00:00जब सुवेम गरूर भी हारने लगे तब प्रगट हुई मा काली बहुत समय पहले जमना नदी के गहरे जल में
00:07रहता था एक बियानक नाग कालिया उसका भिश इतना गातक था कि नदी का जल काला पढ़ चुका था और
00:13आसपास का जीवा सबाब तो रहा था देवताओ के बहान
00:17और पंशियों के राजा गरूर ने ठाना इस अधरम का अंत करना ही होगा गरूर अकास से बिजली की तरह
00:24उतरे लेकिन कालिया सधारन नाग नहीं था उसनी अपने बेशीलों फनों से ऐसा जाल भनाया कि गरूर भी कमजोर पढ़ने
00:31लगे उनके पंक भारी होगे और बिश �
00:34दीद दीदे उन्हें गेरने लगा जब लगा अब गरूर का अंत निश्चिता तभी अकास में गूंज उटी एक ब्यंकर गर्जना
00:41और चारो और अंधकार शागर प्रगर्ट हुई मां काली उनकी आंखों में अगनी थी और करोध से धरती कांप उटी
00:49मां काली ने एक ही प
01:03करने आती है जब भकत असहाय हो जाए तब मां काली स्वेम ढाल बन जाती है अगर आप भी मां
01:11काली की सकती पर विश्वास करते हैं तो कमेंड में लिखे जै मां काली
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