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क्या सच में भगवान कृष्ण ने केले का छिलका खाया था? 🤯
यह कहानी सिर्फ एक चमत्कार नहीं, बल्कि सच्ची दोस्ती और भक्ति की सबसे बड़ी मिसाल है। जब प्रेम सच्चा होता है, तो भगवान को स्वाद नहीं — भावना दिखाई देती है।

इस भावुक कथा में जानिए कृष्ण और सुदामा की ऐसी कहानी, जो हमें सिखाती है कि भगवान को महंगे भोग नहीं, सच्चा दिल चाहिए। ❤️🙏
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Transcript
00:00क्या आपने कभी सोचा है जिस बगवान को पूरी दुनिया भोग लगाती हैं उन्होंने खुद केले का शिलका क्यों खा
00:06लिया कहानी शुदू होती है जब गरीब रामन सुधामा अपने बचपन के मित्तर बगवान करिशन से मिलने दवार का पहुंचे
00:14फटे कपड़े नंग
00:26से दोड़ पड़े उन्होंने सुधामा को गले लगाया आंखों से आंसु बहने लगे प्रेम इतना गहरा था कि बगवान खुद
00:34अपने मित्तर के चर्ण दोने लगे तब ही सुधामा की पतनी द्वारा भेजेगे केले सामने रखेगे सुधामा प्रेम में इतने
00:43खोगे कि
00:43गलती से केला फैंकते गे और शिलके क्रिशन को खिलाते गे और चमतकार देखिए क्रिशन मुस्कुराते हुए शिलके खाते रहे
00:51माननों अमरित खा रहे हो रुकमनी ने अचारे से पूशा प्रभू आख शिलके क्यों खा रहे हैं क्रिशन मुस्कुराए और
00:59बोले जिसमें
01:00प्रेम हो भही सबसे बड़ा परिशाद होता है उस दिन दुनिया ने समझा भगवान को स्वाद नहीं भक्ती चाहिए सच्चा
01:08प्रेम हो तो शिलका भी अमरित बन जाता है जै शिरी कृष्णा
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