00:00जब सूर्य कुंडली के सप्तम भाव में स्थित होता है,
00:04तब व्यक्ति की पहचान केवल स्वयन तक सीमित नहीं रहती,
00:08बलकी संबंधों और साजेदारी के माध्यम से सामने आती है.
00:13सप्तम भाव विवा, साजेदारी और दूसरों के साथ जुडाव का ट्शेत्र है.
00:36संबंध उनके जीवन में केवल भावनात्मक नहीं होते,
00:41बलकी खुद की पहचान बनाने का माध्यम बन जाते हैं.
00:45लेकिन यदि सूर्य पीड़ित हो, तो यह योग संबंधों में आंकार,
00:50वर्चस्व या टकराव भी उत्पन्न कर सकता है.
00:54व्यक्ति स्वयम और अपने साथी के बीच संतुलन बनाने में संघर्ष अनुभव कर सकता है.
01:00सब्तम भाव का सूर्य हमें सिखाता है कि सच्चे संबंध वही हैं,
01:06जो हमारे भीतर के व्यक्तित्व को प्रकाशिक करें,
01:09न कि उसे दबाएं, क्योंकि जब संबंधों में सम्मान और चेतना हो,
01:14तब व्यक्ति का वास्तविक तेज स्वयम प्रकट होने लगता है.
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