00:00कहते हैं जब मोर बगवान के सामने पंक फैलाता है तो वो सिर्फ नित्ते नहीं एक दिब्य संकेत होता है
00:06एक शांत मंदिर में बगवान की मूर्ती के सामने एक मोर दीरे दीरे चलता हुआ आता है बे बगवान के
00:12सामने रुक जाता है जैसे किसी दिब्य सक्ति को महसूस कर र
00:21पूरा मंदिर उस अदबु दृश्य से बर जाता है ऐसा लगता है जैसे मोर भगवान की बग्ती में नरीटे कर
00:29रहा हो लोग कहते हैं जब मोर अपने पंख भगवान के सामने फैलाता है तो बेसलिफ नरीटे नहीं बलकि बगवान
00:36को समर्पित एक दिभ्य पर नाम होता है उ
00:40पल मंदीर का महोल और भी पवित्तर हो जाता है और देखने वाले हर व्यक्ति के मन में वक्ति और
00:46आचारे भर जाता है
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