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جنگ شاہی سندھ کا ایک قدیم اور تاریخی قصبہ ہے، جو اپنی منفرد تاریخ، ثقافتی روایات، قدیم ریلوے اسٹیشن، پتھر کی تراش خراش اور مشہور مٹھائی بالو شاہی کے باعث ایک خاص پہچان رکھتا ہے۔

اس خصوصی ویڈیو میں ہم آپ کو سندھ کے تاریخی قصبے جنگ شاہی کی سیر کروائیں گے، جہاں قدرتی حسن، پہاڑی مناظر اور قیمتی پتھروں کی موجودگی اس علاقے کی اہمیت کو مزید بڑھاتی ہے۔ یہاں سے حاصل ہونے والے مختلف اقسام کے پتھر تعمیرات اور دیگر کاموں میں استعمال ہوتے ہیں۔

جنگ شاہی کے قریبی علاقوں میں ہالیجی جھیل جیسی اہم قدرتی آبی پناہ گاہ بھی موجود ہے، جو مختلف اقسام کے پرندوں کے لیے ایک محفوظ مسکن ہے۔ اس علاقے کی تاریخ سیاسی اور سماجی تحریکوں سے بھی جڑی ہوئی ہے، جہاں رسول بخش پلیجو جیسی نامور شخصیات کا ذکر سندھ کی جدوجہد اور تاریخ کا اہم حصہ ہے۔

آئیے دیکھتے ہیں جنگ شاہی کی تاریخ، ثقافت، مشہور سوغات، قدرتی وسائل اور تاریخی ورثے پر مبنی یہ دلچسپ رپورٹ۔

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00:00इस नई एक्स्प्लेनर में हम सिंध के एक ऐसे कस्पे की बात करेंगे जो बजाहिर तो बहुत खामोर सा है
00:05लेकिन उसके अंदर सदियों की तारीक छुपी है जी हाँ हम बात कर रहे हैं जंग शाही की एक ऐसी
00:11जगा जो रिवायती हुनर और एक बहुती खास माहोलियाती एहम
00:28है क्या ये बस रास्ते में आने वाला एक आमसा कस्पा है या फिर इस खामोशी के पीछे कोई बहुत
00:34ही शांदार कहानी मौजूद है तो इस सफर का रोड मैप कुछ यू होगा हम उसकी एक पुराने तारीही जंक्शन
00:40से शिरुआत करेंगे फिर वहां के पत्थर तराशनी
00:42के फन को देखेंगे कुछ रिवायती मीठे का जिकर होगा हलाजी जील की वायल लाइफ पर बात करेंगे और आखिर
00:49में देखेंगे कि जदीब जंक्शाही का मुस्तक्बिल कैसा नजर आता है तो सबसे पहले बात करते हैं एक फरामोश शुदा
00:55तारीही जंक्शन की और इस
01:10लाइन वन पर बनने वाले स्टेशन ने इस चोटे से इलाके को पूरे बरे सगीर से जोडने में एक बहुत
01:15यहम किरदार अदा किया था और अगर बरतानवी एंजिनियरिंग की बात करें तो यहां एक ऐसा शाकार आज भी मौजूद
01:21है जो वाकई हैरान कर देता है ट्रैक्
01:37अगर माजी और हाल का मवाजना करें तो एक बहुत बड़ा फर्क नजर आता है एक वक्त था जब यह
01:42स्टेशन एक मस्रूफ तिजारती मरकस था यहां से हाली जी जील की मचली और मकामी दूद बरी मिकदार में लाहौर
01:49और कराची जाता था लेकिन आज आज आज यह बस ए
02:06इर्दगिर्द के पहाड किस तरह इस कष्बे की महिशत को चलाते हैं यह पूरा कष्बब ऐसे पहाड़ों में घिरा है
02:12जो माधनियाद से माला माल हैं मदब यहाँ सैंस्टोन मिलेगा शीशे के तायारी के लिए Silika मिलेगा और कॉस्मेटिक्स में
02:19इस्तमाल होने वाला Lime st
02:20साथ ही जिपसम और फ्लिंस्टोन भी मौझूद हैं। और यह कोई आम फ्लिंस्टोन नहीं है। यह बिलकुल वही पत्थर है
02:26जिसे पंदरमी सदी में मकली हिल्स के किलों को मजबूत बनाने के लिए इस्तमाल किया गया था। तो यह कहना
02:32गलत नहीं होगा कि यह महस पत्थर �
02:34बलकि तारीख के मेमार है। और इसी के करीब जंपीर के अलाके में अगर देखें तो अंदाजन 25 मिलियन यानि
02:41धाई करोड मेट्रिक टन कोईले की जखायर मौझूद है। यह एक बहुत बड़ा नंबर है। फिलहाल यहां से सालाना 20
02:47,000 टन कोईला निकाला जा रहा है। ज
03:03एक आयलगर, मकामी, कौट साइट और ग्रेनाइट के पत्थरों को इतनी महारत और बारिक बीनी से तराशते हैं कि अकल
03:09दंग रह चाती है। दरसल यह सिर्फ एक रोजमरा का औजार नहीं बलकि सदियों पुराने फन का एक जिन्दा सबूत
03:15है। चलें, अब पत्थरों से �
03:17कर जरा तारीख के मीठे जाएके की तरफ चलते हैं। जंग शाही के मकामी शाही बाजार में दाखिल होते ही
03:23जो चीज़ सबसे ज़्यादा तवज़ा खेंचती है, वो है यहां की मशूर बालु शाही। कहा जाता है कि यह एक
03:28ऐसी मिठाई है जिसने कभी आखरी मोगल बा�
03:45जाते हैं कि यह मूँ में घुल जाने वाली खास मिठाई जंग शाही से ही आई है। अब यह मिठाई
03:51बंती कैसे है, यह प्रोसेस में बड़ा दिलचस्प है। आटा गून कर उसे पंदरा मिनट छोड़ दिया जाता है, फिर
03:57उसकी कमसकम दस तहें बनाकर उसे पूरे तीस म
04:12मिठ बोया जाता है। और बस यही वो चीज है जो इसे एक सचा शाही जायका देती है। मिठाईयों के
04:18बाद जरा रुख करते हैं फितरत का। बात हो रही है हाली जी जील वाइल लाइफ सैंक्चरी की। यह पानी
04:25का एक बहुत ही बड़ा जखीरा है जो ठट्टा से तकरी�
04:2824 किलोमेटर के फासले पर मौजूद है। इस जील की हिस्ट्री बड़ी हैरान कुन है। 1930 की दिहाई में जब
04:35दूसरी जंगे अजीम चल रही थी तो बरतानवी फोज ने उसे पानी की सप्लाई के लिए बनाया था। लेकिन फिर
04:401972 में इसे बाकाइदा वाइल लाइफ सैंक्
04:55कमाल है। लेकिन एक मिनट जील की इस पुर्च सकून सता को देखकर धोका मत खाईएगा। इस पानी के नीचे
05:02मगर मच बसने हैं। इसे लिए यहां बोटिंग करने की बिलकुल इजासत नहीं है। वाइल लाइफ बॉर्डन का भी यही
05:07कहना है कि उनकी सबसे बड़ी जिम
05:23जंग शाही की कि आजकल उसके क्या हालात हैं और मुस्तक्बिल के हवाले से क्या इमकानात मौजूद हैं। देखिए ऐसा
05:30नहीं है कि यहां जिन्दगी रुग गई है। जंग शाही में बुनियादी सहूलियात बिलकुल मौजूद है। एक रूरल हेल्स सेंटर
05:36है जो एमर
05:49पुश्किल 15-20 पारसल ही आते जाते हैं और एक पुरानी धर्म शाला जो तकसीम से पहले हिंदू यात्रियों के
05:55लिए बनाए गई थी और बिलकुल वीरान पड़ी है। लेकिन इन तमाम चीजों के बीच एक बहुत ही जबरदस्त और
06:01पॉजिटिव तबदीली भी आ रही ह
06:03मौाशी जमूत को तोड़ने के लिए रिहान फाउंडेशन जैसे एतारे यहां डिजिटल लिटरिसी पर काम कर रहे हैं। वो मकामी
06:09लोगों को स्मार्ट फोन्स और इंटरनेट का इस्तमाल से खा रहे हैं। और इसका मकसद क्या है? मकसद यह है
06:14कि ये लोग अपने हुनर को
06:15अपनी इस शांदार बालू शाही और पत्थर के काम को सिर्फ जंग शाही तक महदूद ना रखें बलके पूरी दुन्या
06:21के सामने लेकर आएं। और ये सब देखकर एक बहुत ही एहम सवाल जहन में उभरता है कि अगर डिजिटल
06:27लिटरिसी और कल्ट्रल टूरिजम को सही
06:30मानों में इस्तमाल किया जाए तो क्या हम दुनिया भर के ऐसे हजारों फरा मोश शुदा कजबों की तक्दीर नहीं
06:36बदल सकते हैं। जंग शाही तो सिर्फ एक मिसाल है। दुनिया में ऐसी बेशुमार जगे हैं जिनके अंदर जबरदस्त, मौशी
06:42और सकाफती टालेंट �
06:43चुपाए। बस देर है तो उन्हें दर्याफ्त करने और दुनिया से जोडने की। क्या हम ये कर पाएंगे। ये एक
06:49ऐसा सवाल है जिस पर जरूर सोचना चाहिए।

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