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Shani Jayanti Puja Samagri 2026: द्रिक पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 16 मई की सुबह 05 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी. इस तिथि का समापन 17 मई को अर्धरात्रि में रात 01 बजकर 30 मिनट पर होगा.शनि देव कलियुग में जल्द प्रसन्न होने वाले देवता हैं, लेकिन भक्तों को पाप कर्म से दूर रहना चाहिए. नहीं तो आप जैसा कर्म करेंगे, वैसा ही आपको फल देंगे. शनि देव की पूजा की सामग्री अन्य देवी और देवताओं की पूजा सामग्री से थोड़ी अलग होती है. आइए जानते हैं शनि जयंती की पूजा सामग्री के बारे में.Shani Jayanti Puja Samagri 2026: Shani Jayanti Puja Me Kya Kya Saman Lagta Hai ?

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~HT.504~PR.111~ED.464~

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00:03कहते हैं कि शनिदेव कल्यूग में जल्द प्रसन होने वाले देवता हैं लेकिन भक्तों को पापकर्म से दूर रहना होगा
00:10नहीं तो आप जैसा कर्म करेंगे वैसा ही आपको फल शनिदेव देंगे
00:15इस साल शनी जैन्ती 16 मई दिन शनिवार को पढ़ रहा है बानेता है कि शनी जैन्ती के दिन ही
00:21भगवान शनिदेव का जन्म हुआ था ऐसे में हर दुख और हर कश्ट से दूर होना चाहते हैं साड़े साती
00:28और धाया के अशुप्रभावों से मुक्ती जाते हैं तो इस दिन शन
00:45लोहा या स्टील का बर्तन, धूप और दीप, नीले और काले रंग के फूल, मिठाई, काली उडद, मौसमेफल, रक्षा सूत्र,
00:52शनी देव की मूर्ती या तस्वीर या फिर शनी मंदर में ही पूजन करें अगर बत्ती रूई की बत्ती अक्षत
00:59रोली, आसन के लिए काला क
01:01शनी चाली सा, शनी स्तोत्र और शनी देव की जन्म कथा की पुस्तक, वै 16 मै को शनी जैन्ती कि
01:09भगवान शनी देव की पूजा के लिए शुब मुहरत शाम 7 बचकर 5 मिनट से, रात 8 बचकर 23 मिनट
01:15तक रहेगा, फिल हाल अस वीडियो में इतना ही, वीडियो को लाइक और श
01:22भीडियो कै।
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