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देखिए कैसे हनुमान और रावण के सबसे शक्तिशाली पुत्र इंद्रजीत के बीच हुआ भीषण युद्ध।
लंका जल रही थी, ब्रह्मास्त्र चल रहे थे, और केवल एक भक्त की भक्ति ने सब कुछ बदल दिया।
शक्ति, भक्ति और वीरता की यह कहानी आपको रोमांचित कर देगी!
इस कहानी को शेयर करें और बताएं कि आप हनुमान के साहस से कितना प्रेरित हुए!
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Transcript
00:00जिस ब्रह्मस्तर से देवता भी ढरते थे उसे देकर हनुमान जी ने क्यों लड़ना शोड़ दिया कि आपने कभी सोचा
00:06है एक ऐसा जुद जिसमें देवताओं को भी भे लगने लगा
00:09जब रावन का सबसे शक्ति साली पुतर हनुमान जी के सामने आ खड़ा हुआ लंका जल चुकीति चारो और बे
00:16और क्रोद का बातावन जब रावन को पता चला कि एक बानर ने उसकी स्वन नगरी को राक बना दिया
00:22है तो उसने अपने सबसे प्राक्रमनी पुतर इंदरजित क
00:25जुद के लिए बेज़ा इंदरजित जिसने देवता तक को प्राजित किया था जिसके पास दिब्बी अस्तरों की अपाश अक्तिती बे
00:32अकाश में प्रगट हुआ बिजली की तरह चमकता हुआ करोद से बरा हुआ दूसरी और खड़े थे शांट निदर प्रभू
00:40राम के �
00:41बक्त हनुमान जी इंदरजीत ने अगनी बान चोड़े अकाश गरजना से कांप उठा लेकिन हनुमान जी ने हसते हुए उन
00:48अस्तरों को निशफल कर दिया बानर बीर की गरजना से पूरी लंका ठ्रा उटी तब इंदरजीत ने अंति उपाय किया
00:56उसने ब्रहमस्तर का पर�
01:01हनुमान करना अधर्म होगा इसलिए उन्होंने अपनी शक्ति होते हुए भी सुवेम को बांधने दिया जे प्राजे नहीं थी जे
01:10थी एक भक्त की मर्यादा हनुमान जी बदे जदूर थे पर उनका साहस और बक्ती अटूर थी और जही संद
01:17बना लंका के बिनाश की शुर�
01:31जय हनुमान जय बजरंग वली
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