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हनुमान जी की यह अद्भुत कथा बताती है कि कैसे वे अपनी अपार शक्तियों को भूल गए थे और जामवंत जी के शब्दों ने उन्हें उनकी असली पहचान याद दिलाई।
समुद्र पार करने से पहले का यह प्रेरणादायक प्रसंग हमें सिखाता है कि हमारी सबसे बड़ी शक्ति हमारे अंदर ही छिपी होती है।

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🚩 जय श्रीराम 🚩
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Transcript
00:00आखिर क्यों भगवान राम भी हनुमान जी के बिना खुद को अधूरा मानते थे भगवान राम के लिए जो हर
00:07दर्द सहगे हनुमान जी हर दुख से भिढ़ गे लेकिन क्या आप जानते हैं इतनी शक्ति साली होते हुए भी
00:13हनुमान जी को अपनी शक्ति जाथ क्यों नहीं थ
00:17था कि होज में बानर सेना समुंदर टट पर पहुंचे चारो और निराशा थी
00:21सामने था विशाल समुंदर और किसी में उसे पार करने का साहस नहीं
00:25तब ही वहां बैटे थे हनुमान जी शान्त बिन में अपनी शक्ती से अंजान
00:30क्योंकि बचपन में रिशियों ने उन्हें शराब दे दिया था कि भी अपनी शक्तिया तब तक बूल जायेंगे
00:35जब तक कोई उन्हें जान नहीं दिलाए तब ही जब ममन जी ने आगे आए
00:39उन्होंने हनुमान जी को उनकी असली पहचान बताई
00:42तुम बही हो जो सूरे तक पहुँच गेते
00:45तुमारे लिए जे समुन्दर कुछ भी नहीं
00:47बस जही सब्द सुनते ही हनुमान जी के बीतर सोई हुई
00:51शक्ती जाग उठी उनका शरीर परबर जशा बिसाल हो गया
01:09होती है जो हमें हमारी पहचान जाद दिला दे
01:13जै शिर्राम जै बजरंग वली
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