00:00अच्छा दोस्तो दबाव में सुकून और हजरत खुबैब रजियल्ला अन्हों की खेर मुतजल्जल अकीदत
00:05आज के इस जाइजे में हम सीधा तारीख के एक ऐसे इंतहाई जजबाती और मतासिर कुन वाके की गहराई में
00:11जाएंगे
00:12जो हमें सिखाता है के मुश्किल तरीन हालात में भी दिली सुकून कैसे पाया जा सकता है
00:17घजबा रजी के बाद पेश आने वाला ये वाकिया सिर्फ तारीख का कोई पुराना वरक नहीं है
00:22बलके सच पूछें तो ये आज की इस तेज रफ़तार और दबाव से भरी दुनिया में हमारे लिए बका का
00:28एक जबरदस सबक है
00:29तो चलें इसे तफसील से समझते हैं
00:31जरा एक लमहे के लिए इस मनजर को अपने जहन में लाएं और इस शदीद जिस्मानी आजमाईश को महसूस करें
00:37घजबा रजी के बाद कुरेश मक्का ने हजरत खुबैब रजियल्ला वानहो को कैद कर लिया था
00:42अब तसवर करें तपता हुआ सहरा बेरहम तनहाई वो खजूर के एक तने से मजबूती से बंधे हुए हैं
00:49और उनके बिलकुल सामने 40 खूनी नेजे ताने खड़े हैं
00:52ये लिटरली एक ऐसा मॉमिन्ट था जहां कोई भी आम इनसान खौफ से कांप जाता या अपना जहनी तवाजन खो
00:58बैटता
00:58और फिर इन संगीन हालात में उन्हें एक नमुम्किन सी शर्त दी गई
01:03एक तरफ पेशकश थी कि एमान छोड़ दो और जान बचा लो
01:07और दूसरी तरफ कोफर से इंकार और मौत को गले लगाना
01:11माखिज हमें बताता है कि हजरत खुबैब ने यहां एक सेकंड की भी हिचकिचाहट नहीं दिखाई
01:17उन्होंने बिलकुल वाज़े कर दिया कि अपने खालिक से मूँ मुडने के बजाए
01:21वो मौत को हंसी खुशी कबूल करेंगे
01:24इस्तिकामत का ये लेवल वाकई हैरान कुन है
01:27अब जब दुश्मनों ने नाकाबले तस्खीर हिम्मत देखी
01:30तो उन्होंने नफसियाती तोर पर तोड़ने की एक आखरी कोशिश की
01:34अबू सुफ्यान का हुकम आया
01:36इसका रुख किबले से मोड़ दो
01:38कैद करने वालों का खयाल था
01:39कि अगर वो जिस्मानी तोर पर उनका रुख
01:42उनकी अबादत की सिम्ट से हटा देंगे
01:44तो शायद शायद उनकी ये हिम्मत और अकीदत कमजोर पड़ जाए
01:47ये एक बहुत ही गहरी नफसियाती चाल थी
01:50लेकिन जरा हजरत खुबैब का जवाब सुने
01:53कमाल कर दिया उन्होंने
01:54उनका तारीखी और एमान आफरोज जवाब था
01:57तुम मेरा रुख जिदर भी मोड़ दो
01:59मेरा अल्लाह मेरे सामने है
02:00और सच में यही वो नुकता है
02:03जो हकीकी अंदरुनी सुकून की
02:05बुनियाद को वाज़े करता है
02:06ये एक ऐसा गहरा रुहानी तालुक था
02:08जहां जिसमानी सिम्थ की कोई एहमियत ही नहीं रह गई थी
02:11जब दिल का तालुक जुड़ ज़़ जाय
02:27कि उन्हें अल्ला की मौजूद की अपनी हर रग में
02:30खून के हर कत्रे में
02:31दरख्तों के पत्तों पहाणों की चोटियों
02:33समंगर की लहरों तुफानों और सितारों की चमक में महसूस हो रही थी
02:36और जब आप इस सदा का मुशाधा कर लेते हैं
02:38तो मौत का खौफ बिलकुल खत्म हो जाता है
02:40अब यहां से कहानी एक ऐसा हैरतंगीज रूहानी औरूज लेती है
02:45जो तमाम जिसमानी फासलों को पीछे चोड़ देता है
02:48अपनी जिन्दगी के बिलकुल आखरी लमहात में
02:51अपने प्यारे नबी करीम को एक आखरी रूहानी सलाम भेजा
02:58और माख़ज हमें बताता है
03:00कि इसी लमहे हज़रत जिबराईल लेह सलाम ने ये पेगाम फौरी तोर पर पहुँचाया
03:05और नबी करीम ने सैक्रों मील दूर मदीना की मस्जद में उससे मौसूल किया
03:12ये सोचकरी रॉंक्टे खड़े हो जाते हैं
03:14नबी करीम सलालाहु अलेही वसल्म का फौरी जवाब था
03:18वालेकुमस्सलाम या खुबैब
03:20ये फौरी रद्ध आमल इस मौजजाती तालुक को जाहिर करता है
03:23जो इस वक्त काइम होता है जब कोई शदीद दबाव के तहट
03:27खालिस अकीदत का मुजाहरा करे
03:28इस से साबित होता है कि जब इनसान कड़े वक्त में अपने रब पर भरोसा करता है
03:33तो पूरी काइनात की ताकतیں उसके साथ खड़ी हो जाती है
03:36सबर की ताकत
03:37कदीम आजमाईशों का जदीद मसायल से तालोग
03:40चलें अब इस गहरे तारीखी वाके से थोड़ा आगे बढ़ते हैं
03:43और देखते हैं कि ये नाकाबल यकीन इस्तकामत
03:46आज के दोर में हमारी जहनी सहत
03:48और रोज मर्रा की जिन्दगी पर कैसे लागू होती है
03:51देखें वक्त के साथ हत्यार जरूर बदल गए हैं
03:54आज कल हम पर लवजी और जिस्मानी नेजे तो नहीं ताने जाते
03:58लेकिन इनकी जगा अंदरूनी बेचैनी, इस्तिराब और समाजी और घरिलू तनाउने ले ली है
04:03ये आज के नेजे हैं
04:05लेकिन इन जदीद मुश्किलात का मुकाबला करने के लिए भी हमें बिलकुल उसी रूहानी रद्दे अमल की जरूरत है जिसका
04:11मुझाहरा तारिख में किया गया
04:13परिशानी की शकल बदली है लेकिन शिफा का रास्ता बिलकुल वही है
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05:31और ये जो मन्जर माख़स में बयान हुआ है ना ये दिल夠 छूो लेने वाला है
05:36सलाम अलैकुम बीमा सबर तुम यानी तुम पर स्लामती हो इस सबर के बदले जो तुमने दुनिया में किया
05:42ये इस खत्मी इनाम की एक शानदार तस्वील है
05:45We will not go into our own.
06:15ڈالنے کے سن سچے دل سے توبہ کرنی ہوگی
06:17ماخذ ہم سے یہی التجا کرتا ہے
06:19کہ ہم آج اور ابھی
06:21ان اصولوں کو اپنے زندگی کا حصہ بنائیں
06:23اس تجزیے کو سمیٹتے ہوئے میں
06:25چاہوں گا کہ ہم سب اس ایک بات پر
06:27ضرور غور کریں
06:28غصے اور رنجش کو دل میں رکھنا دراصل
06:31اپنے ہی سکون پر ایک نیزہ تاننے کی
06:33مترادف ہے
06:34تو آج ہمیں اپنے ذاتی اور غیر متزلزل
06:37اندرونی سکون کو پانے کے لیے
06:38किसे माफ करने की जरूरत है
06:40क्या आज हम वो घुसे की तलवार
06:42गिरा सकते हैं ताके वो हकी की सुकून
06:44पा सकें जिसका हमसे वादा किया गया है
06:46इस पर जरूर सोचिएगा
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