यार से बोला गया एक शोटा सा सब्
00:57सकता है
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