00:03हिंदु धर में सुहागिन महिलाओं के लिए वर्ट सावित्री वरत का विशेश महत्व है ये वरत हर साल जेस्ट महां
00:10के अमवस्य तिथी को रखा जाता है धार्मिक मानिताओं के नुसार इस दिन वरत रखने और विदिविधान से पूजा करने
00:16पर पती को लंबी आयू उद
00:21प्राप्त होता है इस वरत में महिलाय अखर्ण सौ भागय के लिए वर्ट व्रिक्ष की पूजा करती है और बर्गत
00:28के पेड़ की परिक्रमां भी करती है इसके साथी वह कच्चा सूत लपीटती है लेकिन कि आप जानती है कि
00:34इस वरत में गले में सूत की माला पहनने का वि�
00:51कि माला अपने कले में कब और कैसे पहने साथी आपको बताएंगे कि इस माला को आपको कब उतारना है
00:56दरसल इस दिन सौहागे महला है सोलश गार कर वट व्रिक्ष की पूजा करती है इसके बाद बर्गत के पेड़
01:02की साथ 11 और 108 बार परिक्रमा करती है वही वट सावित्री
01:07की पूजा के दौरान जब आप बर्गत के पेड़ की परिक्रमा पूरी कर ले उसके बाद ये माला गले में
01:13पहनी जाती है इस माला में कच्चे सूथ को बारा बार लपेटा जाता है उसे लपेट कर एक माला तयार
01:19की जाती है इस माला को आप अपने गले में धारन करते हैं �
01:22वहीं आपको बता दे कच्चे सूत की माला को हल्दी में भी भीगोया जाता है।
01:26इसके बाद इसे पहनते हैं।
01:27कई महिलाएं इसमें बर्गत के कोमल पत्ते और छोटे फल यानि कोपल पिरोकर भी पहनती हैं।
01:33इसे माता सावित्री का अशिरवाद मारन कर गले में धारन किया जाता है।
01:37यसे पहनते समय अपने मन में पती की लंबी आयू और सुख़द वैवाहिक जीवन की काम ना करें।
01:42वहीं आपको बता दे कि इस माला को कम से कम बारा दिन पहनना होता है।
01:47बारा दिन बाद आप शुब दिन देखकर इस माला को उतार सकते हैं।
02:18प्ल्ड़ बारा देखकर इस माला को कि वह सकते हैं।
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