जरासंध के वध के बाद, धर्मराज युधिष्ठिर का राजसूय यज्ञ पूरे वेग से आरंभ होता है। इंद्रप्रस्थ में दूर-दूर से राजा, ऋषि और देवता पधारते हैं। जब अग्र-पूजा का समय आता है, तो भीष्म पितामह भगवान श्रीकृष्ण को सर्वोच्च सम्मान देने का प्रस्ताव रखते हैं। लेकिन इस निर्णय से शिशुपाल का अहंकार भड़क उठता है, और वह श्रीकृष्ण का अपमान करना शुरू कर देता है। श्रीकृष्ण ने अपनी बुआ को दिए वचन के अनुसार, शिशुपाल के सौ अपराध क्षमा करते हैं, पर जब वह अपनी सीमाएं लांघता है, तब सुदर्शन चक्र का प्रहार होता है! देखें कैसे कृष्ण ने धर्म की स्थापना की और शिशुपाल को मोक्ष प्रदान किया। एक अविस्मरणीय गाथा! #BhagavataPurana #KrishnaLeela #ShishupalaVadha #Mahabharat #RajsuyaYagya #SudarshanChakra
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