00:09आज के इस तज्जिये में खुशाम अदीद
00:12आज हम सिंध की उन तेहदार और पुर इसरार कहानियों को खोलने वाले हैं जिनोंने इस धर्ती को एक अनुखा
00:18रूप दिया है
00:18हम एक ऐसी जमीन के बारे में बात करेंगे जहां की हर एंट और हर पहाड़ी का अपना एक अलग
00:24ही राज है
00:25यहां सदियों की तारीख, अकाइद और अफसाने इस तरहां आपस में गुंदे हुए हैं कि बास वकात हकीकत और मित
00:32में फर्क करना मुश्किल हो जाता है
00:33तो चलिए, शुरू करते हैं
00:36अब सरा इस बात पर कोर कीजिए
00:38एक कदीम लाइट हाउस, इनसानी खोन पीने वाला एक खौफनाक चादुकर
00:43और आठवी सदी की एक अजीम फता
00:45अब सोच रहे होंगे ना कि इन तीनों में आखिर क्या मताबकत हो सकती है
00:49यकीन मानिये, यही सवाल इस पूरी पहेली की बुनियाद है
00:53ये एक ऐसा खिता हैं जिसे ना सिर्फ अजीम फातिहीन ने तश्कील दिया
00:56बलकि यहां की तिलिसमाती कहानियों ने भी इसे एक नई पहचान दी
01:00आज हम हकीकत और अफसाने के इसी अनोखे मिलाब की गहराईयों में जाएंगे
01:04तो चलिए, सीधा इस मौामे में उतरते हैं
01:07पहला हिसा पीर पत्थू का स्रार
01:10ये हमारी इन्वेस्टिगेशन का पहला मकाम है
01:12जो जिला थट्टा की एक छोटी सी पहाडी पर मौजूद है
01:16सालों तक ये जगें बिलकुल लोगों की नजरों से ओजहल रही
01:19फिर साल 2016 में सिंध इंडाउमेंट फंट ट्रस्ट ने
01:2345 फुट उंची और 65 फुट गोलाई वाली पत्थर की वाच्च टावर को
01:27वापिस उसकी असली हालत में बहाल किया
01:30पीर पठों के कस्पे में खड़ी इमारत अच्छानक एक बार फिर सबकी तवजों का मरकज बन गई
01:35लेकिन मसला ये है कि इस इमारत की असल तारीख पर अब भी काफी बहस जा रही है
01:40एक तरफ कुछ मकामी लोगों का बड़ा बुखता यकीन है कि ये कदीम दो महराब वाली मस्जद का एक मीनार
01:46था
01:46जबकि दूसरी तरफ माहिरीन का ख्याल थोड़ा मुक्तलिफ है
01:49उनके मताबिक ये किसी मस्जद का मीनार नहीं बलके कदीम बंदरगा दीबल के बहरी जहाजों को रास्ता दिखाने वाला एक
01:56नाविगेशनल लाइट हाउस था
01:57अब जरा रुख करते हैं कहानियों का
02:00दूसरा हिस्सा आदम खोर जादुकर की दास्तान
02:03हम बात करेंगे बारवी सदी की उन खोफनाक और दिर्चस्प कहानियों की जो इसी पहाड़ी के इर्द गिर्द खुमती है
02:09इन कहानियों का सबसे मेन और खोफनाक इर्दार है सादिक सामी नाम का एक जादुकर
02:15कहा जाता है कि ये शख्स लोगों को कम्प्लीटली हिपनोराइज करके अपने मेलों में बुलाता था
02:20हर जुम्मे को ये मेला सच था और वहाँ वो किसी एक बदनसीब को मार कर उसका खुन पीजाता था
02:25देखा जाए तो आज के मेयार के हिसाब से उसे एक देश्चत गर्थी समझा जाएगा जिसका खौफ उस वक्त पूरे
02:30इलाके में पहला हुआ था
02:32इस जालिम जादुकर से निपटने के लिए मुकामी लोगों ने पीर पठो नाम की एक नेक शक्स से मदद मागी
02:37अब यहां रिवायत बताती है कि पीर पठो ने एक लंबा सफर शरू किया उन्होंने दर्याए सिन से चार पला
02:44मचलियां पकणी और उन्हीं लेकर पूरे चालीस दिन का सफर करके जुनागर पहुँचे
02:48वहां उनकी मुलाकात एक बुजर्ग हजद सखी जमील शाद अतार से हुई जिनने उन्होंने इस जादूगर के खिलाफ मदद के
02:54लिए राजी कर लिया
02:55और इस दास्तान का क्लाइमैक्स वाकई है रतंगेस है
02:59सोचे चालीस दिन बाद भी वो पल्ला मचलियां बिल्कुल ताजा रही ये अपने आप में एक बड़ा मौटसा था
03:04फिर जब वो बुजर्ग वहां पहुँचे तो उन्होंने उस खौफनाग जादूगर का सामना किया
03:08और उसे बस एक पत्थर में तबदील कर दिया
03:11सुनने में आता है कि बाद में उस पत्थर को धर पारकर के सहरा में भीक दिया गया
03:15ताकि ये धर्ती हमीशा के लिए आफ़त से पाख हो जाए
03:18अब यहां जो सबसे दिल्चस्प बात है ना
03:21वो ये है कि हम अब मिट से निकल कर हकाइक की तरह आएंगे
03:25तीसरा हिस्सा तारीखी हकाइक पर से परदा उठाना
03:29तिलिसमाती कहानियों से हटकर अगर हम जोगरफी और फैक्ट्स की बात करें
03:33तो कुदरत ने यहां खुद एक बड़ा किरदार अदा किया है
03:36दरियाए सिंध का अपना रास्ता बदलना
03:38सतरवी सदी का वो तबाक उन्जल्जला जिसमें पचास हजार लोग मारे गए
03:42और हाली में आने वाले दो हजार दस के सहलाब
03:44इन सब कुदरती आफातों ने फिजिकल रेकर्ड्स को मिटा दिया
03:48और होता यह है कि जब मादी शवाहित मिट जाते हैं
03:50तो वो खाली जगा कहानिया और अफसाने ले लेते हैं
03:54हिस्ट्री की तरफ लोटें तो उम्मयद्स का इस इस इलाके से बहुत गहरा कनेक्शन है
03:58अवामी सता पर इस टावर को अरब जनरल मुहम्मद बिन कासिम से जोड़ा जाता है
04:03जिनकी सिंध की फता का दोर साल 708 से 711 तक था
04:07ये माना जाता है कि उनकी आमद के बाद यहां एक इंतहाई एहम मरकज काईम किया गया था
04:13मुकदस मकामात और उनका जोगराफिया इखाका
04:16यहां हम देखेंगे कि ये जमीन सदियों में किस तरह बतली
04:19जब नए आने वालों ने पहले से मौजूद रिवायात पर अपनी चाप छोड़ी
04:23ये देखना वाकी कमाल है कि यहां अकाईद किस तरह उवरलैब करते थे
04:27जो अब्तदाई सूफी बुजर्ग थे उन्हें इसलाम से पहले की रिवायात के साथ भी कम्प्लीटली मुंसलिक किया जाता था
04:33एक्जाम्पल के तौर पर हिंदू पेरोकार पीर पाठो को राजा गोपी चंद के नाम से जानते थे
04:38ये बताता है कि इस जगा की रुहानी एहमियत किसी एक तहजीब या अकाइद तक महदूद नहीं थी बलके मुसलसल
04:45इवॉल्व हो रही थी
04:46और ये चीज इस बात की बहतरीन मिसाल है बुकेरा शरीफ की ये खुबसूरत कई गुमबदों वाले सुरावर्दी मजारात
04:52ये जाहिर करता है कि आर्किटेक्चर किस तरह एक आम महौल को एक रुहानी और टैंजिबल सेक्रिड लैंसकेप में बदल
04:58देता है
05:00माहिरिंग की मुताबिक कोई जगा सिर्फ इंटों या पत्थरों की वज़े से मुकदस नहीं होती
05:04असल चीज होती है इजत्माई यादाश्ट यानि लोगों की कलेक्टिव मेमरी
05:08ये कहानिया, अकाइद और तज़्जरबात का एक पूरा नेट्वर्क होता है जो नसलन बाद नसलन मुंतकिल होता है
05:15और किसी भी धर्ती की मुकदस हैसियत को हमेशा के लिए जिन्दा रखता है
05:19सुरावर्दी सूफी नेटवर्क की तौसी
05:21यहां हम तज्जिया करेंगे कि इन रुहानी मराकिस को किस तरहां बाकाइदा मनसूबा बंदी के तहट पहलाया गया
05:28दरसल इन मराकिस का पहलाओ बिलकुल भी रैंडम नहीं था
05:31शेख बहाउदीन जखरिया के खानदान की अफराद ने मुलतान से जो अपना सफर शुरू किया
05:36उन्होंने डिलिबरिटली सिंध के उन इलाकों का इंतखाब किया
05:39जो तिजारत और जराद के हवाले से नहायत एहम और प्राइम रूट्स थे
05:42ये एक प्रॉपर स्ट्रिटीजिक प्लानिंग थी ताकि आम अवाम के साथ रुहानी और मौशी कनेक्शन मजबूत किया जा सके
05:501544 में मख्तूम पीर फाजल शाह कालान जैसी बासर शक्सियात की आमद ने बुकेरा शरीफ को इस तेजी से पहलते
05:57हुए
05:57सोरावर्दी नेटवक का एक नहायत एहम नोट बना दिया
06:00यह जगें सिर्फ अबादत के लिए नहीं थी बलके इस पूरे पावर्फुल नेटवर्क के वाइटल सेंटर्स बन गई थी
06:06यहां यह पॉइंट बहुत ही मजएका है कि कहानियों के अंदर तारीख कैसे छुपी होती है
06:10मिसाल के तौर पर वो मशूर कहानी के शेख बनू को हिदायत मिली थी के वहां जाकर बसीरा करें जहां
06:16उन्हें मच्छी और जौव मिले
06:17सुनने में एक तिलिसमाती इशारा लगता है ना लेकिन हिस्टरी की नजर से देखें
06:22तो मच्छी और जौव असल में कुशहाल, जर्केस और एहम माशी मरकज की निशानी थी
06:26उस वक्त के हिसाब से ये एक परफेक्ट एकनॉमिक लोकेशन थी
06:29तो इस तज़िये को खत्म करते हुए मैं आपके दिमाग में एक एहम सवाल छोड़ कर जाना चाहता हूँ
06:36हमारे इर्द के इर्द इन खामोश पहाड़ियों और दिखने में आम सी मारतों की पीछे
06:41और कितने ही कदीम रास चुपे हुए हैं जो सामने आने के मुनतजर हैं
06:45ये धर्ती और इस पर काईम मारतें सिर्फ मटी और पत्थर नहीं हैं
06:50बलके सदियों के राजों को अपने अंदर समेटे हुए हैं
06:53शायद अगली मरतबा जब आप ऐसी किसी जगा से गुजरें
06:56तो वहां की खामोशी में छुपी तारीख की आवाजें आपको भी सुनाई देने लगें
07:20झाल
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