00:00इस मंदिर में रात बिताने वाला आज तक जिन्दा बापिस नहीं आया और आज फिर कोई अंदर जा चुका है
00:07मंदिर जहां रात को कोई जिन्दा नहीं रुकता गाउं के बाहर एक प्राचिन मंदर था कहा जाता सूजर डलने के
00:13बाद वहां बगवान भी नहीं रुकते लो�
00:26होते ही वे मंदिर पहुंचा दरवाजी अपने अब खुल गया अंदर गरा अंधेरा तूटी मूर्तिया दिवारों पर अजीव खरोचे अचानक
00:34गंटी अपने बजने लगी टन टन अर्जुन ने देखा सामने देवी की मूर्ति थी लेकिन उसकी आँखों में खून जैसा
00:42लाल जल बह रहा था वे डर कर पीशे हटा ही था कि पीशे से अवाज आई जे सथान शोर
00:49क्यूं नहीं देते अर्जुन पल्टा कोई नहीं था तबी पूरी मूर्ति जीवित हो थी बोत उर्ग रूप में मा काली
00:57धरती कामरें लगी अकार से गुंस्ती अवाज आई जे मं�
01:12कार से जहां आता है वे कभी बापिस नहीं लोड़ता अर्जुन कामते हुए गिद पड़ा और सुबह गाउवालों को मंदीर
01:19के बाहर सिर्फ उसके पैरों के निशान मिले अंदर जाने के बाहर आने के नहीं कुछ दरवाजे इंसानों के लिए
01:26नहीं होते
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