00:00सूखी और फटी हुई जमीन के बीच एक शोटा सा पानी का गड़ा बचा हुआ था उस गड़े में दो
00:05मशलिया तरफ रही थी क्यूंकि पानी बहुत कम था और कभी भी सूख सकता था उसी समय वहाँ दो शोटे
00:11पंची आते बे देखते हैं मशलिया मुस्किल में है और पानी
00:14भी लगवाँ खतम हो चुका है दोनों पंची उस सोटे शे गड़े के पास खड़े होकर बार बार अपनी चोन
00:20से पानी को हिलाते हैं जैसे उन्हें बचाने की कोशिश कर रहे हो उनके पास ना ताकर थी ना कोई
00:26समादा लेकिन उनके दिल में देया थी वह उस जगा को शो�
00:41बोटा सा द्यालू काम भी किसी की जिन्दगी में उमीद बन जाता है
Comments