00:00कहाणी का नाम है धूर्त साप और मुर्ख कवा
00:08बहुत दिन पहले की बात है
00:11एक कवा भोजन की तलाश में यहां वहां उड़ रहा था
00:16उस समय बहुत ठंड पड़ी थी
00:19और ठंडी ठंडी उत्तरी हवाएं चल रही थी
00:23फिर भी वह कवा उस ठंड के मौसम में भी भोजन की तलाश में उड़ रहा था
00:29उसे तो बहुत भूक लगी थी
00:32और अचानक समीन पर एक साप को गुडी मुडी होकर पड़ा हुआ देखा
00:40जरासल बहुत ठंड होने की कारण वह साप शानती से सूरच की उश्ण किरनों से अपना शरीर सेख रहा था
00:50उस अचलीद साप को देखकर कवा खुश हुआ और अपनी आप से बोला
00:59अरे बहुत अरे बहुत मुझे तो मेरा भोजन मिल गया
01:03मैं इस साप को खा जाता हूँ कितना स्वादिश्ट होगा इस साप का मास
01:09ऐसे सोचकर वह कवा धावा मार कर नीचे आ गया
01:15और साप के नस्दीक उसके पूच के पास जाकर बैठ गया
01:21उसने सोचा कि वह उस मरे हुए साप को अपने पंजो में उठाकर एक शांत जगा ले जाएगा
01:29और उसके टुकडे टुकडे करके आराम से उसका स्वादिश्ट भोजन पूरा कर देगा
01:38पर साप भी बहुत होशियार था
01:41उससे मालूम था कि कववा नस्दीक आकर बैठा है
01:45पर क्यूकि वहाँ दूर था और पूच की तरफ बैठा था
01:50तो साप वैसे ही मरने का अभिने करके शान पडा रहा
01:56वह जरा अभी नहीं हिला
01:58कववा जैसे ही और नस्दीक आया
02:02और साप के मूँ के पास बैठकर उसे उठाने के लिए जुख गया
02:08तो अजानक साप जग गया और उसने अपना सर जट से उठाया
02:13और उसके मूँ से विशकी फिचकारी उस कववे के चेहरे पर फुहार दी
02:20वह साप बहुत जहरीला था
02:24उस विशके फुहारे से कववा जट पटाने लगा
02:28और वह कववा जट पटाते हुए बोला
02:48ऐसा कहकर कववे ने दम दोड दिया
02:53इस तरह साप के होशियारी के वज़ासे
02:57और कववे की मूर्खता के वज़ासे
03:00साप शिकार बनने के बजाए शिकारी बन गया
03:04और बाजी पलट दि
03:07तो कहानी का तातपरिया ये है
03:11कि हमें हमेंशा सावधान रहना चाहिए
03:15और दुसरों का दम अपनी होशियारी से परख लेना चाहिए
Comments