00:00एक उपवन में एक खरगोष रहा करता था, वह बहुत चालाग था।
00:06एक बार उसके मन में खेद को देखकर ख्याल आया
00:11कि अगर उसे उस खेद से उसके खाने के लिए बहुत सारी सबजिया हुगानी है,
00:18उसे उस खेद में उगी हुई गास काट कर खेद को साफ करना पड़ेगा
00:24और पुरे खेद को साफ करना तो उसके अकेले के बस की बात ही नहीं थी।
00:29तो उसने एक तरकीब सोची, वह एक लंबी सी रसी ले आया
00:36और उस रसी का एक फेरा एक बड़े पेड को डाल कर उसने रसी खुली छोड़ दी
00:42और वह नज़दी के जाड़ी में जाकर छुप गया
00:46थोड़े ही देर में एक बड़ा सा हाथी महाँ से गुजर रहा था
00:51खरगोश सामनी आया, उसने उसे रोका और वो बोला
00:55अरे हाथी दादा मैं तुझे मेरे साथ रसा कशी करने के लिए चुनोती देता हूँ
01:01क्या तुम प्यार हूँ
01:08मेरे साथ रसा कशी में ठिक पाओगे
01:11ये तुमने सोझ भी कैसे लिया
01:14चलू एक ही पल मैं तुम्हें हरा देता हूँ
01:20ऐसा कहकर हाती ने उसके सुन्द में रस्सी पकड़ ली
01:24और खरगोष की चुनौती स्वीकार कर ली
01:28फिर खरगोष ने उस रस्सी का दूसरा छोर पकड़ा
01:32और खेट के दूसरी तरफ जो ज्जाडी थी वहां जाकर चुक गया
01:37उतने में वहां पर एक हिपो आ गया
01:41खरगोष उसके सामने जाकर खड़ा हो गया और बोला
01:45अरे मेरे दो थिपो मैंने खई प्राणियों से तुम्हारी शक्ती के बारे में सुना है
01:52पर मुझे उनकी मातों पर संदे है
01:55तो मैं तुम्हें मेरे साथ रस्सा कशी करने की चुनौती देता हूँ
02:01तुम मुझे हराऊगे चलू एक ही पल मैं तुम्हें हरा देता हूँ
02:13ऐसा कहकर हिपो ने उसके मुँ में रस्सी पकड़ ली और खरगोष की चुनौती सुवीकार कर ली
02:22फिर खरगोष उस रस्सी के बीचों बीच पहुँच गया और उसने रस्सी को एक जटका दिया
02:29उस जटके से हाथी और हिपो दोनों को संदेज मिल गया के अब खेल शुरू हो गया है
02:36तो दोनों ने अपनी अपनी ताकत लगाई और एक दूसरे को खीचने की कोशिश करने लगे
02:44पर चुकी दोनों हिपो और हाथी पूरी ताकत से रस्सी को खीच रहे थे
02:50रस्सी जमिन पर घिसने लगी और जैसे जैसे वह आगे पीछे होने लगी
02:56वैसे पूरे खेद की जोताई अपने आप हो गई
03:01खरगोश तो यही चाहता था
03:03उसने चलाखी से हिपो और हाथी की ताकत का उपयोग करके खेद को जोता
03:10बाद में उसमें सबजियों के बीज भोए और फसल आने पर पेड़ भर खाने का इंतजाम कर लिया
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