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پاکستان کی مشہور اور لیجنڈری فوک سنگر ریشماں کی 13ویں برسی عقیدت و احترام سے منائی جا رہی ہے۔ ریشماں کی منفرد آواز، صوفیانہ اندازِ گائیکی اور دل کو چھو لینے والے گیت آج بھی موسیقی کے شائقین کے دلوں میں زندہ ہیں۔

ریشماں نے اپنی لازوال آواز کے ذریعے پاکستان سمیت دنیا بھر میں اپنی پہچان بنائی۔ ان کے مشہور گیتوں میں ’’دمادم مست قلندر‘‘، ’’لمبی جدائی‘‘ اور ’’اکھیاں نوں رہن دے‘‘ شامل ہیں، جو آج بھی موسیقی کے چاہنے والوں میں بے حد مقبول ہیں۔

ریشماں صرف ایک گلوکارہ نہیں بلکہ برصغیر کی لوک موسیقی کا ایک روشن باب تھیں۔ ان کی آواز میں محبت، درد، صوفیانہ رنگ اور مٹی کی خوشبو محسوس ہوتی ہے۔

اس خصوصی رپورٹ میں دیکھیے پاکستان کی عظیم فوک سنگر ریشماں کی زندگی، فن، لازوال گیتوں اور موسیقی کے سفر کی یادگار جھلکیاں۔

📺 مزید معلوماتی، ثقافتی، تاریخی اور انٹرٹینمنٹ رپورٹس کے لیے دیکھتے رہیے Apna TV New York۔

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00:15पिछड़े अभी तो हम बस कर पर सौ जियोंगी मैं कहा
00:33पिछड़े अभी तो हम बस कर पर सौ जियोंगी मैं कहा है
01:00गुलुकारा रेश्मा ये कहानी सिर्फ एक गुलुकारा की नहीं है
01:03बलकि एक ऐसी खनक्ती और पुरदर्द आवाज की है
01:06जिसने सरहदों और जुबानों की कैद से आजाद होकर
01:09पूरी दुनिया को अपना दिवाना बना लिया था
01:11एक ऐसी साथगी जिसने मौसीकी की तारीख में अपना नाम हमेशा के लिए अमर कर दिया
01:16चलें इस सफर का आगास करते है
01:19जरा मशूर भारती सहाफी फरजाना वर्सी के एन अलफास पर गोर करें
01:22एक ऐसी गायल आवाज जिसमें दर्द ही कीट पन गया
01:26ये कोई मामूली खराजय तैसीन नहीं है
01:28ये रेशमा की गायकी की बिलकुल सची और गहरी अकासी है
01:31जब मुगाती थी ना तो ऐसा लगता था जैसे उस सिर्फ गान ही रही
01:35बलकि अपने दिल का सारा दर्द और जिंदगी का पूरा निचोड सुनने वालों के सामने रख रही है
01:40तो फिर यहां ये सवाल पैदा होता है
01:43कि आखिर ये बुलबले सहरा दरसल थी कौन
01:45मतलब ये सोचकर ही हरानी होती है कि किस तरह एक खाना बदोश कबीले से तालुग रखने वाली बच्ची
01:51जिसने कभी कोई रस्मी तालीम हासल नहीं की और नहीं किसी उस्ताज से मौसीखी सीखी
01:55वो आगे चल कर एक ऐसा ग्लोबल आइकन बन गई जिसकी इज़त दुनिया भर में होती है
02:01ये नामुम्किन सा सफर शुरू कैसे हुआ
02:03हमारा पहला हिस्सा है सहरा की छूपी हुई आवाज और उनकी सादा खाना बदोशाना शुरूआत
02:10इस लेजिन को समझने के लिए हमें बिल्कुल शुरू में जाना होगा
02:13साल उनीस सो सिन्टालेस वरै सकीर की तक्सीम का वो हंगामा खेज़ वक्त
02:17जब राजस्तान के इलाके बीका नेर में रेश्मा की पैदाईश हुई
02:20वो बमश्किल एक महीने की होंगी जब उनका खांदान हिज़त करके कराची आ गया
02:24अब उनका बच्चपन आम बच्चों जैसा तो था नहीं
02:27साठ की दाही के आगाज में वो अपना अजादतर वक्त सूफी बुजर्गों के मजारात पर धमाल काते हुए गुजारती थी
02:32वहीं से उनकी आवाज में वो रुहानियत और कहराई पैदा हुई
02:35अब यहां एक बहुत दिल्चस्प बात है
02:38इनका तालोक एक बंजारा कबीले से था
02:40यह बंजारे बुनियादी तोर पर राजिस्थान के इलाके की एक तारीखी खाना बदोश बरादरी है
02:45और कमाल की बात यह है कि इतनी शोहरत मिलने के बाद भी
02:48रेश्मा ने कभी अपनी इन जड़ों को नहीं चुपाया
02:50बलके हमेशा बड़े फखर से अपना तारूफ करवाया
02:53इसी बंजारा पसमंजर और सहराई जड़ों की वज़ा से ही तो उन्हें प्यार से बुलबुले सहरा का आ जाता था
02:58आगे बढ़ते हैं दूसरे हिस्से की तरफ
03:01मजार परूं की दर्याफ़त
03:02जो कि बस एक खुशगवार इतफाक था
03:05हर कहानी में एक टर्निंग पॉइंट होता है
03:07और रेश्मा की जिंदिगी में ये मोरता बाया
03:09जब उनकी उम्र सिर्फ बारा साल थी
03:11जी हाँ, सिर्फ बारा साल
03:13जरा तसवर करें
03:15इस उम्र में जब बच्चों की आवाज बिलकुल कच्ची होती है
03:17रेश्मा की आवाज में एक ऐसी कड़क
03:19एक ऐसा कच्चा बन
03:21और इतनी हैरत अंगेस ताकत थी
03:23जो सीधा दिल चीर कर गुजर जाती थी
03:25और ये मोर्जा दर्याफ़त कैसे हुआ
03:27पिलकुल लितफाक से
03:28मशूर टीवी और रेडियो प्रोड्यूसर सलीम गिलानी साब
03:31लाल शवास कलंदर के मजार पर गए हुए थे
03:33वहाँ उन्होंने इस नौजवान लड़की को
03:35पूरी लगन से गाते सुना
03:36और फॉरन समझ गए
03:38कि ये कोई आम आवाज नहीं है
03:39वो उस बच्ची को रेडियो पाकिस्तान की स्टूडियो ले आए
03:42एक ऐसी बच्ची जिसने कभी स्टूडियो देखा तक नहीं था
03:45उसने वहाँ अपनी जिंदगी की पहली रिकॉर्डिंग करवाई
03:47लाल मेरी पत
03:49और बस रातों रात पूरे मुल्क में इनकी आवाज का जादू चल गया
03:53तीसरा हिस्सा है उनका बेमिसाल लोक अंदाज
03:56जहां फितरी सलाहियत ने रस्मी तरभियत को मात दे दी
03:59ये एक बहुत ही जबरदस दजाद है
04:01एक तरफ रेश्मा थी जिनके पास ना स्कूल की टीगरी थी
04:04और ना ही मौसीकी के किसी उस्ताद की कोई क्लासी की तरभियत
04:07और दूसरी तरफ
04:08उनका कमाल ये था कि उन्हें अकूस्टेक्स यानि सौतियात की मुकमल समझ थी
04:14मजारों की खुली हवा में गाने की वजह से
04:16उनकी आवाज में इतनी भरपूर और कुदरती ताकत आ गई थी
04:19कि उसने हर किसम की अकैडमिक और रस्मी तरभियत को बहुत पीछे छोड़ दिया
04:23इसे कहते हैं खालिस कच्चा टालेंट
04:26और उनके गाने मतलब एक से बढ़कर एक शाहकार
04:30उन्होंने पंजाबी, सिंधी और राजिस्तानी में ऐसे गीद गाए
04:34जो आज हमारी सिकाफत का लाजमी हिस्सा बन चुके है
04:36लाल मेरी पत्छो, दमादम मसकल अंदर, हाई और अरभा
04:40या फिर वो सदा बहार गीद अक्यानु रहन दे और लंबी जुदाई
04:44ये सिर्फ गाने नहीं हैं, ये वो तराने हैं जो नसल दर नसल सफर कर रहे हैं
04:48और आज भी हमारे दिलों में बसते हैं
04:50चौता हिस्सा, दोनों से सरहदें पार करना
04:53कैसे उनकी आवाज ने दो मुख्तलिफ सकाफतों को जोड़ दिया
04:56आपको मालूम है उनकी आवाज सिर्फ पाकिस्तान तक मैदूद नहीं रही
04:59शुरू में पाइरेटेड आडियो कैसेट्स के जरीए उनकी आवाज सरहत पार पहुंची
05:03और फिर भारत में भी तहलका मचा दिया
05:051973 में राज कपूर ने अपनी फिल्म बॉबी में उनका गाना अखियानू रहन देशामिल किया
05:10फिर तरासी में सुभाश कई कि फिल्म हीरो का वो आइकॉनिक गाना लंबी जुदाई
05:14उसने तो रिकॉर्ड्स ही तोड़ दिये
05:16यहां तक के 1980 की दहाई में उस वक्की भारती वजीर याजम इंदरा गान्दी की खसूसी दावत पर रेश्मा ने
05:22भारत जाकर लाइफ पर फॉर्फॉर्म भी किया
05:24यह होता है सच्चा फन जो सरदों की कैद नहीं मानता
05:27लेकिन इतनी बेपना शोहरत और पैसा मिलने के बावजूद क्या वो बदल गई बिलकुल नहीं
05:33और इस बात का सुबूत हमें इस एक छोटे से वाके से मिलता है जो बहुत कमाल का है
05:382006 की बात है रेश्मा एक ग्लोबल सूपरस्टार बन चुकी थी
05:41वो चातीन तो चार्टर तयारों में सफर कर सकती थी लेकिन जब उन्हें अपने खांदान को अपने आबाई गाउं इंडिया
05:47लेकर जाना था
05:47तो उन्होंने क्या किया उन्होंने इंतहाई सादगी से लाहौर से अमरिसर जाने वाली आम पैसंजर बस की बिलकुल साथ सीटें
05:54बुक करवाई और बस में सफर किया
05:56ये वाकिया साबित करता है कि दहाईयों की शोरत ने भी उनके अंदर की उस सादा दर्वेश सिफ्थ औरत को
06:01कभी मरने नहीं दिया
06:03और अब हम अपने आखरी हिस्से की तराफ आते हैं एक अमर विरसा लेजन को याद करते हुए
06:09उनकी अजीम खिद्मात को सराते हुए 1982 में उन्हें Pride of Performance और 2008 में बावकार सितारा इम्तियास से नवाजा
06:16गया
06:16लेकिन उनकी जिंदगी का आखरी हिस सब बड़ा कठन था
06:19असी की दहाई में ही उन्हें गले का कैंसर हो गया था
06:22जरा सोचें एक गलू कारा जिसकी पहचान ही उसका गला है उसे गले का कैंसर हो जाए
06:27लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और दहायों तक गाती रही
06:30बिलाखिर एक तवील और बहादराना जंग लडने के बाद
06:343 नवेंबर 2013 को ये अजीम आवाज लाहूर में हमेशा के लिए खामोश हो गई
06:40उनके साथी फंकारों के दिलों में उनके लिए जो इज़त ही वो कमाल थी
06:43जुनून बैंड के साबिक गिटारिस्ट सल्मान एमद ने उनके बारे में बजजा तोर पर कहा था
06:48कि एक ऐसी पुर्जोश आवाज थी जिसका तालोक इस दुनिया से महसूस ही नहीं होता था
06:52और वाकई वो एक ऐसी रूपरवर आवाज थी जिसका नेमल बदल शायद हमें फिर कभी देखने या सुनने को ना
06:58मिले
06:59तो आखिर में एक सवाल जो हमें अपने आप से पूछना चाहिए वो ये के ब्रेश्मा की मौसीकी की वो
07:04खालिस, कच्ची और बेसाखता रूप हमारी आने वाली नसलों के फनकारों को कैसे मतासिर करेगी
07:10बेशक वाज हमारे दर्मयान नहीं है
07:11लेकिन बुलबले सहरा के गायवे गीत हमेशा फिजाओं में जिन्दा रहेंगे और दिलों के तार छेड़ते रहेंगे
07:17क्या हम इस वरसे को उसी महबबत से संभौल पाएंगे
07:20इस बारे में जरूर सोचिएगा
07:21आज के इस मालूमादी सेशन में हमारे साथ चामिल होने का बहुत बहुत चुक्रिया
07:27अक्खिया नुरेन दे
07:33अक्खिया दे को लिको
07:42चैन्ने परे देशिया
07:52बोल भॉने नुरू
08:10अक्खिया नुरू
08:13झाल
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