00:00तीन सालों की मेहनत के बाद अबुदावी में इंजिनियर्स और आर्किटेक्ट्स एक ऐसी बिल्डिंग का स्ट्रक्चर बना चुके थे जो किसी भी तरह मुम्किन नहीं था।
00:09ये कैपिटल गेट बिल्डिंग का स्ट्रक्चर था जिसको अबुदावी के खलीफा बिन जायद अलनायान की खसोसी फरमाईश पर बनाया गया था।
00:17क्योंकि इस बिल्डिंग का लाखों टन वजन सिर्फ एक तरफ को जुका हुआ था इसी वज़ा से इंजिनियर्स को ये खौफ था कि कैलकुलेशन से थोड़ा भी वजन बढ़ाया गया तो बिल्डिंग का ये स्ट्रक्चर एक ही पल में धेर भी हो सकता है।
00:31यहां तक पहुँचने के लिए कंस्ट्रक्शन टीम ने जिन चैलेंजिस का सामना किया था वो शायद बुर्ज खलीफा की कंस्ट्रक्शन टीम ने भी नहीं किया होगा।
00:39क्योंके कैपिटल गेट का डिजाइन एक ऐसा डिजाइन था जो फिजिक्स के लॉज को तोड़ने के बिल्कुल करीब करीब था।
00:47एन उस टाइम पर जब बिल्डिंग लॉंच के लिए बिल्कुल तयार थी अबुदावी के खलीफा की तरफ से कंस्ट्रक्शन टीम को एक पेगाम आया जिसमें उनका कहना था कि उनको इस बिल्डिंग के टॉप पर एक हैली पैट भी चाहिए।
01:01ये मैसेज कंस्ट्रक्शन टीम के उपर पहाड बन कर गिरा क्यूंकि बिल्डिंग का लोड पहले ही अपनी एक्स्ट्रीम लिमिट पर था।
01:08ना ही हैली पैट के लिए जगा चोड़ी गई थी ना ही बिल्डिंग का डिजाइन इस चीज़ की परमीशन दे रहा था और ना ही एंजिनियर्ज में शेख को मना करने की हिम्मत थी।
01:18तो अब सिर्फ एक ही सॉल्यूशन बचा था कि किसी भी सूरत में हैली पैड को मुम्किन बनाया जाए लेकिन मसला ये था कि आखिर कैसे।
01:27जैम टीवी की वीडियोज में एक बार फिर से खुशाम दी थी।
01:29नाजरीन कैपिटल गेट अबुदावी में मौझूद दुनिया की वाहिद ऐसी बिल्डिंग है जो इतनी उन्ची तो नहीं लेकिन इसने आर्किटक्चर के रूल्स को बकाइदा जिंजोर दिया था।
01:40524 फुट उन्ची इस बिल्डिंग का आधे से ज़्यादा वजन एक तरफ को जुका हुआ है लेकिन ये किसी गलती की वज़ा से नहीं बलके यही इसका डिजाइन था।
01:50क्योंके कैपिटल गेट का जुकाव इटली के लीनिंग टावर आफ पीजा से भी पांच गुना ज़्यादा है इसी वज़ा से इसको गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड भी मिल चुका है।
02:00लेकिन आखिर अबुदावी के शेख को जरूरत क्या थी इतनी खतरनाक बिल्डिंग बनाने की।
02:05असल में दुनिया भर में एक के बाद एक यूनीक स्ट्रक्चर बनाने की रेस चली हुई है जिसमें जीतेगा वोही जो सबसे अलग और सबसे मुश्किल तरीन स्ट्रक्चर बनाएगा।
02:15इस रेस में हिस्सा लेने के लिए और दुनिया भर से टूरिजम अट्रेक्ट करने के लिए दो हजार साथ में अबुदाबी के खलीफा बिन जायत अलनायान भी मेतान में उतर आये।
02:25उनका टार्गेट उन्ची तरीन बिल्डिंग बनाने का नहीं बलके उनको एक ऐसी बिल्डिंग बनानी थी जिसका डिजाइन देखने दुनिया भर से लोग आएं जिसको बनाने में ज्यादा वक्त भी ना लगे और जो फिजिक्स के लॉज को चैलिंज भी करें।
02:39इसी मकसद को पूरा करने के लिए खलीफा ने अपने कजन शेख सुल्तान को अपॉइंट कर दिया।
02:45ये टास्क मिलते ही शेख सुल्तान ने लंडन की टॉप आर्किटेक्चर फर्म आर एम जे एम से राप्ता किया।
02:51और यही इस बिल्डिंग को बनाने का सबसे पहला अमल था।
02:56कैसे इंजिनियर्ज और वरकर्स ने इस खतरनाक चैलिंज को अंजाम तक पहुँचाया।
03:00कैसे इस बिल्डिंग को ठीक 18 डिग्रीज पे टिल्ट किया गया।
03:04और कैसे लाकों टन वजनी इस चुकाव को गिरने से बचाया गया।
03:08यह सब आप जान सकेंगे आज की इस वीडियो में।
03:12चैलिंज नमबर वन
03:12लंडन बेस्ट आर्किटेक्चर फर्म को जब यह टास्क दिया गया तो यही इनका सबसे बड़ा चैलिंज था।
03:19उनको एक ऐसा डिजाइन बनाना था जो उनके ही बनाए गए आर्किटेक्चर रूल्स के खिलाफ हो।
03:24आर्किटेक्चर फार्म के कई डिजाइन्स पहले तो रिजेक्ट किये गए लेकिन फिर इस डिजाइन को बनाने के लिए उन्होंने अबुदाबी के रेकिस्तान में मौझूद खुबसूरत रेत के टीलों और समंदरी लहरों से इंस्पारेशन ली और अब बारी थी कुदरत
03:54बिल्डिंग का रिव्यू बिल्कुल चेंज हो जाता है चैलेंज नमबर टू ये डिजाइन शेख सुल्तान को पसंद तो बहुत आया लेकिन इसमें एक मसला था जी हाँ कैपिटल गेट के डिजाइन को रियालिटी बनाने के लिए एक्स्ट्रा ओर्डनरी इंजिनेरिंग
04:24ये चैलेंज था कि उनको एक ऐसी फाउंडेशन तयार करनी थी जो जुकी हुई साइड के लाखों टन के वजन को अराम से जेल सके इस चैलेंज को अंजाम तक पहुंचाने के लिए प्रोजेक्ट आर्किटेक्ट टोनी आर्किबॉल्ट ने फाउंडेशन बनाने का काम स्�
04:54फाउंडेशन नहीं थी जिस साइड पर बिल्डिंग जुकेगी उसके नीचे फाउंडेशन पर 200 पाईल्स लगाए गए जबके दूसरी साइड वाले पाईल्स की लेंद ज्यादा रखी गई जिनको जमीन के अंदर ही मौजूद बड़े बड़े पत्रों में ड्रिल करके �
05:24इस्ट्रिब्यूट करने के लिए एक एक एक्स्ट्रा और्डिनरी फाउंडेशन का प्लैन भी तैयार कर लिया था अब टाइम था फाउंडेशन का काम स्टार्ट करने का इस फाउंडेशन के लिए बहुत बड़े लेवल पे खुदाई की जरूरत थी और तकरीबन 9600 टन म
05:54खड़ा हुआ जी हाँ इस मौके पर शेख सुल्तान ने इस बिल्डिंग की डेडलाइन जारी कर दी थी क्योंके ठीक दो सालों के बाद अबुदाबी में फ्यूचर एनरजी समिट होना था इसी वज़ा से खलीफा चाहते थे कि इस एनरजी समिट से पहले ही बिल्डिंग क
06:24अफरा तफरी सी मच कई थी जिसकी वज़ा से उनको पूरा कंस्ट्रक्शन टाइम फ्रेम ही चेंज करना पड़ा यानि जिस फाउंडेशन पे आट महीनों का वक्त रिकॉइट था उसको दिन रात एक करके सिर्फ तीन महीनों में ही कंप्लीट कर लिया गया क्योंके इसके �
06:54उनको एक और चैलिंज का सामना करना पड़ा नॉर्मल स्काय स्क्रेपर्ज एक सॉलिड कोर के गिर्द बने होते हैं जो बिलकुल सीधा उपर तक जाता है लेकिन कैपिटल गेट के केस में अगर ऐसा ही कोर बनाया गया तो जुकाव की वज़ा से कोर एक तरफ को मुड भी स
07:24कर्फ बनाया जाएगा और कोर मुकमल होने के बाद बिल्डिंग का बकाया हिसा इसके इर्द गिर्द फिट किया जाएगा लहाजा अब कर्फ कोर का का काम जल्द अस जल्द स्टार्ट करना था ताकि डेडलाइन से पहले ही काम खतम हो सके चैलिंज नमबर 5 इस खास किसम के
07:54की कड़ती गर्मी में दिन के टाइम पर पारा 50 डिगरी सेंटीगरेट तक पहुंच जाता है अगर कॉंक्रीट को इस गर्मी में डाला गया तो वक्त से पहले ही वो खुश्क हो जाएगा जिसकी वज़ा से कोर में क्रैक्स पढ़ने का खच्चा था नहाजा अब कंस्रक्श
08:24जाएगा वो दिन का टाइम नहीं बलके रात का समा होगा जब टेमपरेचर 30 डिगरी सेंटीगरेट तक गित जाता है ये काम अंजाम देने के लिए आइस फैक्टरी से बरफ मंगाई जाती जिसको पिगला कर ठंडे पानी के तौर पे सेमिंट और पत्रों के साथ मिलाकर क�
08:54जिसका आदे से जादा काम पूरा हो चुका था लेकिन असल चैलिंज अभी बाकी था जी हाँ कंस्रक्शन टीम ने कोर को तो थोड़ा कर्वड शेप दे दिया था मगर अब बारी थी बिल्डिंग के असली जुकाव की जिसके लिए डायगरिट टेक्नॉलोजी का इस्तमाल
09:24था यानि टोटल 720 लोहे के फ्रेम्स हर एक फ्रेम का वजन 16,000 केजी और हर एक फ्रेम की शेप एक दूसरे से अलग होगी ये काम अनजाम देने के लिए शारजा की एक स्टील मैनुफिक्चरिंग कंपनी को टास्क दिया गया क्यूंकि हर फ्रेम की शेप एक दूसरे से अल�
09:54गेट का डाइगरेट भी कम्प्लीट हो गया और साथ साथ विंडो पैनल्स लगने का काम भी चलता रहा अब बिल्डिंग में सिर्फ छोटे मोटे काम ही बाकी थे जो शेख सुल्तान की दी गई डेडलाइन से पहले ही कम्प्लीट हो जाने थे बिल्डिंग अब हैंड ओवर क
10:24तक सब कुछ कम्प्लीट हो चुका था और कैपिटल गेट का सारा लोड पहले से कैलकुलेटिट था यानि डिजाइन बनाते वक्त हैलिपैड और हैलिकॉप्टर का वजन शामिल नहीं किया गया था ये मसला कैपिटल गेट की कंस्ट्रक्शन के दौरान खड़ा होने वाला
10:54हेलिकॉप्टर का डिजाइन कुछ ऐसा है कि तेज हावा के मौसम में हेलिकॉप्टर बिल्डिंग पर लेंडिंग के दौरान क्रैश भी कर सकता है लेकिन अब किसी भी सूरत में ये हेलिपैड बनाना था क्योंकि अब ये शेख की फरमाईश थी इसी मकसद के लिए लंडन
11:24जाएं और हेलिपैड की उंचाई को दो मीटर कम किया जाएं तो ये मसला काफी हद तक कम हो सकता है मौडल में हेलिपैड का डिजाइन चेंज किया गया तो हैरत अंगे स्टॉर पे विंड इंजिनियर की सजैशन सच साबित हुई
11:38ये खबर मिलते ही कैपिटल गेट पे हेलिपैड की कंस्टॉक्शन स्टार्ट कर दी गई और बिल्डिंग को वक्त से पहले ही शेख सुल्तान के हैंड ओवर कर दिया गया
11:47कंस्ट्रक्शन टीम और वरकर्स को सलाम है जिन्होंने अपनी काबलियत से दुनिया का सबसे उन्चा लेनिंग टावर बनाया है
11:55उमीद है जम टीवी का ये एपिसोड भी आप बरपूर लाइक और शेयर करेंगे
11:59आप लोगों के प्यार भरे कॉमेंट्स का बेहद शुक्रिया मिलते हैं अगली शांतार वीडियो में
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