00:00इस कहाणी का नाम है रहसस्यमय तालाब
00:04यह कई साल पहले की कहाणी है
00:07भारत के उत्री भाग में
00:09सिन्ग पुरम नाम का एक राज्जय था
00:12उस राज्ज्य के पास जंगल में एक रहस्यमय तालाब था
00:17और उस तालाब की दूसरी और घीरों की एक सुनरी ख़दान थी
00:23जो हमेंशा चमकती रहती थी
00:26वहाँ जाने के लिए इस रहस्यमे तालाब को पार करके जाना पड़ता था
00:33ऐसे कहते थे कि जो कोई उस तालाब से गुजरता था
00:38तब उस व्यक्ती को ललचाने के लिए
00:41तालाब मेंसे उस व्यक्ती के पसंद की सारी चीजे बाहर आने लगती थी
00:47और एक प्यारी हावास उस व्यक्ति को पुकार थी थी
00:52अरे देखो तुम्हारे पसंद के साथ चीज़े तुम्हें मिल जाएगी
01:00बस थोड़ा जुख जाओ और ले लो तुम्हें जो पसंद है
01:06जितना चाहे उतना ले लो सब तुम्हारा ही है
01:12जैसे ही लालच में आकर वह व्यक्ति झुक कर किसी भी चीस को लेने के लिए हाद पढ़ाता था
01:19तो वह तालाब उस व्यक्ति को खीच लेता था और अपने में निगल लेता था
01:27बहुत लोगों ने हीरो की लालच में बहुत प्रयास के
01:31पर हर व्यक्ती उन वस्तुओं के मोह में फ़स गया
01:35और किसी को भी तालाप के दूसरी और जाने में सफलता ही नहीं मिली थी
01:42उस राज्य के राजा को वह हीरो की ख़दान बहुत आकरशित करती थी
01:48उस ते पूरे राज्य में एलां कर दिया
01:51जो कोई तालाप के उस और जाकर खीरे लेकर आएगा
01:56उसे मन चाहाई राम मिलेगा
02:00लेकिन रहस्यमे तालाप की कुख्याती के वज़से
02:04वहां कोई जाने के लिए तैयार ही नहीं हो रहा था
02:10उस राज्य के गाउ में एक गरीब बूरी आउरत
02:13उसके चक्रधर नाम की ज़वान बेटे के साथ रहती थी
02:17चक्रधर एक स्भूर्दिला ज़वान था
02:20और बहुत खोशियार भी था
02:23उसने राजा की बात सुनकर अपना नसीब आस्माने की ठान ली
02:30अपना भविश्य उजवल करनी के लिए उसके पास ये सबसे बहतरीन मौका था
02:37तो चक्रधर मा का आशिरवात लेकर हीरो की तलाश में निकल गया
02:43जेसे ही वन नाम में बैटकर तालाब के बीच में पहुचा
02:47तो हमेशा की तरह अच्छानक तालाब से बहुत सुन्दर कपड़े, जेवरात सब बाहर आने लगे
02:55पर चक्रधर को पता था की अगर वह उन चीजों की तरह आकरशित हो गया
03:02तो वह फस जाएगा और उसका अंतिम लक्ष कभी साथ्य नहीं होगा
03:09तो उसने उन चीजों को अंदेखा कर दिया और सिर्फ आगे बढ़ता रहा
03:15उस तालाब से फिर बाद में पैसे बाहर आने लगे
03:19फिर उसके बाद उस तालाब से बहुत सारे सोने के सिक्के आने लगे
03:25पर फिर भी चक्रधर ने उसे अंदेखा कर दिया
03:30और अपने लक्ष की तरफ आगे ही बढ़ता रहा
03:34थोड़ी समय बाद उस तालाब से वही प्यारी आवाज उसे पुकारने लगी
03:40हरी, ले लो ना, ले लो साख चीजे तुम्हारी है
03:46तुम जिस हीरों की खोज में जा रहे हो ना
03:49इससे कई ही गुना ये चीजे ले कर तुम अमीर बन जाओगे
03:55तिर क्यों इतना कश्ट उठा रहे हो
03:57आगे गए तो बहुत संक्टथ है
04:01तो समझधारी से काम लो
04:03ये पूरा धन इस नाव में रथ कर वापस लोड़ जाओ
04:08इस में ही तुम्हारी भलाई है
04:11नहीं तो आगे बहुत खत्रा है
04:17चक्रधर वो न पैसे का लालज लुबाता है
04:20न कोई खत्रे का डर
04:22वह अपने लक्ष की और आगे ही बढ़ता रहता है
04:26और तालाब को पार कर लेता है
04:30तालाब के उस पार उसे हीरों की ख़दान मिलती है
04:34और चक्रधर वख़दान से बहुत सारे हीरे नाव में रख कर
04:40राज्य में वापस लौटाता है
04:43राजा उन हीरों को देखकर बहुत खुश हो जाता है
04:46और बोलता है
04:48मवाँ अध्भुत
04:50जो राज्य के शूरी ल्योध्धा नहीं कर पाए
04:53वह तुमने कैसे किया
05:05उस पर चक्रधर ने कहा
05:23चक्रधर की बात सुनकर राजा और भी प्रसंद हो गया
05:27और चक्रधर के साहस, सच्चाई, होशियारी
05:32और सेवा भाव को देख कर
05:35उसे उस राज्य का मंत्री नियुक्त कर लिया
05:39तो बच्चों, इस कहानी से
05:42हमें ये सीख मिलती है
05:44कि हमारे लक्ष से
05:46हमें कभी भी भटकना नहीं चाहिए
05:49और दूसरी बात
05:51दूसरों का जो करे भला
05:53उसका भी होता है भला
06:02प्रस्तुत्र प्रस्तुत्र
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