00:10खुशाम दीद
00:10आज के इस मालुमाती जाइजे में हम एक ऐसी छुपीवी आलमी जराई ताकत की सेर करेंगे
00:15जो बजाहिर तो हमारी नजरों से ओजल रहती है
00:18लेकिन इसका असर पूरी दुनिया पर है
00:20जरा सोचिए एक ऐसी जगा जिसने अपनी मट्टी की रंगत को ही एक आलमी पहचान बना लिया है
00:25और दुनिया भर के खानों में अपना मुनफरिद जाइका शामिल किया है
00:28तो क्या गभी ये सवाल जहन में आया है
00:31कि एजिया की सबसे बड़ी लाल मिर्च की मार्किट आखिर कहा है
00:35इसका जवाब एक इंतहाई सादा और छोटे से कजबे में चुपाए
00:39एक ऐसा कजबा जो बजाहिर तो बिलकुल आमसा नज़र आता है
00:42लेकिन सच तो ये है कि इस वक्त ये पूरी दुनिया की मसालों की मार्किट को चला रहा है
00:47हैरान को ने ना
00:48इस मालूमादी सफर के पांच एहम हिस्सें
00:51पहला एशिया का सुर्ख मिर्चों का दारुल हकूमत
00:54दूसरा सदियों पर महीत उसकी पोशीदा तारीख
00:57तीसरा अकायत का हसीन इम्तजाच
01:00चौथा मसालों की मौाशियाद
01:02और आखिर में बात करेंगे मस्तक्बिल को दरपेश चालेंजस पर
01:05तो फिर आईए पहले इसे की तरफ बढ़ते हैं
01:09हिस्सा एक एशिया का सुर्ख मिर्चों का दारुल हकूमत
01:12यानी कुन्री की मसालों की सल्तनत का हैरान कुन पे माना
01:16सुबस इनके एक छोटे से तहसील टाउन ने जरात के मैदान में
01:19ऐसी बुलंदियों को छुआ है
01:20जिसकी मिसाल मिलना वाकी मुश्किल है
01:22जिला उमर कोड का ये सादा सा कस्वा
01:24इतनी बड़ी जरे बाला दस्ती आखिर कैसे हासिल कर चुका है
01:28पचासी फीसद?
01:29जी हाँ, ये कोई आम सा नंबर बिलकुल नहीं है
01:32पूरे पाकिस्तान में पैदा होने वाली कुल लाल मिर्च का पचासी फीसद इसा
01:36सिर्फ और सिर्फ इसी एक तहसील यानि कुन्री से आता है
01:39जरा तसवर करें, एक अकेली जगा पूरे मुल्की जरे पैदावार का इतना बड़ा हिस्सा फराम कर रही है
01:45अब सवाल ये पैदा होता है कि आखिर यहां की पैदावार में ऐसी क्या खास बात है
01:49खिर इसकी सबसे बड़ी वज़ा है डंडी कट मिर्च
01:52ये एक खास गोल शकल की लाल मिर्च है जो अपने मुन्फरिज जाइके की वज़ा से पूरी दुनिया और खास
01:58तोर पर अरब और यूर्पी मार्केटों में बेहद पसंद की जाती है
02:01और हाँ आजकल इसके साथ साथ एक लंबी हाइब्रिड मिच भी यहां काफी कसरत से हुगाई जाने लगी है
02:07इस मार्केट के फैलाओ और मौशी एहमियंत का अंदाजा जरा इन आदादों शुमार से लगाई है
02:11हर साल एक लाग से सवा लाग मेट्रिक टन की पैदावार
02:15और जब सीजन अपने उलूच पर होता है न तो रोजाना पंदरा से बीस हजार भोरियों की तरसील होती है
02:20और सबसे एहम बात ये है कि इस पूरी कम्यूनिटी के पंदरा हजार किसान खांदानों की रोजी रोटी मुकमल तोर
02:26पर इसी एक फसल से जुड़ी हुई है
02:28अब चलते हैं हिस्सा दो की जानिब
02:30सदियों पर मुहीत पोशीदा तारीख
02:32मुगल शेंशाओं से लेकर रेलवे के खंडरात तक
02:35जिला उमर कोट की इस शांदार जरे काम्याबी के पीछे दरसल एक बहुत गहरी तारीख चुपी है
02:40आईए जरा माजी के जहरोकों में जहांकर इस कजबे के इर्थका को समझने की कोशिश करते हैं
02:45इस इलाके की कहानी शुरू होती है 1226 में सोड़ा खांदान की हुक्मरानी से फिर 1542 में बिलकुल ये वही
02:52जगा है जहां मुस्तक्बिल के मुगल बाच्चा अकबर की पैदाईश हुई
02:54इसके बाद 1935 में कुनरी का रेलवे स्टेशन तामीर हुआ
02:58लेकिन सबसे दिल्चस्प मुड़ता बाया जब 1960 में राधा राम से मिर्च के बीजी हाल आये गए
03:04और बस फिर ये कदीम तारीखी जमीन एक जदीन जरही मरकज में तबदील हो गई
03:09लेकिन एक तरफ जहां जरात आसमान की बुलंदियों को चू रही है
03:12वहीं बुन्यादी धांचे का हाल बिलकुल मुक्तलिफ है
03:14जरा इस तस्वीर को देखिए
03:161935 में बनने वाला कनरी का रेलवे स्टेशन जो 1996 तक इस इलाके की लाइफ लाइफ लाइन था
03:22आज एक लावारिस खंडर बन चुका है
03:24इसकी पठड़ियां दा कुखड चुकी है
03:26ये आज की फलती फूलती मार्केट और तबाह हाल इंफ्रस्ट्रक्चर का एक इंतहाई वाज़े और हैरान कुन मवाजना है
03:38देखिए कोई भी जगा सिर्फ फसलों और इमारतों से नहीं बनती
03:42बलके वो बनती है वहां बसने वाले लोगों से
03:44और किन्री का ये माशरती ताना बाना वाकई इंतहाई मुनफरिद और खुबसूरत है
03:49अब जरा इन आदादों शुमार पर गोर करें
03:51आबादियाती लिहाज से एक इंतहाई दिल्चस्प हकीकत ये है
03:54कि पाकिस्तान जैसे मुस्लिम अक्सरियती मुलक में कनरी एक हिंदू अक्सरियती लागा है
03:59यहां तक्रीबन 56 फीसद हिंदू और 42 फीसद मुसल्मान आवाद हैं
04:03यह महद नंबर्स नहीं है
04:04बलके यह एक ऐसी शांदार कम्यूनिटी की निशानदा ही करते हैं
04:07जो अपने बैनलमजाहिब इत्तिहात के लिए पूरे मुलक में जानी जाती है
04:10एक मकामी रहाइशी का ये जुमला इन तमाम शुमारियात को एक जीती जागती इनसानी शकल दी देता है
04:16कि शहर चोटा जरूर है लेकिन यहां के लोग बहुत खुबसूरत है
04:20अगर आप यहां के बाजारों के रुख करें तो आपको रिवायती चूड़िया नज़र आएंगी
04:24जो हिंदू खवातीन बनाती भी हैं और सकाफत के तौर पर पहनती भी हैं
04:27यह लोग रोजमर्रा के दुख सुख में एक दूसरे का बिलकुल एक खंदान की तरह साथ देते हैं
04:33इस हमाहंगी की एक और बेहतरीन मिसाल कुन्री क्रिस्चिन अस्पताल है
04:37मालू मैं यह अस्पताल कभी एक चलता फिरता मुबाइल कारवा हुआ करता था
04:41पिर 1975 में इसने कुन्री में अपना मुस्तकिल ठिकाना बना लिया
04:45और आज आज ये इस मतनवो कम्यूनिटी और थर के वसी सहराई इलागों के लिए
04:50सहत और आंकों के इलाज की एक इंतहाई एहम और बन्यादी जरूरत बन चुका है
04:54हिस्सा चार मसालों की मौशियात
04:57सुर्ख सोना उगाने के कारोबार का जाइजा
04:59अच्छा तो अब जरा माइक्रो एकनॉमिक्स की तरफ आते हैं
05:02और देखते हैं के इन किसान खादानों के लिए ये पूरा कारोबारी पहिया आखिर गूमता कैसे है
05:08खेट से मार्केट तक का इस सफर कोई आसान काम नहीं है
05:11ये इनतहाई मेहनत अलाव है
05:12ताजा फसल को चुनना फिर उने बोरियों में भरना धूप में सुखाना
05:16और आखिर में थोक मार्केट के लिए च्छंटी और सफाई करना
05:19इस पूरे कठन अमल में मकामी खवातीन का किरदार इंतहाई एहम होता है
05:23जो फसल की कठाई के बाद की इस मुश्किल तरीन मैनेजमेंट को बहुभी संभालती है
05:28जराई तहकी के आदादो शमार से हमें अखराजात का बहुभी अंदाजा लगा सकते हैं
05:33किसानों को परदार करना पड़ते हैं इस फेरिस पर एक नज़र डालें
05:37बीज, खाद और पानी के अखराजात अपनी जगा लेकिन सबसे बड़ा खर्चा मैनेजमेंट का हैं
05:42जिसमें मजदूरी और सिखाने का आमल शामिल है
05:44ये खाद और दीगर जराई मदाखिल ही हैं जो इस फसल की असल लागत को इतना बढ़ा देते हैं
05:49तो असल मुंदा ये है कि इतनी मेहनत के बाद किसानों को बचता क्या है
05:53फी एकर तकरीबन एक लाग रुपे की कुल लागत की मुकाबले में लगभग एक लाग तेरासी अजार रुपे तक की
05:59आमदनी होती है
06:00और यही वो शांदार मुनाफ़ा है जिसने इस फसल को मकामी मैशत की रीड की अड़ी बना दिया है
06:05बिल्कुल यही वो कशिश है जिसकी वज़े से नसल दर नसल खांदान इस महनत अलब काम से खुशी खुशी जुड़े
06:11हुए है
06:12अब आते हैं अपने आखरी हिस्से की तरफ
06:13हिस्सा पांच मुस्तक्बिल को दरपेश चालेंजिस
06:16मिर्च की फसल और रोजमर्रा की जिन्दगी पर मुडलाते खतरात
06:19जहां एक तरफ हमने इतनी माली काम्याबियों का जिकर किया
06:23वही हमें आज की इंतल खकीकतों और महुलियाती खतरात को भी देखना होगा
06:26जो अब कुंदरी की खुशाली के लिए एक संगीन चैलेंज बनते जा रहे हैं
06:30मौसमियाती तबदीलियों और दबाओ की वज़ा से पिछले सिर्फ 5 सालों में
06:34यहां की पैदावार में 30 से 40 वीसद तक की बड़ी कमी वाके हुई है
06:38मट्टी में फॉस्फोलिस जैसे आहा मनासर की शदीद कमी है
06:41और सबसे बड़ा तजाद देखिए
06:43इतनी बड़ी जर्य पैदावार वाले शहर में पीने के साफ पानी की शदीद किल्लत है
06:48लोग आज भी 20 रुपे फी गैलन के हिसाब से गदागाडियों से पीने का पानी खरीदने पर मजबूर है
06:53और जब हम इन बड़े मौशी आदादों शुमार को एक आम शहरी की रोजमरा जिन्दगी से जोड़ते हैं
06:58तो एक बिलकुल मुख्तरिफ तस्वीरों भरकर सामने आती है
07:01जरा सोचिए जहां मार्केट में करोडों का कारोबार हो रहा है
07:04वहीं एक मकामी मेकैनिक सारा दिन काम करके बमुश्किल डेर सो से दो सो रुपे कमाता है
07:09और तीस बरसों से मेहनत करने वाला पापड फरोश रोजाना बमुश्किल चार से पांच सो रुपे बना पाता है
07:15ये मौशी अदम तवाजन वाकई जिन्दगी की एक इंतहाई सक्थ खीकत है
07:19ये तमाम हकाइक हमें वाकई एक बहुत गहरी सोच में मुपतला कर देते हैं
07:24इस मालूमाती सफर की एक खताम पर जो सबसे एहम सवाल जैनों में गुंचता है
07:28वो ये है कि क्या हमाहंगी और तारीक की एरोशन अलामत
07:31इन बदलते हुए महोलियाती और माशी हालात का काम्यावी से मुकाबला कर पाएगी
07:35या फिर ये सुर्ख सोना भी वक्क की धूल में कहीं गुम हो जाएगा
07:39ये कैसा सवाल है जो यकिनन हम सब को सोचने पर मजबूर कर देता है