00:001903 में जब दुनिया के सबसे पहले हवाई जहाज ने अपनी पहली उड़ान परी तो किसी को भी इस बात का यकीन नहीं आया
00:08क्यूंकि इस दिन से पहले इंसानों के हवा पे तेरने को हमेशा नामुम्किन या फिर ख्याली समझा जाता था
00:15लेकिन अब साइंस दानों को कुछ ऐसे सबूत मिले हैं जिनको देख कर ऐसा मालूम होता है कि दुनिया का सबसे पहला हवाई जहाज राइड ब्रदर्स ने नहीं बलके ये काम तो हजारों साल पहले बसने वाली एंशियंट सिविलाइजेशन पहले से कर चुकी है
00:32जैम टीवी की वीडियोज में एक बार फिर से खुशाम दीद नाजरीन कोलम्बिया के घने रेन फॉरिस्ट में एक बहुत बड़ा एरिया ऐसा भी है जहां किसी दोर में इंसानों की एक ऐसी सिविलाइजेशन बसा करती थी जो गोल्ड और कॉपर को मिला कर उन से मुखतल
01:02पूरी सिविलाइजेशन तो खतम हो गई लेकिन ये लोग अपने पीछे बहुत कुछ चोड़ गए थे
01:081965 में आर्कियोलाजिस्ट और रिसर्चर्स का एक ग्रूप यहां खुदाई का काम कर रहा था तब ही उनको एक बहुत बड़ा संदूक मिला जिसमें सोने से बनी बेशुमार चीजें पड़ी थी
01:20ये उन्ही आर्टिफेक्ट्स का एक छोटा सा हिस्सा था जो कुइमबया सिविलाइजेशन के लोग बनाया करते थे
01:27जूलरी से लेकर डेकोरेशन पीसिस तक कोई चीज ऐसी नहीं थी जो इस संदूक में मौजूद ना हो
01:34लेकिन सिर्फ एक चीज ऐसी थी जिसने सब का धिहान समेट लिया था
01:38जी हाँ इसमें एक ऐसा आर्टिफेक्ट भी था जिसकी शकल किसी मौडरन होई जहाज से मिलती जुलती थी
01:45हजारों साल पहले उस दौर में होई जहाज तो हुआ नहीं करते थे
01:49इसी वज़ा से इसको देखते ही सब का खयाल था
01:53कि शायद ये किसी उड़ने वाले इंसेक्ट या परिंदे का गोल्ड से बना मौडल है
01:58लेकिन कुछ तो था इस मौडल में जो अनकरीब सब को हैरान और परिशान करने वाला था
02:04जब इस मौडल को डीटेल्ड स्टेडी के लिए एरोडाइनमिक्स एक्सपर्ट तक पहुंचाया गया
02:09तो आखिर कार इस पहेली की गुथियां एक एक करके सुलजने लगी
02:14ये जाना गया कि इस मौडल का डिजाइन परिंदों और उडने वाले इंसेक्ट से काफी ज़्यादा मुक्तलिफ है
02:20क्योंके दुनिया में कोई एक भी ऐसा परिंदा नहीं है जिसकी दुम सीधी खड़ी हो जैसा के इस मौडल की देखी जा सकती है
02:28ये दुम जिसको एंजिनेरिंग की जबान में रडर कहा जाता है ये मौडरन एर क्राफ्ट का एक एहम तरीन हिस्सा होता है जो हवाई जहाज की डिरेक्शन को कंट्रोल करता है
02:40इसके साथ साथ तमाम परिंदों और इंसेक्ट के विंग्स उनके जिसम के ऊपर लगे होते हैं जबके इस मौडल के विंग्स इसकी बॉडी के निचले हिस्से से अटेच्ट हैं और ऐसा सिर्फ मौडरन एर प्लेंज या फिर स्पेस शटल में देखा जा सकता है
02:55इन विंग्स को एंजिनेरिंग की जबान में एलरॉंस कहते हैं जिनका काम एर प्लेन को लेफ्ट राइट मोडने का होता है
03:03राइट ब्रदर्स के पहले जहाज से भी एक हजार साल पहले बनाया जाने वाला ये मौडल दुनिया भर के एक्सपर्ट्स और रिसर्चर्स को ला जवाब कर बैटा था
03:13क्योंकि इस मौडल में रडर और एलरॉंस के साथ साथ इसका डिजाइन भी एरो डाइनमिक्स फ्रेंडली था
03:19फ्लाइट के दुरान हवा से पैदा होने वाली फ्रिक्शन जहाज के लिए कम से कम रुकावट बने
03:25इसी वच जहाज को कुछ ऐसे डिजाइन किया जाता है क्यों हवा को कारता हुआ आगे बड़े
03:31और इस डिजाइन को ऐरो डाइनमिक्स फ्रेंडली डिजाइन कहा जाता है
03:36यानि अगर ये मौडल किसी खिलोनी की नियत करके बनाया गया होता
03:40तो जाहिर है इसमें उन बारीक बारीक चीजों का ख्याल क्यूं और कैसे रखा गया जिनका उस दोर में नामों निशान भी नहीं था
03:49क्या एक हजार साल पहले बसने वाली कुएमबया सिविलाइजेशन वाकई कोई असली जहास बनाने में कामियाब हो चुकी थी
03:57इतनी बारीकी से बनाया जाने वाला क्या ये उनके असली हवाई जहास का ही कोई मौडल तो नहीं
04:03शायद इस सवाल का जवाब आपको इसी वीडियो में मिल सके
04:07इजिप्ट के शहर काईरो से साड़े पांथ सो किलो मिंटर दूर
04:11इंशिएंट इजिप्शन्स की एक इबादत का मौजूद है जिसको टेंपल आफ सेटी भी कहा जाता है
04:17और ये जगा भी अपने अंदर बेशुमार राज चुपाए हुए है
04:21इजिप्ट की दूसरी इंशिएंट साइड्स की तरह इस टेंपल की दिवारों पर भी पत्थरों को बारीकी से तराश तराश कर इन पर सीक्रिट मैसेज लिखे गए थे
04:31इस राइटिंग को हाईरोगलिफिक्स कहा जाता है जो यहां रहने वाले लोग और राज करने वाले बादशाहों की जिंदगी और मौत के बारे में काफी कुछ बताती है
04:41इस टेंपल में 2000 साल पहले बनाए गए इन हाईरोगलिफिक्स में कुछ ऐसे पोशीदा पेगामात भी लिखे गए थे जिनको शायद आज हम तक पहुंचाने के लिए छोड़ा गया था
04:52इजिप्टोलिजिस्ट डॉक्टर रूथ होवर यहां एक रिसर्च के मकसद से इन हाईरोगलिफिक्स की फोटोज ले रही थी
05:00तभी उनको अपने पेरों के नीचे कुछ महसूस हुआ
05:03उन्होंने देखा कि हाईरोगलिफिक्स का एक चोटा किनारा तूट कर इनके पेरों के नीचे पड़ा हुआ था
05:09लेकिन उनको इस बात का बिलकुल भी इलिम नहीं था कि पत्थर का ये किनारा साइंस की दुनिया में हल चल मचाने वाला है
05:17जी हाँ जब डॉक्टर रूथ होवर ने वो किनारा उठा कर वापस हाईरोगलिफिक्स के उस हिस्से पे रखा तो सारी चीज खुल कर सामने आ गए
05:26दिवार पर कुछ ऐसी चीजे बनी थी जिसको आज हम मौडरन टेकनोलोजी कहते हैं
05:32एक मौडरन एर प्लेन जिसमें वाज़े तोर पे रडर भी देखा जा सकता है
05:36हेलिकॉप्टर की छेप जो आज कल के मौडरन वार हेलिकॉप्टर से मिलती जुलती है
05:42साथ साथ इसमें मौडरन याउट और उसके नीचे बनाई गई सबमेरीन का नक्षा भी साफ साफ देखा जा सकता है
05:49हाईरोगलिफिक्स के इस चोटे से हिस्से ने एजिप्टॉलिजिस्ट, रिसर्चर्स और साइंस दानों को पूरी तरह से हैरान और परिशान चोड़ दिया है
05:57क्योंके जो टेक्नॉलिजी बने अभी 200 साल भी नहीं गुजरे हैं
06:02वो 2000 साल पहले इंशेंट एजिप्शन्स को इंतहाई बारीकी से कैसे मालूम पड़ी
06:07बात अभी यहां खतम नहीं हुई
06:09रिसर्चर्स का मानना है कि इस तस्वीर में हेलिकॉप्टर, यॉर्ट, प्लेन और सबमरीन तो वाज़े तोर पे देखी और पहचानी जा सकती है
06:18लेकिन इनके आस पास बनी ये दूसरी चीज़ें आखर हैं क्या
06:22क्या ये आने वाले वक्त की कोई ऐसी टेकनोलोजी है जो हमने आज तक नहीं देखी
06:27या फिर ये टेंपल आफ सेटी में पाया जाने वाला जीता जाकता सबूत इस बात की निशानी है
06:33कि इंशेंट एजिप्शन्स के पास ये सब चीज़ें मौजूद थी
06:37मौडरन टेकनोलोजी की बात सिर्फ टेंपल आफ सेटी तक ही महदूद नहीं है
06:41इजिप्ट के सबसे पुराने पेरमिड जिसको डिचोजर भी कहा जाता है
06:45उसके पास एक टूम है जहां से आर्कियोलोजिस्ट को इंशेंट एजिप्शन्स के बनाए हुए काफी सारे शोव पीस में ले थे
06:53इन शोव पीसिज में 2000 साल पुराना एक लकडी से तराशा हुआ ऐसा नमोना भी था
06:59जिसकी शकल किसी परिंदे जैसी लगती थी
07:02एक्सपर्ट का मानना है कि बजाहर तो ये मौडल किसी परिंदे का लगता है
07:07लेकिन जब इस पर मजीद रिसर्च की गई तो एक के बाद एक मिस्टरी जनम लेती गई
07:12इसका एरोडाइनमिक डिजाइन और इसके विंग्स की लोकेशन देखकर ये कहना घलत नहीं होगा
07:18कि इसकी कई प्रॉपटीज आज कल के मौडरन एरकराफ्ट से काफी ज़्यादा मिलती है
07:23एक्सपर्ट के इन दावों को साबित करने के लिए मौडरन टेक्नोलिजी के जरिए
07:28बजाहिर दिखने वाले परिंदे के इस नमूने का फ्लाइंग टेस्ट करना जरूरी था
07:33साइमन सेंडरसन जो के एक एरोडाइनमिक्स एक्सपर्ट है
07:37उन्होंने इस मौडल की हू बहू कौपी तयार की जो के ओरिजनल मौडल से पांच गुना बड़ी थी
07:44जब लैब में इस मौडल का फ्लाइंग टेस्ट किया गया तो नतीजा देखकर साइमन काफी ज़्यादा हैरान थे
07:50मौडल पूरी तरह से एरोडाइनमिक तो था लेकिन इसमें एक बहुत एहम चीज मिसिंग थी
07:56जी हाँ जहास को टेक आफ और लेंडिंग के लिए टेल की जरूरत होती है और ये टेल इस मौडल में मौजूद नहीं थी
08:04लेकिन हैरत की बात तो ये है कि जिस जगह टेल लगी होनी चाहिए थी
08:09उस जगह से मौडल का एक चोटा हिसा टूटा हुआ दिखाई देता है
08:13ये टूटा था इस बात की निशानी है कि शायद इस मौडल को बनाने वाले ने इसमे टेल लगाई थी
08:20लेकिन किसी वजा से ये टेल अब तूट चुकी है
08:23साइमन ने फ्लाइंग मॉडल में अपनी तरफ से टेल फिट की
08:26और एक बार फिर से उसको सिमुलेटर पे फिलाए किया
08:30इस बार जो रिजर्ट सामने आए वो वाकई काफी ज़्यादा हैरान गुन थे
08:34मॉडल बिलकुल असली किलाइडर की तरह हवा पे तैर रहा था
08:38जो इस बात का सबूत था कि 2000 साल पहले बनाया गया ये मॉडल उडने के लिए बिलकुल परफेक्ट था
08:45अगर एंशेंट एजिप्शन्स ने इतना परफेक्ट मॉडल बना लिया था
08:50तो क्या उसको कभी उड़ा भी पाए कि नहीं
08:53ये सवाल भी एक्सपर्ट्स और रिसेर्चर्स को ऐसे ही तंग करता रहेगा
08:57जैसे टेंपल अफ सेटी में बने हाईरोगलिफिक्स और कोयमबया सिविलाइजेशन का प्लेन मॉडल कई सवालिया निशान छोड़ गया है
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