00:00सोचिए अगर उस दिन वो एक सलाह ना देते तो शायद लंका था कोई पहुंच ही नहीं पाता
00:05आखिर कौन था बो रहसे मई जोदा जिसकी बुद्धी बल से भी बढ़ी थी
00:09समुंदर किनारे पूरी बाना से ना डर से काम रही थी
00:12लेकिन सबसे जादा डर उस बुड़े जोदा से लग रहा था जिसकी सक्ती असल में कोई नहीं जानता था
00:17बो थे जामंत माता सीता की खोज में जब लंका के सामने खड़े थे सामने था असीम समुंदर और पीशे
00:24सफलता का भे हर जोदा अपनी सीमा बता रहा था लेकिन एक जोदा चुप था जामंत बस सबको देख रहे
00:30थे
00:30उनकी आँखों में ऐसा अनुबब था मानों उन्होंने जुगों का बिनाश देखाओ कहा जाता है जामंत जी ने देवताओं के
00:37जुद देखे समुंदर मंथा देखा और के जुगों का अन्त भी उनकी सक्ती इतनी भ्यानक थी की जुबा भस्ता में
00:44भी वे प्रित्वी की �
00:45प्रक्रिमा खेल की तरह कर लेते थे लेकिन आज भे खुद नहीं लड़ देते क्यूं वो दीरे दीरे एक सांत
00:52बानर के पास गे जो अपनी सक्ती बूल चुका था वो थे हनुमान जी जामंत जी की अवाज गुंची तुमें
00:59जाद नहीं तुम कौन हो जैसे ही जे सब्द ब
01:14गाने वाले जामंत में थी कभी कभी सबसे खतरनाख जोदा वो नहीं होता जो जुद करे बलकि वो होता है
01:21जो सोई हुई शक्तियों को जगा दे जैसीर राम
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