00:00क्या सच में बगवान राम जानते थे कि उनका अंता आनने वाला है इसलिए उन्होंने अपनी अंगूठी पतार रोक में
00:06भेजी थी और वहां जो मिला उसने सब कुछ बदल दिया
00:09कहते हैं अजोद्या में एक दिन ऐसा हुआ कि जिसने स्वें बगवान हनुमान जी को भी बेज से भर दिया
00:15राज्यसावा चल रही थी तब एक रहसे में तफस्पी अचानक पगट हुआ
00:19उनकी आंखों में अजीब चमक्तिर आवाज मानो समय के पार से आ रही हो
00:24उसने प्रभुशी राम से कहा आपसे एक गुप्त बारता करनी है अकेले में
00:29बगवान राम ने हनुमान जी को दोवार पर खड़ा किया रोदेश दिया जब तक मैं ना बुलाओ कोई अंदर ना
00:34आए
00:35अचानक बगवान राम की अंगूठी उनके हाथ से गिर गई लेकिन बजमीन पर नहीं गिरी
00:40दर्ती खुट फटगी और अंगूठी अंदेरे में समागी
00:44बगवान राम ने सांत सवर में कहा हनुमान जी मेरी अंगूठी बापिस लओ
00:49हनुमान जी पताल लोग पहुंचे चारो और अजीब सन्नाटा था और समय जैसे रुख चुका था
00:54बहां उन्होंने देखा एक सिंगासन जिसके सामने अनगित बगवान राम की अंगूठियां
01:01हनुमान जी चौंग गे इसमें मेरे प्रभू की अंगूठि कौन सी अपताल रोग के राजा हस पड़े और बोले
01:07हनुमान जी हर जुग में जब राम बगवान का अबतार समावत होता है और एक नई अंगूठि जहां आ गिरती
01:15है
01:15जे सुनते ही हनुमान जी समझ गे जे कोई साधारन गटना नहीं थी जे था समय का संगेत बगवान राम
01:23की लीला अब समावत होने वाली थी तो क्या हर जुग में बगवान राम फिराते है शायद अभी भी कहीं
01:30एक नई अंगूठि गिरने का इंतजार कर रही हो
Comments