00:00शिवरात्री की भे रात जब केलाश परवत भी काम उठा और एक फूल ने देवताओं की तकदीर बदल दीजे कोई सधारन शिवरात्री नहीं थी
00:07चंदर्मा लाल हो चुका था हवाय अचानक रुख गई थी और माता पारवती मोन ब्रत में लें थी
00:13कहा जाता है उस रात माता पारवती ने ऐसा फूल तोड़ा जिसे समाने मनुश्य सूने से भी डरते थे
00:20बे फूल था बेल पत्तर जिस पस वे महादेव का बास माना जाता है
00:24जैसे ही बे बेल पत्तर शिबलिंग पर रखा गया दर्ती फटने लगी नाग उफकार उठे और कैलाश में ब्यानक मोन शा गया
00:32देवता भे से चुपो गये क्यूंकि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था
00:37अचानक शिबलिंग में अवाज गुंजी पारवती जदी ये अरपन हंकार से हुआ होता तो शिरिष्टी का अंतर निश्ची था माता पारवती का शरीर काम पुठा
00:47पर उनकी भक्ती अडिग रही महादेव प्रगट हुए नेतर जवाला से डहग रहते और बोले जो शिबरातरी की इस रातरी शर्दा से बेलपत्तर चड़ाएगा उसके जीवन से मृत्यों का बे तक मिट जाएगा
01:00पर साबधन बे फूल बीना शर्दा चड़ाया गया तो उसका परनाम भ्यानक हो सकता है
01:07ओम नमाशी बाए
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