00:10आज के इस जाइजे में हम एक ऐसे सकाफती सफर पर निगलने वाले हैं जो तवकवात से बिलकुल हटकर है
00:15और सची बात है बेहत हैरान कुन भी एक ऐसी दुनिया जहां सधियों पुरानी रिवायात चमकते दमकते रंग और गहरी
00:23अकीदत आज भी पूरी आब उताब के साथ जिन्दा है तो चलें बिना किसी ताखीर के सीधा असल बात की
00:28तरफ चलते हैं
00:29अच्छा अब जरा एक लम्मे के लिए सोचिए वो कौन सी जगा हो सकती है जहां लगभग एक लाख जाहिरीन
00:35कठन रास्तों से गुजर कर मटी के आतिश फिशानों की चोटियों बर चड़ते हैं और देवी देवताओं का आशिरवाद हासिल
00:41करने के लिए उनके दहानों मे
00:43नारियल और फूल ने चावर करते हैं चायद आपका जहन फॉरन किसी पडोसी मुल्क की तरफ गया हो लेकिन असल
00:50हकीकत तमाम जोगराफियाई अंदाजों को बदल कर रख देती है चलें जी इस रास से परदा उठा ही देते हैं
00:56ये जगा कोई और नहीं बलके पाकिस्तान क
00:58सुबा बलोचिस्तान में वाकि हिंगोल नैशनल पाक है है ना कमाल की बात ये हकीकत बहुत से लोगों के लिए
01:04किसी इनकिशाफ से कम नहीं होती तो आईए अब इस पर तफसील से बात करते हैं कि एक मुस्लिम अक्सरियती
01:09मुल्क के अंदर ये रंगा-रंग सिकाफत किस तर
01:25धिंदू आबाद हैं और ये सिर्फ खामोशी से रहने वाली आबादी नहीं है बलके ये लोग अपने शांदार तहवार और
01:30सकाफती रसूमाद पूरे जोश-खुरोश से मनाते हैं और जाहर है किसी भी तहवार का तसकिरा उसके मखसूस जाइकों के
01:37बगार तो बिलकुल �
01:52जरा सिंदी सेरू का ही तसवर कर लीजिए ये सूजी का एक बहुती रिवायती और मज़ेदार हलवा है जो नवरातरी
01:57के पहले दिन माता को परसाथ के तोर पर पेच किया जाता है ये सिर्फ एक मीठी डिश नहीं है
02:01बलके ये महबत और सकाफती विरसे का वो जायका है जो �
02:05एक नसल से दूसरी नसल तक सफर करता है पीकी किचिन की इस तरकीब को ही देख लें इसकी तैयारी
02:10अपने आप में बड़ी मुनफरिद है पहले खुजूरों और ड्राइफ रूट्स को खालिस घी में भून कर सूजी के साथ
02:15पीसा जाता है पिर उसमें दूद और कैरेमला�
02:29इसास भर देता है घर के किचिन और इन खानों से निकल कर अब जरा गलियों और महलों का रूख
02:35करते हैं जहां ये तहवार एक मुश्टर का रक्स और इज्दमाई खुशी का रूप धार लेते हैं
02:41कराची के 84 साला समाजी कारकुन रमेश माना का कहना है कि पाकिस्तान और भारत के गर्बा में कोई फर्क
02:47नहीं है और जब हम कराची के नारायन पूरा या रंचोर लेन जैसे इलाकों में पंखेडारे उड़ी जाजो जैसे गुजराती
02:53लोग गीत गूंचते हुए सुनते है
02:54तो वाकि महसूस होता है कि फन और मौसीकी की तो कोई सरहद नहीं होती सकाफत आज भी पस एक
03:00गीत की दूरी पर खड़ी है और यहां एक ऐसा सकाफती मिलाब देखने को मिलता है जो वाकिला जबाब है
03:06एक तरफ तो गुजराती हिंदू नवरातरी की नौ रातों में गर्�
03:21तरका रक्स मुखतले फकायत के लोगों को एक छट के नीचे लाकर तनवों में इतहात की एक ऐसी मिसाल बने
03:27जो सबका दिल चीद ले शहरी सदे के इन शानदार मनाजर के बाद अब थोड़ा बड़े पैमाने पर बात करते
03:33हैं यानि नौरातरी की इन खास नौरातों की अ�
03:48पर दिन एक नया रंग और एक नई अकीदत और फिर ये सारा सिलसला दशेहरा यानि विजए दश्मी के दिन
03:54बुराई पर अच्छाई की शानदार फतह के तोर पर अपने अंजाम को पहुंचता है और इन दिनों में मंदिरों की
04:00रोनके तो बस देखते ही बनती हैं सिंद औ
04:13पारकर, नागर पारकर और उमर कोट के सदियों पुराने मंदिर ये तमाम जगें कुमकुमों की रोशनियों, डांडिया के पुर्जोश रक्स,
04:20रोजों और दौाओं का मरकस बन जाती हैं शहर की इस जग मगाहट और चहल पहल से अब हम ज़रा
04:26बाहर निकलते हैं और सीधा
04:27उन वीरान पहाडों का रुख करते हैं जो इस तहवार के दौरान मुकमल तोर पर जाग उठते हैं एक लाक
04:34ये महिस कोई आम हिंसा नहीं है बलके ये हिंगलाज यातरा में शिर्कत करने वाले अकीदत मंदों की वो शानदार
04:40तादाद है जो इस तीन रोजा तहवार के लि�
04:57हाईवे के रस्ते निकलते हैं लेकिन आगे उने तवील, खुश्क और पत्रीले रस्तों पर नंगे पाउंच चलना पड़ता है तेज
05:03चलती हवाओं और गर्दो घुबार के तूफानों के दरमियान जाहिरीन के पहने वोई शोख रंगों वाले कपड़े इन पंजर मनाज
05:22जो आलाद की उमीद लिए इस सफर पर निकली हैं क्योंकि उनका अकीदा है कि हिंगलाज माता तमाम मनतें पूरी
05:28करती हैं वहीं कुछ होर जाहिरीन भी हैं जैसे आलू कुमार जो शिव भगवान का शुक्रिया अदा करने आये हैं
05:33क्योंकि पिछले साल मांगी की दुआ के स
05:48जोसल की मानी जाती है और कमाल की बात ये है कि राट ढलने के बाद भी ये नैशनल पार्क
05:52सोता नहीं है बलके रोशनियों और गर्मा गरम खानों के स्टॉल से इसकी रौनक दुगनी हो जाती है इन सब
05:58बातों के बाद हम एक बहुत ही एहम सवाल की दरफ आते हैं वो पहल�
06:02जो हमें सरहदों से मावरा होकर सोचने पर मजबूर करता है देखें सबसे एहम नुक्ता ये है कि ये शांदार
06:09यात्रा जिन हालात में हो रही होती है वो कई जमीनी हकाइक और मुश्किलात से घेरे हुए हैं पाकिस्तान और
06:14भारत के कशीदा तालुकात जंगों की तारीख
06:16और दोनों तरफ की पेचीदा बियोरोक्रिसी सरहत पार से आने वाले जाहिरीन के लिए बहुत बड़ी रुकावट हैं वीजों का
06:22मसला हो या फिर वक्तन फवक्तन सर उठाने वाले सेक्योरिटी के खच्चात इन सब के वावजूद भी इस तहवार का
06:27इस शानों शौकत से
06:28मनकिद होना अकलियती बिरादरी के पुखता आजम की एक जीती जाकती मिसाल है और इनी हालात की रोशनी में हिंगलाज
06:34माता मंदर के जनरल सेक्टरी वरसीमल दिवानी की ये इलतिजा बहुत मानी खेज है बुचातें के हकूमत पाकिस्तान दुनिया भर
06:41के हिंदूओं के �
06:41ये वीजे जारी करे ताकि वो सब भी इस मुकद्दस मकाम पर आकर आशिरवाद ले सकें ये सिर्फ एक मजभी
06:47खौाइश नहीं है बलके ये आवाम के दरमयान राप्ते और खिते में हमाहंगी बढ़ाने का एक मौसर जरिया भी थापित
06:52हो सकती है तो इस सारे जाइजे को स
07:08उपसूरती से बरकरार रख सकते हैं तो आखिर वो और कौन सी चीजे हैं जो हम इनसानों को इन सरहदों
07:13से बालातर होकर आपस में जोड़ती हैं ये वो सवाल है जो यकीनन देर तक हमारे जहनों में गुशता रहेगा
07:38स्वाइब
07:39झाल झाल