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  • 6 months ago

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00:00टाइटैनिक के बाद अगर लोगों को किसी शिप पर यकीन था तो वो थी M.V. एक्सप्लोरर।
00:06ये दुनिया की पहली क्रूज शिप थी जिसको खास बनाया ही बरफ में चलने के लिए था।
00:12इसकी परफॉर्मेंस इतनी अच्छी थी कि इसने अंटाक्टिका में कई शिप्स को रेस्क्यू करने का रिकॉर्ड भी बनाया है।
00:19लेकिन 23rd November 2007 की रात को काले और वीरान सदरन ओशन में इस शिप के साथ एक ऐसा हाथसा पेश आया कि इसको बीच समंदर में ही अकेला चोड़ कर निकलना कैप्टिन की मजबूरी बन चुकी थी।
00:34जैम टिवी की वीडियोज में एक बार फिर से खुशाम दीद।
00:37नाजरीन 1960 में समंदर के रास्ते एंटाक्टिका का सफर करना तकरीबन नामुम्किन समझा जाता था क्यूंकि वहां पर समंदर बरफ से भरा होता था और इस सूरत में किसी नॉर्मल शिप का वहां पर जाना मौत को दावत देने जैसा ही था।
00:53मगर एक स्वेडिश अमेरिकन बिजनिसमेन एरिक लिंड ब्लेड ने इसे चैलिंज समझ कर पबूल किया और एक ऐसी शिप बनाने का इरादा किया जो बासानी एंटाक्टिका का सफर कर सके और जो लोग एंटाक्टिका देखने का खौब रखते थे वो अपना खौब पू
01:23एक्स्प्लोरर का कमपेरिजन अगर इतिहास की मशूर शिप्स टाइटैनिक या फिर आरेमेस ओलम्पिक से किया जाए तो ये उनसे चोटी तो जरूर थी मगर मजबूती में इसका कोई जवाब नहीं था ये वो पहली क्रूज शिप बनाई गई थी जिसका मकसद पैसिंज
01:53वन ए शिप यानि इसको बरफ में चलने के लिए आइस ब्रेकर की जरूरत नहीं थी बलके इसका बाओ ऐसे डिजाइन किया गया था कि शिप के वजन से ही बरफ तूटती जाती थी इस शिप में 104 पैसिंजर्स और 54 क्रू मेंबर्स के लिए जगा मौजूद थी
02:10किरू शिप में तमाम लक्जरी फैसिलिटीस के साथ साथ एक और चीज़ भी थी जो MV Explorer की शान में इजाफा कर रही थी क्योंकि इसे खास तोर पर एंडाक्टिका के सफर के लिए बनाया गया था और वहां मौजूद भरफ से महفوظ रखने के लिए इसके हल को डबल लेर में
02:40Explorer रखा गया था लेकिन वक्त के साथ साथ इस शिप के Owners भी बदलते रहे और 2004 में आखरी बार इसको टॉरंटो बेस्ट ट्रेवल कंपनी Gap Adventures ने खरीदा जिनों ने इसका नाम MV Explorer रख दिया था इसके बाद ये किसी और मालिक के कबजे में नहीं आ पाईगी ऐसा किसी के वह
03:10के November में इसको एक ऐसे सफर पर रवाना होना था जहां से लौट कर ये कभी वापस नहीं आएगी ये November 2007 था MV Explorer अपने 19 रोजा सफर के लिए बिलकुल तयार थी
03:24इसको आजंटीना के शहर उस्वाया से स्टार्ट लेना था और फॉकलेंड आइलेंड से होते हुए साउथ जॉर्जिया आइलेंड और फिर एंटाक्टिका तक पहुँचना था
03:3411 नवेंबर 2007 को MV Explorer में 100 पैसिंजर्ज और 54 क्र्यू मेंबर्स एक बार फिर से एंटाक्टिका के इस हसीन सफर के लिए रवाना हुए
03:46यहां तक सब कुछ नॉर्मल चल रहा था किसी को भी अंदाजा नहीं था कि इनका ये हसीन सफर इनको किस मुसीबत में धकिलने वाला है
03:55MV Explorer के कैप्टिन 49 एर्स के बैंक्ट वाइमन थे
03:59वो हजारों बार इस बरफ से भरे समंदर पर शिप्स चला चुके थे
04:03और इसी एक्सपिरियंस की वजा से ही पैसेंजर्स खुद को महفوظ समझ रहे थे
04:08पर एंटाक्टिका के शिप कैप्टिन्स चाहे कितने भी एक्सपिरियंस क्यों ना हो
04:13वहां की बदलती कंडिशन्स की वजा से हर बार मुक्तलिफ मसाइल का सामना करना परता है
04:19और हर बार एक नया चैलिंज उनके लिए तयार होता है
04:22इस सफर की शुरुआत में कैप्टिन बैंक्ट वाइमन ने एक हैरान कुन फैसला किया
04:27वो अपने प्लैन रूट से हटकर शिप को एक नए रूट पर से लेकर जाना चाहते थे
04:32क्योंकि कैप्टिन का मानना था कि ऐसा करने से शायद वो ज्यादा वरफ वाले इलाकों से बचकर अपनी मन्जिल तक पहुंच सकेंगे
04:40शुरुआत के 10 दिन बिलकुल मामूल के मताबिक चल रहे थे लेकिन 22 नवेंबर की शाम को सूरज गरूब हो रहा था और पैसेंजर्स अपने अपने केबिन्स में जाने की तैयारी कर रहे थे
04:52इसी दोरान MV Explorer एक ऐसे इलाके में एंटर हुई जहां पर काफी ज्यादा बरफ मुझूद थी
04:59कैप्टिन ने अनौस्मेंट की कि हम बरफ वाले इलाके से गुजर रहे हैं इसी लिए बरफ के बार बार टकराने की वज़ा से शोर पैदा होगा और ये रात आप सब को बरदाश्ट करनी पड़ेगी
05:11अन्धेरे की वज़ा से कैप्टिन ने शिप की रफदार को कम करके सिर्फ 5 नौस्ट पर सेट कर दिया था यानी करीब 10 किलो मिटर पर आर
05:20आहिस्ता आहिस्ता शिप पतली बरफ की लेयर से निकल कर मोटी और पुरानी बरफ की लेयर वाले इलाके की तरफ बढ़ रही थी
05:28मगर कैप्टिन को इस बात का अंदाजा नहीं हुआ क्योंके रात के 10 बच चुके थे और ज्यादा कुछ दिखाई भी नहीं दे रहा था
05:50पहले ही अनाॉंसमेंट कर रखी थी इसी वज़ा से काफी पैसेंजर्स ने इस आवास पर दिहान नहीं दिया और वो सोते ही रहे
05:57कुछ देर बाद कैप्टिन शिप को दुबारा से चलाने में कामियाब हो गए
06:01MV Explorer अब दुबारा से बरफ को काटती हुई बरफीले समंदर में आगे बढ़ रही थी
06:07मगर कैप्टिन समेथ शिप में सवार पैसेंजर्स ये नहीं जानते थे कि शिप के हल में एक सुराख हो चुका है
06:15और पानी अब दीरे दीरे शिप के निचले हिसे में जमा होना शुरू हो चुका है
06:20सोए हुए पैसेंजर्स की आँख तब कुली जब उनके केबिन्स में पानी भरना शुरू हो चुका था
06:26क्योंकि पैसिंजर केबिन जहास के निचले वाले हिसे में थे इसी लिए पानी सबसे पहले वहीं पहुँचा था
06:33ये देखते हुए पैसिंजर्स में अचानक एक खौफ की लहर दोड़ गई
06:37हर कोई अपनी जान बचाने के लिए इधर उधर भागने लगा
06:41पानी अब हर ममकिना जगा से शिप में दाखिल हो रहा था
06:45चाहे लाइट स्विच हो डक्ट वेंट या फिर दर्वाजे की दरारे
06:49जब तक कैप्टिन को इस बात का इलिम हुआ तो कई केबिन्स पानी से भर चुके थे
06:54पहले तो उनको लगा कि शायद छोटा डेमिज हुआ है जिस पर काबू पाया जा सकता है
07:00लेकिन जब पानी का प्रेशर बढ़ता ही जा रहा था तो कैप्टिन भी समझ गया कि बात अब काबू से बाहर निकल चुकी है
07:07कैप्टिन ने फौरी तोर पर शिप को खाली करने का आडर दिया और तमाम लाइफ बोर्ट्स को डिपलॉय करने का फैसला किया
07:14इसी दुरान शिप बरफीले अलाके से तो निकल चुकी थी मगर पानी जमा होने की वज़ा से वो एक तरफ जुक गई थी
07:21क्रू मेंबर्स जल्दी से शिप को खाली करने और इनसानी जानों को बचाने में मसरूफ थे
07:27शिप अपनी मन्जिल से 46 किलो मिटर दूर थी और मन्जिल पर डेमेज शिप के साथ पहुँचना ना मुम्किन था
07:35दूसरी तरफ मसला ये भी था कि अन्टाक्टिका का ये समंदर बरफ होने की वज़ा से बहुत ज्यादा ठंडा था
07:41और यहां की ठंडी हावा की वज़ा से लाइफ बोट्स पर ज्यादा देर रहना भी मुम्किन नहीं था
07:46इसलिए कैप्टिन ने एक्सप्लोरर के करीब मुझूद दूसरी शिप्स को सोस के सिगनल्स भेजना शुरू कर दिये
07:53ये सिगनल्स नेशनल जियोग्राफिक एंडवर और नौर्ड नौर्ज नामी शिप्स को भेजे गए थे
08:00मगर ये शिप्स भी काफी दूर थी और इनका फौरण यहां तक पहुँचना मुम्किन नहीं था
08:05आहिस्ता आहिस्ता पानी एमवी एक्सप्लोरर के सेपरेटर रूम में जमा होना शुरू हो गया
08:10ये वो रूम होता है जहां शिप्स की तमाम मशीनरी मौजूद होती है
08:15यानि इसी रूम से ही पूरी शिप को पावर दी जाती है
08:19इस रूम में पानी भरने की वज़ा से अब एमवी एक्सप्लोरर की तमाम एलेक्रिसिटी बंद हो गई
08:25एंटाक्टिका के बरफीले समंदर के बीचो बीच अब एमवी एक्सप्लोरर बिलकुल अंधेरे में तन तनहा गड़ी थी
08:33इसके एंजिन्स बंद हो चुके थे और अब शिप सिर्फ समंदरी लहरों के रहमो करम पर थी
08:39कैप्टिन को जहां एवेक्वेशन की फिकर थी वहीं अब उसको एक और खयाल भी तंग कर रहा था
08:46अगर शिप का एंजिन्स दुबारा से ओन ना किया गया तो तेज हवाएं और लहरें शिप को दुबारा भरफ वाले अलाके में धकेल सकती थी
08:54अलेक्टिकल फेलियर की वज़ा से एंजिन्स को मैनूली तरीके से आउन करने की कोशिश की गई
09:00खुशकिसमती से ये आइडिया काम कर गया और एंजिन्स एक बार फिर से स्टार्ट हो गए
09:06क्रिव मेंबर्स ने शिप को खाली करने का प्रोसेस मजीद तेज कर दिया
09:11कुछ ही देर में जहाज पर सवार तमाम अफराद चार लाइफ बोट्स में सवार होकर ठंडे तरीन पानी में उतर गए
09:18कुछ देर तक कैप्टिन और चंद क्रिव मेंबर्स शिप को सीधा करने की कोशिश करते रहे
09:24लेकिन आखरकार एंजिन एक बार फिर से बंद हो गए
09:28अब एमवी एक्स्प्लोरर में पानी तेजी से भरता जा रहा था
09:32और कैप्टिन को जल्द अस जल्द कोई फैसला करना था
09:35लहाजा कैप्टिन और चंद क्रिव मेंबर्स भी शिप से उतर कर लाइफ बोर्ट्स में सवार हो गए
09:41अब ये डेर्ड सो से ज्यादा लोग लाइफ बोर्ट्स में मौझूद थंडे तरीन सदरन ओशन में
09:46खुले आसमान के नीचे किसी मदद का इंतजार कर रहे थे
09:50और थंडी हवा इनका इंतजार मुश्किल से मुश्किल बना रही थी
09:55अगले चार घंटों तक ये इंतजार जारी रहा और आखिरकार एक शिप इनको बचाने के लिए पहुँच गई
10:02ये नौड नौड शिप थी जिसे कैप्टिन ने SOS कॉल दी थी
10:06तमाम लोगों को तो काम्याबी से बचा लिया गया लेकिन M.V.A. के नसीब में डूबना ही लिखा था
10:13M.V.A. के इस हादसे पर एक इन्वेस्टिकेशन टीम भी बिठाई गई
10:18जिससे ये नतीजा सामने आया कि ये नुकसान कैप्टिन बेंट वैमन की गलती की वज़ा से हुआ
10:24क्योंके कैप्टिन ने जिस बरफ को पहले साल की पतली बरफ समझ कर शिप को उस इलाके में दाखिल किया
10:31असल में वो कई साल पुरानी बरफ की मोटी लेर थी
10:35आज MV Explorer का Shipwreck Penguin Island से 25 मील साउथ एस्ट में 1300 मीटर की कहराई में मौझूद है
10:44उमीद है ZEM TV की ये वीडियो भी आप लोग भरपूर लाइक और शेर करेंगे
10:49आप लोगों के प्यार भरे कॉमेंट्स का बेहत शुक्रिया
10:52मिलते हैं अगली शांदार वीडियो में
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