00:00एक शांत भगीचे के पार शोटी सी जील थी जील के किनारे एक खुबसूरत मोर दीरे दीरे चलता हुआ है
00:06अचानक उसने अपना विशाल और रंग बरंग पंख फिला दिये
00:10उसके पंकों पे बने सेंकरा चमकदार निशान सूरज की रोशनी में चमकने लगे मोर दीरे दीरे घुमने लगा जैसे पूरी
00:17दुनिया को अपनी सुन्दता दिखा रहा हो
00:19जील का पानी कमल के फुल और हरी बरी प्रकरिती सब उस पल को और भी जुदाई बना रहे थे
00:25कुशी सनों के लिए ऐसा लगा जैसे समय रुक गया हो
00:29एक शांत बगीचे के पास शोटी सी जील थी
00:32जील के किनारे एक खुबसूरत मोर दीरे दीरे चलता हुआ है
00:35अचानक उसने अपना बिशाल और रंग बरंगे पंक फिला दिये
00:39उसके पंकों पे बने सैंकुरा चमकदार निशान सूरज की रोशनी में चमकने लगे
00:44मोर दीरे दीरे घुमने लगा जैसे पूरी दुनिया को अपनी सुन्दता दिखा रहा हो
00:49जील का पानी कमल के फुल और हरी बरी प्रकरिती सब उस पल को और भी जुदाई बना रहे
00:54तेकुशी सन्दों के लिए ऐसा लगा जैसे समय रुक गया हो
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