00:00सुबे का शांत समय था जील का पानी बिलकुल शांत था और हलकी दूप पानी पर चमक रही थी तब
00:05ही पानी के बीचो बीच एक पंची दीरे दीरे तैर आया था बहुत देर से शिकार की तलास में था
00:11अचानक उसकी तेज नजर पानी की अंदर गई एक शोटी मशली तेजी स
00:15तैर आय थी पंची ने बिना समय गवाई बिजली की तरफ पानी में गोता लगाया और कुछ ही सेकंड बार
00:21बे पानी से बहा निकला और उसकी चोंच में मशली थी मशली शूटने की कोशिश कर रही थी पानी चटकर
00:27आ था लेकिन पंची ने उसे मजबूती से पकड़ रख
00:43कि धैरे और सही समय का इंतजार करने वालों को ही सफलता मिलती है
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