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Discover the inspiring story of Hazrat Khubaib ibn Adi (RA), one of the most courageous companions of Prophet Muhammad ﷺ. In this emotional Islamic story, you'll learn how Hazrat Khubaib (RA) remained steadfast in his faith even when facing execution.

This powerful story highlights the strength of Iman (faith), patience, sacrifice, and unwavering devotion to Islam. Every Muslim can draw valuable lessons from the bravery and determination shown by this noble companion.

In This Video:

✔ The life of Hazrat Khubaib (RA)
✔ His capture by enemies
✔ Events leading to his execution
✔ His final words before martyrdom
✔ Lessons for Muslims today

Watch until the end to discover one of the most inspiring moments in Islamic history.
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Transcript
00:00अच्छा दोस्तो दबाव में सुकून और हजरत खुबैब रजियल्ला अन्हों की खेर मुतजल्जल अकीदत
00:05आज के इस जाइजे में हम सीधा तारीख के एक ऐसे इंतहाई जजबाती और मतासिर कुन वाके की गहराई में
00:11जाएंगे
00:12जो हमें सिखाता है के मुश्किल तरीन हालात में भी दिली सुकून कैसे पाया जा सकता है
00:17घजबा रजी के बाद पेश आने वाला ये वाकिया सिर्फ तारीख का कोई पुराना वरक नहीं है
00:22बलके सच पूछें तो ये आज की इस तेज रफ़तार और दबाव से भरी दुनिया में हमारे लिए बका का
00:28एक जबरदस सबक है
00:29तो चलें इसे तफसील से समझते हैं
00:31जरा एक लमहे के लिए इस मनजर को अपने जहन में लाएं और इस शदीद जिस्मानी आजमाईश को महसूस करें
00:37घजबा रजी के बाद कुरेश मक्का ने हजरत खुबैब रजियल्ला वानहो को कैद कर लिया था
00:42अब तसवर करें तपता हुआ सहरा बेरहम तनहाई वो खजूर के एक तने से मजबूती से बंधे हुए हैं
00:49और उनके बिलकुल सामने 40 खूनी नेजे ताने खड़े हैं
00:52ये लिटरली एक ऐसा मॉमिन्ट था जहां कोई भी आम इनसान खौफ से कांप जाता या अपना जहनी तवाजन खो
00:58बैटता
00:58और फिर इन संगीन हालात में उन्हें एक नमुम्किन सी शर्त दी गई
01:03एक तरफ पेशकश थी कि एमान छोड़ दो और जान बचा लो
01:07और दूसरी तरफ कोफर से इंकार और मौत को गले लगाना
01:11माखिज हमें बताता है कि हजरत खुबैब ने यहां एक सेकंड की भी हिचकिचाहट नहीं दिखाई
01:17उन्होंने बिलकुल वाज़े कर दिया कि अपने खालिक से मूँ मुडने के बजाए
01:21वो मौत को हंसी खुशी कबूल करेंगे
01:24इस्तिकामत का ये लेवल वाकई हैरान कुन है
01:27अब जब दुश्मनों ने नाकाबले तस्खीर हिम्मत देखी
01:30तो उन्होंने नफसियाती तोर पर तोड़ने की एक आखरी कोशिश की
01:34अबू सुफ्यान का हुकम आया
01:36इसका रुख किबले से मोड़ दो
01:38कैद करने वालों का खयाल था
01:39कि अगर वो जिस्मानी तोर पर उनका रुख
01:42उनकी अबादत की सिम्ट से हटा देंगे
01:44तो शायद शायद उनकी ये हिम्मत और अकीदत कमजोर पड़ जाए
01:47ये एक बहुत ही गहरी नफसियाती चाल थी
01:50लेकिन जरा हजरत खुबैब का जवाब सुने
01:53कमाल कर दिया उन्होंने
01:54उनका तारीखी और एमान आफरोज जवाब था
01:57तुम मेरा रुख जिदर भी मोड़ दो
01:59मेरा अल्लाह मेरे सामने है
02:00और सच में यही वो नुकता है
02:03जो हकीकी अंदरुनी सुकून की
02:05बुनियाद को वाज़े करता है
02:06ये एक ऐसा गहरा रुहानी तालुक था
02:08जहां जिसमानी सिम्थ की कोई एहमियत ही नहीं रह गई थी
02:11जब दिल का तालुक जुड़ ज़़ जाय
02:27कि उन्हें अल्ला की मौजूद की अपनी हर रग में
02:30खून के हर कत्रे में
02:31दरख्तों के पत्तों पहाणों की चोटियों
02:33समंगर की लहरों तुफानों और सितारों की चमक में महसूस हो रही थी
02:36और जब आप इस सदा का मुशाधा कर लेते हैं
02:38तो मौत का खौफ बिलकुल खत्म हो जाता है
02:40अब यहां से कहानी एक ऐसा हैरतंगीज रूहानी औरूज लेती है
02:45जो तमाम जिसमानी फासलों को पीछे चोड़ देता है
02:48अपनी जिन्दगी के बिलकुल आखरी लमहात में
02:51अपने प्यारे नबी करीम को एक आखरी रूहानी सलाम भेजा
02:58और माख़ज हमें बताता है
03:00कि इसी लमहे हज़रत जिबराईल लेह सलाम ने ये पेगाम फौरी तोर पर पहुँचाया
03:05और नबी करीम ने सैक्रों मील दूर मदीना की मस्जद में उससे मौसूल किया
03:12ये सोचकरी रॉंक्टे खड़े हो जाते हैं
03:14नबी करीम सलालाहु अलेही वसल्म का फौरी जवाब था
03:18वालेकुमस्सलाम या खुबैब
03:20ये फौरी रद्ध आमल इस मौजजाती तालुक को जाहिर करता है
03:23जो इस वक्त काइम होता है जब कोई शदीद दबाव के तहट
03:27खालिस अकीदत का मुजाहरा करे
03:28इस से साबित होता है कि जब इनसान कड़े वक्त में अपने रब पर भरोसा करता है
03:33तो पूरी काइनात की ताकतیں उसके साथ खड़ी हो जाती है
03:36सबर की ताकत
03:37कदीम आजमाईशों का जदीद मसायल से तालोग
03:40चलें अब इस गहरे तारीखी वाके से थोड़ा आगे बढ़ते हैं
03:43और देखते हैं कि ये नाकाबल यकीन इस्तकामत
03:46आज के दोर में हमारी जहनी सहत
03:48और रोज मर्रा की जिन्दगी पर कैसे लागू होती है
03:51देखें वक्त के साथ हत्यार जरूर बदल गए हैं
03:54आज कल हम पर लवजी और जिस्मानी नेजे तो नहीं ताने जाते
03:58लेकिन इनकी जगा अंदरूनी बेचैनी, इस्तिराब और समाजी और घरिलू तनाउने ले ली है
04:03ये आज के नेजे हैं
04:05लेकिन इन जदीद मुश्किलात का मुकाबला करने के लिए भी हमें बिलकुल उसी रूहानी रद्दे अमल की जरूरत है जिसका
04:11मुझाहरा तारिख में किया गया
04:13परिशानी की शकल बदली है लेकिन शिफा का रास्ता बिलकुल वही है
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05:31और ये जो मन्जर माख़स में बयान हुआ है ना ये दिल夠 छूो लेने वाला है
05:36सलाम अलैकुम बीमा सबर तुम यानी तुम पर स्लामती हो इस सबर के बदले जो तुमने दुनिया में किया
05:42ये इस खत्मी इनाम की एक शानदार तस्वील है
05:45We will not go into our own.
06:15ڈالنے کے سن سچے دل سے توبہ کرنی ہوگی
06:17ماخذ ہم سے یہی التجا کرتا ہے
06:19کہ ہم آج اور ابھی
06:21ان اصولوں کو اپنے زندگی کا حصہ بنائیں
06:23اس تجزیے کو سمیٹتے ہوئے میں
06:25چاہوں گا کہ ہم سب اس ایک بات پر
06:27ضرور غور کریں
06:28غصے اور رنجش کو دل میں رکھنا دراصل
06:31اپنے ہی سکون پر ایک نیزہ تاننے کی
06:33مترادف ہے
06:34تو آج ہمیں اپنے ذاتی اور غیر متزلزل
06:37اندرونی سکون کو پانے کے لیے
06:38किसे माफ करने की जरूरत है
06:40क्या आज हम वो घुसे की तलवार
06:42गिरा सकते हैं ताके वो हकी की सुकून
06:44पा सकें जिसका हमसे वादा किया गया है
06:46इस पर जरूर सोचिएगा
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