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क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा भी आया जब पक्षियों के राजा गरुड़ स्वयं कालिया नाग के विष से हारने लगे थे?
तभी धर्म की रक्षा के लिए प्रकट हुईं माँ काली — शक्ति, साहस और दिव्य संरक्षण का अद्भुत रूप।

यह पौराणिक कथा हमें सिखाती है कि जब भक्त संकट में होता है, तब देवी स्वयं उसकी रक्षा करने आती हैं।
देखिए माँ काली की दिव्य शक्ति और कालिया नाग के अहंकार का अंत इस अद्भुत mythological storytelling वीडियो में।

🙏 अगर आप माँ काली की शक्ति में विश्वास करते हैं तो कमेंट में लिखें — जय माँ काली 🔱
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Transcript
00:00जब सुवेम गरूर भी हारने लगे तब प्रगट हुई मा काली बहुत समय पहले जमना नदी के गहरे जल में
00:07रहता था एक बियानक नाग कालिया उसका भिश इतना गातक था कि नदी का जल काला पढ़ चुका था और
00:13आसपास का जीवा सबाब तो रहा था देवताओ के बहान
00:17और पंशियों के राजा गरूर ने ठाना इस अधरम का अंत करना ही होगा गरूर अकास से बिजली की तरह
00:24उतरे लेकिन कालिया सधारन नाग नहीं था उसनी अपने बेशीलों फनों से ऐसा जाल भनाया कि गरूर भी कमजोर पढ़ने
00:31लगे उनके पंक भारी होगे और बिश �
00:34दीद दीदे उन्हें गेरने लगा जब लगा अब गरूर का अंत निश्चिता तभी अकास में गूंज उटी एक ब्यंकर गर्जना
00:41और चारो और अंधकार शागर प्रगर्ट हुई मां काली उनकी आंखों में अगनी थी और करोध से धरती कांप उटी
00:49मां काली ने एक ही प
01:03करने आती है जब भकत असहाय हो जाए तब मां काली स्वेम ढाल बन जाती है अगर आप भी मां
01:11काली की सकती पर विश्वास करते हैं तो कमेंड में लिखे जै मां काली
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