00:09आज के इस नए और दिल्चस्प चाइजे में हम एक इंतहाई शानदार और मुन्फरिद सफर पर निकलने वाले हैं
00:15एक ऐसा सफर जो बजाहर स्याहों की नजरों से ओजहल, खुबसूरत सहराई रेट की टीलों से शुरू होता है
00:21लेकिन गहराई में जाएं तो ये बलोचिस्तान की माहिगीरी की सनत के एक बहुत बड़े और पोशीदा मौशी इंजन तक
00:28जा पहुचता है
00:28ये जानकर वाकई हैरानी होती है कि जो जगा उपर से सिर्फ एक खामोश और दिल्फरेब सियाहती मकाम लगती है
00:35वो दरहकीकत कितनी बड़ी मैशत का मरकज है
00:37तो चलिए मिलकर इन हकाई की गहराई तक जाते हैं और इस पूरे मनजर नामे को तफसील से समझते है
00:43इस जाइजे में हम जिन पहलियों का इहाता करेंगे
00:47उनमें सबसे पहले डाम के सहरा की दर्याफ शामिल है
00:50फिर वो मकाम जहां रेच समंदर से मिलती है
00:52इसके बाद साहिली माहीगीरी की मैशत का तज्जिया
00:55पानियों में मौझूद बड़े चालेंजिस पर गुफ्तगू
00:58और आखिर में खितने की सलाहियोतों से भरपूर फायदा उठाने की तरीकों पर बात होगी
01:02तो शुरुवात करते हैं पहले हिस्से से
01:05यानि डाम के सहरा की दर्याफ्त और बलोचिस्तान के छुपे हुए खजाने का सफर
01:10ये एक ऐसी जगा तक पहुंचनी की मुहिम जोई है जिसे अब तक बहुत कम लोगों ने देखा है
01:16ये दुबई नहीं है ये डाम का सहराई साहिल है
01:19ये चुमला एक सयाह के व्लॉग से लिया गया है
01:22और सच मानिये इसे सुनते ही इनसान का तखयूल फौरण इस जानेब खिच जाता है
01:26पहली नजर में ये बिलकुल दुबई के मशूर रेत की टीलों जैसा मनजर पेश करता है
01:30लेकिन हकीकत में ये बलोचिस्तान के साहिल पर वाकिया एक छुपा हुआ खुद्रती खजाना है
01:36आईए देखते हैं कि वहां तक पहुंचने का ये रास्ता कैसा है
01:39कराची से इस मुकाम का फासला तकरीबन 140 किलोमेटर बनता है
01:43ये सफर हब टोल्ट से होते हुए वंदर शहर तक जाता है
01:47यहां एक बड़ी दिल्चस बात ये है कि पुराने रास्ते पर एक सिक्यॉरिटी चेक पोस्ट मौजूद है
01:51जो पिछले 45 सालों से आम पबलिक के लिए बंद है
01:55इसकी वज़ा से मुसाफरों को एक तवील अरसे से खुश्क पड़ी सरंडा जील के बंजर और कचे रास्ते से गुजर
02:00कर जाना पड़ता है
02:01ये रास्ता बजाते खुद एक हकीकी मोहिम जोई का जबरदस्त एहसास देलाता है
02:06अगला मरहला है वहां पोहंचना जहां रेट समंदर से मिलती है
02:10यानि एक चमकतार सुनेहरी साहली पटी
02:13वहां के हिस्सी तज्जुर्बे को अगर अलफास में बयान किया जाए तो कुछ यू होगा
02:18इंतहाई तेज चलती हुई हवाईं बिलकुल शफाफ और नीला समंदर
02:22और उनके बिलकुल साथ खड़े सुनेहरी रेट के उंचे-उंचे टीले जिन्हें डाम का सहरा का जाता है
02:28ये जगा वाकी किसी भी फोटोग्रफर के लिए एक खाब से कम नहीं
02:32चुकि यहां आम लोगों का जादा रश या मुदाखलत नहीं होती
02:35इसलिए पानी की रंगत और पूरे माहौल की शफाफियत बिलकुल बरकरार रहती है
02:40लेकिन यहां जरा रुकर सोचने की जरूरत है कि क्या ये वाकी सिर्फ एक खुबसूरत मनजर तक महतूत है
02:46पिलकुल नहीं, इन रुमान भी मनाजर से निकल कर जब अमली हकीकत की तरफ देखें
02:51तो इस साहिली पटी पर तकरीबन पच्चास हजार अफरादा बाद है
02:54सवाल ये पैदा होता है कि इनका कुजर बसर कैसे होता है
02:58इनकी रोजी रोटी का बराहरास्त इनहिसार इसी समंदर पर है
03:01और यहीं से हमारे जायजे का तीसरा हिस्सा शुरू होता है
03:05यानि साहिली माहिगीरी की मईश्चत
03:07तहकीक और डेटा बताता है कि ये खिता दरसल एक छुपा हुआ मार्शी दियो है
03:12इस पूरे मंजर नामे को थोड़ा वसी पैमाने पर देखें
03:15मकरान की साहिली पट्टी 700 किलोमेटर पर मुहीत है
03:19ये बात हैरान कुन है कि ये पूरे पाकिस्तान की साहिली पट्टी का 70 फीसद बनती है
03:24यानि ये महस एक साहिल नहीं बलकि बेपना कुद्रती वसाइल का एक बहुत बड़ा और वसी समंदर है
03:30अब जरा इस बड़े हिंसे पर गौर करें
03:32एक इशारिया दो मिलियन मेट्रिक टन
03:35ये उस मचली की सालाना मिक्तार है जो इस इलाके से पकड़ी जाती है
03:39और ये पैदावार सुबाई GDP में सीधा 9 अरब रुपे का जखी मिजाफा करती है
03:44अब अंदाजा लगाया जा सकता है कि हम जिस मवाशी देव की बात कर रहे हैं
03:48वो हकीकत में कितना बड़ा है
03:49रिसर्च पेपर में मौझूद डेटा इस हकीकत को और भी शांदार तरीके से वाज़े करता है
03:55यहां की समंदरी हुदूद में तकरीबन साड़े 300 मुखतलिफ किसम की समंदरी हयात पाई जाती है
04:00इन में जींगा और सार्डेनेला जैसी इंतहाई कीमती अकसाम शामल है
04:04जिनकी आलमी मार्केट में बेहद मांग है
04:07यह तमाम हकायक और आदादो शमार साबित करते हैं कि इस पानी के अंदर कितनी बड़ी दौलत चुपी वी है
04:13अब बढ़ते हैं चौथे हिस्से की तरफ
04:16पानियों में मौजूद चैलेंजिस
04:18सलाहित बमकाबला हकीकत
04:20हर बड़ी सनत की तरह इस खिते को भी चंद ऐसे संगीन मसाइल का सामना है
04:24जो उसे अपनी असल तिजारती इस्तदात तक पहुंचने से मुसलसल रोक रहे हैं
04:28इस मवाजने पर नज़र डालें तो सुरते हाल काफी वाज़ हो जाती है
04:32एक तरफ 14,530 मुर्बा किलॉमेटर का एक वसी औरीज अरीज अलाका है
04:37जो समुंदरी हायात से मुकमल तोर पर माला माल है
04:40और दूसीर तरफ तल्ख हकीकत ये है
04:42कि मकामी माहिगीरों का फलीट 18,000 लकड़ी की छोटी और पुरानी कश्टियों पर मुश्तमिल है
04:48इन में से जादा तर में तो मुनासिब इंजन तक मौजूद नहीं
04:51और सबसे तश्वीशनाक बात ये है
04:53कि इन में मचली को महफूज रखने के लिए
04:55रेफरिजरेशन का कोई निजाम सिरे से है ही नहीं
04:58इस मसले की गहराई को मजीद समझें
05:01चूँके डाम और इस चैसे दीगर कई साहली मकामात पर बर्फ बनाने के कारखाने
05:06यानि आइस फैक्टरीज मौजूद नहीं है
05:07इसलिए माहिगीरों को अपनी पकड़ी गई मचली को बेचने
05:10या प्रोसेस करवाने के लिए
05:12लंबा सफर तैकर के कराची लाना पड़ता है
05:14इस तवील सफर के दौरान ये शदीद खत्रा रहता है
05:17कि मचली खराब न हो जाए
05:18ये पोस्ट हाविस्ट का एक बहुत बड़ा
05:20हकिल्की और रोजमर्रा का मसला है
05:23इंफरस्ट्रक्चर के इलावा
05:25माहिगीरी के कुछ नुकसांदे मकामी तरीके
05:27भी एक इंतहाई संगीन चालेंज है
05:29बलो, गजजा और कट्रा
05:31ये वो मकामी आलात और जाल है
05:33जिनके इस्तमाल से चोटी और नायाब
05:35समंदरी हायात को शदीद नुकसान पहुँच रहा है
05:37मौसर कवानीन की कमी
05:39और उन गेर मयारी आलात की वज़े से
05:40माहिगीरी के ऐसे गेर पायदार तरीके राइज है
05:43जो मस्तक्बिले करीब में मचलियों की
05:44नसल कुशी का सबब भी बन सकते हैं
05:47आते हैं आखरी हिस्से की जानेब
05:49खिते की सलाहियतों से फाइदा उठाना
05:51मसायल तो हमने देख लिए
05:52लेकिन अच्छी खबर ये है कि
05:54इस रिसर्च पेपर में साहिली मईशत
05:57को बहाल करने और माहुलियाती तहफोस के लिए
05:59कुछ बिखतरीन और अमली हल भी
06:01तजवीज किये गए हैं
06:02तो ये हल क्या हैं तेजी से उन पर नज़र डालते हैं
06:05सबसे पहले साहिली
06:07एक्वा कल्चर यानि मचलियों के फार्म बनाना
06:09इंतहाई ज़रूरी है
06:10दूसरा एहम कदम ये है कि डाम जैसी जगों पर
06:13फौरी तोर पर आइस फलेक प्लांट्स लगाए जाएं
06:15ताके वो कीमती कैच खराब होने से बच सके
06:17इसके इलावा पब्लिक प्राइविट पार्टनर्शिप के जरिए
06:20सरमाया कारी को फरोग दिया जा सकता है
06:21साथी साथ माहेगीरी की पायदार हुदूद पर
06:24सकती से अमल दरामत और पुरानी कश्टियों की जदीद कारी
06:27वो बुनियादी अक्दामात हैं जिनकी बदूलत
06:29ये सनद सही मानों में अपने पाउं पर खड़ी हो सकती है
06:32अब जरा इस हैरत अंगेज आदादों शुमार पर तवज्जो दें
06:35आलमी सता पर मचली की बरामदात में पाकिस्तान का हिस्सा सिर्फ 0.25 फीसद है
06:41जी हाँ सिर्फ 0.25 परसेंट
06:44ये हिंसा साफ बता रहा है कि इस सेक्टर में तरक्की की कितनी बड़ी गुझाईश मौझूद है
06:49अगर इन मौझूदा कुदरती वसायल को सही प्लैनिंग के साथ इस्तमाल किया जाए
06:53तो ये मुम्किना तोर पर एक बिलियन डॉलर की बरामती सनद बन सकती है
06:57इस मालूमाती जाइजे का इखताम रिसर्च की एक बहुती ताकतवर ख्याल पर होता है
07:02ये समंद्री हयाच जिसे आम तोर पर एक मुफ्थ शे समझा जाता है
07:06दरसल एक हीरे का मोती है और इसे आने वाली कई नसलों के लिए महفوظ रहना चाहिए
07:10ये मकाला हमें इस नाजुक तवाजन पर गोर करने की दावत देता है
07:14जो दिल्फरेब सियाहत, माहीगीरी के पाइदार तरीकों और एक वसीम अगर छुपे हुए माशी खजाने के दरम्यान होना इंतहाई जरूरी
07:21है
07:21जाते जाते सबसे बड़ा सवाल जो जहन में उभरता है वो ये है कि क्या ये खिता हमेशा सिर्फ एक
07:27खुबसूरत सियाहती मकाम तक ही महदूद रहेगा
07:29या हम इस हीरे के मोती की असल कदर पहचान कर उसी एक पाइदार बिलियन डॉलर की आलमी सनत में
07:35तबदील कर सकेंगे
07:36फैसला यकीनन आने वाले वक्त और दुरूस तरजीहात पर मुनहसर है